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Budget: एमएसएमई क्षेत्र को वैश्विक बनाने की तैयारी, टैरिफ जंग के बीच बजट में यूरोपीय बाजार में विस्तार पर जोर

Fri, 30 Jan 2026 04:05 AM IST
शिवम गर्ग अजीत खरे, अमर उजाला, नई दिल्ली
अजीत खरे, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 30 Jan 2026 04:05 AM IST
सार

इस बार के आम बजट में सरकार एमएसएमई सेक्टर को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की तैयारी कर रही है। अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच वित्त मंत्री का पूरा जोर यूरोपीय बाजार में पैठ बढ़ाने, निर्यातकों को सुरक्षा और पूंजी व जीएसटी राहत देने पर होगा।

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Union Budget 2026 India Aims to Globalize MSMEs, Focus on European Market
Budget 2026 - फोटो : Adobe stock

विस्तार

यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते की झलक इस बार के आम बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। अमेरिकी टैरिफ से मचे वैश्विक हड़कंप के बीच वित्त मंत्री का पूरा जोर एमएसएमई सेक्टर को यूरोपीय बाजार का लाभ दिलाने पर होगा। इसके लिए बजट में ऐसे प्रावधान किए जा सकते हैं, जिससे निर्यातकों और उत्पादकों को चरणबद्ध तरीके से कम होने वाले टैरिफ का सीधा फायदा मिल सके। खास तौर पर निर्यातकों को वैश्विक जोखिमों से सुरक्षा देने के लिए ट्रेड रेजिलिएंस फंड की घोषणा संभव है।

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पूंजी की लागत और जीएसटी पर राहत की उम्मीद
एमएसएमई सेक्टर की लंबे समय से मांग है कि विनिर्माण इकाइयों के लिए पूंजी की लागत घटाई जाए। बजट में छोटे कारोबारियों के लिए निरंतर पूंजी प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए समर्पित कोष का प्रावधान किया जा सकता है। इसके अलावा, जीएसटी के मोर्चे पर इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (वह स्थिति जब कच्चे माल या इनपुट पर कर की दर तैयार माल या आउटपुट पर कर की दर से अधिक होती है) की समस्या को सुलझाने और रिफंड प्रक्रिया को तेज करने पर वित्त मंत्री का ध्यान रहेगा। नियमों के अनुपालन के बोझ को कम करने के लिए 1.5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले सूक्ष्म उद्यमों को कुछ विशेष छूट दी जा सकती है।
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श्रम-प्रधान उद्योगों पर विशेष फोकस
वस्त्र, चमड़ा, हस्तशिल्प और खाद्य प्रसंस्करण जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों को बजट में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल के विजन को वैश्विक स्तर पर ले जाना है। रोजगार के लिए एमएसएमई क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप योजनाओं और नए स्टार्टअप्स के लिए सुगम रास्ते बनाने की भी घोषणा हो सकती है। फिनटेक और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म को प्रोत्साहित किया जाएगा।

निर्यात के लिए ग्रीन और स्मार्ट तकनीक पर जोर
यूरोपीय देशों के साथ व्यापार में अब पर्यावरण और कम कार्बन उत्सर्जन एक अनिवार्य शर्त बन चुकी है। इसे देखते हुए बजट में पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल तकनीकों को अपनाने के लिए विशेष पूंजी सब्सिडी का एलान हो सकता है। निर्यात बढ़ाने के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और मांग का सटीक पूर्वानुमान लगाने हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की भी योजना है। क्लस्टर आधारित विकास के लिए साझा डिजाइन और परीक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए भी बड़ी राशि आवंटित की जा सकती है।

एमएसएमई क्षेत्र की प्राथमिकताएं

  • क्रेडिट गारंटी : ऋण गारंटी योजनाओं को और अधिक लाभकारी और सुलभ बनाना।
  • समय पर रिफंड : जीएसटी प्रक्रिया को सरल करना, रिफंड व्यवस्था तेज करना।
  • ई-कॉमर्स : छोटे कारोबारियों को ऑनलाइन बाजार में बड़े खिलाड़ियों के मुकाबले समान अवसर देना।
  • पूंजी सहायता : पारंपरिक उद्योगों के आधुनिकीकरण के लिए कम ब्याज पर ऋण।


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