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Biz Updates: आज हिंदुस्तान कॉपर में बोली लगाएंगे खुदरा निवेशक; एअर इंडिया ने मालिकों से मांगे 13,000 करोड़
Wed, 26 Aug 2026 07:03 AM IST
ज्योति भास्कर
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 26 Aug 2026 07:03 AM IST
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बिजनेस न्यूज एंड अपडेट्स
- फोटो : amarujala.com
हिंदुस्तान कॉपर में 6% हिस्सेदारी बिक्री का ओएफएस मंगलवार को संस्थागत निवेशकों के लिए खुल गया। खुदरा निवेशक बुधवार से इसमें बोली लगा सकेंगे। शेयरों की बिक्री के लिए आधार मूल्य 514 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। सरकार के पास वर्तमान में हिंदुस्तान कॉपर में 66.14 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ओएफएस में 5.80 करोड़ से अधिक शेयर बेचे जाएंगे। इस बिक्री से सरकारी खजाने में करीब 3,000 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है।
एअर इंडिया ने मालिकों से मांगे 13,000 करोड़
घाटे से जूझ रही एअर इंडिया ने अपने मालिकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर (लगभग 13,000 करोड़ रुपये) की नई पूंजी मांग की है। सूत्रों के अनुसार, एयरलाइन ने यह रकम नए इक्विटी निवेश के रूप में मांगी है। यह टाटा समूह के नियंत्रण में आने के बाद मांगी गई सबसे बड़ी फंडिंग में से एक हो सकती है। टाटा समूह ने जनवरी 2022 में एयर इंडिया का नियंत्रण अपने हाथ में लिया था। इसके बाद एयरलाइन बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। इसमें पुराने विमानों का नवीनीकरण, नए विमानों का बेड़ा तैयार करना और परिचालन लागत घटाना शामिल है। कंपनी ने सैकड़ों विमानों का ऑर्डर किया है। एअर इंडिया का घाटा बढ़कर करीब 20,000 करोड़ रुपये पहुंच चुका है।
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एअर इंडिया ने मालिकों से मांगे 13,000 करोड़
घाटे से जूझ रही एअर इंडिया ने अपने मालिकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर (लगभग 13,000 करोड़ रुपये) की नई पूंजी मांग की है। सूत्रों के अनुसार, एयरलाइन ने यह रकम नए इक्विटी निवेश के रूप में मांगी है। यह टाटा समूह के नियंत्रण में आने के बाद मांगी गई सबसे बड़ी फंडिंग में से एक हो सकती है। टाटा समूह ने जनवरी 2022 में एयर इंडिया का नियंत्रण अपने हाथ में लिया था। इसके बाद एयरलाइन बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। इसमें पुराने विमानों का नवीनीकरण, नए विमानों का बेड़ा तैयार करना और परिचालन लागत घटाना शामिल है। कंपनी ने सैकड़ों विमानों का ऑर्डर किया है। एअर इंडिया का घाटा बढ़कर करीब 20,000 करोड़ रुपये पहुंच चुका है।
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रेड रॉट को मात देने वाली गन्ने की नई किस्म जल्द
गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) इसी साल गन्ने की नई रोगरोधी और अगेती किस्म सीओ-20016 जारी करने जा रहा है। सफल परीक्षण के बाद अगले तीन वर्षों में देश का चीनी उत्पादन तेजी से पटरी पर लौटने की ठोस उम्मीद बंधी है। उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में गन्ना उत्पादन में आई हालिया गिरावट का सबसे बड़ा कारण लोकप्रिय किस्म सीओ-0238 का रोगग्रस्त होना रहा है। रेड रॉट और टॉप बोरर कीटों के प्रकोप के कारण इसका उत्पादन घटकर 80 फीसदी के मुकाबले मात्र 30 फीसदी रह गया है।
गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) इसी साल गन्ने की नई रोगरोधी और अगेती किस्म सीओ-20016 जारी करने जा रहा है। सफल परीक्षण के बाद अगले तीन वर्षों में देश का चीनी उत्पादन तेजी से पटरी पर लौटने की ठोस उम्मीद बंधी है। उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में गन्ना उत्पादन में आई हालिया गिरावट का सबसे बड़ा कारण लोकप्रिय किस्म सीओ-0238 का रोगग्रस्त होना रहा है। रेड रॉट और टॉप बोरर कीटों के प्रकोप के कारण इसका उत्पादन घटकर 80 फीसदी के मुकाबले मात्र 30 फीसदी रह गया है।
मैक्स फाइनेंशियल के खिलाफ मामला खत्म
सेबी ने 3,911 करोड़ रुपये के शेयरधारक नुकसान से जुड़े मामले में मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज, मैक्स लाइफ और एक्सिस समूह की कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी है। कंपनियों पर चूक और धोखाधड़ी के आरोप साबित नहीं हो सके। सेबी ने 2010, 2015 और 2020 में किए गए तीन समझौतों की जांच की थी। आरोप था कि मैक्स फाइनेंशियल ने इसके बारे में पर्याप्त और समय पर खुलासा नहीं किया। जिससे शेयरधारकों को नुकसान हुआ।
सेबी ने 3,911 करोड़ रुपये के शेयरधारक नुकसान से जुड़े मामले में मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज, मैक्स लाइफ और एक्सिस समूह की कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी है। कंपनियों पर चूक और धोखाधड़ी के आरोप साबित नहीं हो सके। सेबी ने 2010, 2015 और 2020 में किए गए तीन समझौतों की जांच की थी। आरोप था कि मैक्स फाइनेंशियल ने इसके बारे में पर्याप्त और समय पर खुलासा नहीं किया। जिससे शेयरधारकों को नुकसान हुआ।
क्स विवाद में फॉक्सवैगन को नहीं मिली राहत
जर्मन वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन को 1.4 अरब डॉलर (करीब 12,000 करोड़ रुपये) के टैक्स विवाद में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। मुंबई हाईकोर्ट ने मंगलवार को मामले की दोबारा सुनवाई का फैसला किया है। इससे देश के सबसे चर्चित कर विवादों में से एक फॉक्सवेगन का मामला और लंबा खिंच सकता है। हाईकोर्ट गठित करेगा नई पीठ...इस मामले में एक वर्ष से अधिक समय बाद भी फैसला नहीं हो सका है। हाईकोर्ट अब नई पीठ का गठन करेगा। आरोप है कि फॉक्सवैगन ने करीब 12 वर्षों तक भारत में आयात किए गए कुछ ऑटो कंपोनेंट्स का गलत वर्गीकरण किया, जिससे कम कर का भुगतान किया गया। इसी आधार पर कंपनी पर लगभग 1.4 अरब डॉलर की कर देनदारी तय की गई है।
जर्मन वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन को 1.4 अरब डॉलर (करीब 12,000 करोड़ रुपये) के टैक्स विवाद में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। मुंबई हाईकोर्ट ने मंगलवार को मामले की दोबारा सुनवाई का फैसला किया है। इससे देश के सबसे चर्चित कर विवादों में से एक फॉक्सवेगन का मामला और लंबा खिंच सकता है। हाईकोर्ट गठित करेगा नई पीठ...इस मामले में एक वर्ष से अधिक समय बाद भी फैसला नहीं हो सका है। हाईकोर्ट अब नई पीठ का गठन करेगा। आरोप है कि फॉक्सवैगन ने करीब 12 वर्षों तक भारत में आयात किए गए कुछ ऑटो कंपोनेंट्स का गलत वर्गीकरण किया, जिससे कम कर का भुगतान किया गया। इसी आधार पर कंपनी पर लगभग 1.4 अरब डॉलर की कर देनदारी तय की गई है।