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Swiss Banks: स्विस बैंकों में तीन गुना बढ़ा भारतीयों का पैसा, ग्राहकों की जमा राशि में 11 फीसदी का उछाल

Thu, 19 Jun 2025 10:03 PM IST
निर्मल कांत बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, ज्यूरिख
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, ज्यूरिख Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 19 Jun 2025 10:03 PM IST
सार

Swiss Banks: 2023 में भारी गिरावट के बाद 2024 में स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि तीन गुना से ज्यादा बढ़कर करीब 37,600 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, इसमें से सीधे भारतीय खातों में केवल 3,675 करोड़ रुपये जमा हैं, जो कुल का एक छोटा हिस्सा है।

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swiss banks indian deposits increase sharply highest since 2021
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एएनआई

विस्तार

स्विस बैंकों में भारतीय जमा राशि 2024 में तीन गुना से भी ज्यादा बढ़कर 3.5 बिलियन स्विस फ्रैंक (लगभग 37,600 करोड़ रुपये) हो गई है। इसका मुख्य कारण स्थानीय शाखाओं और अन्य वित्तीय संस्थानों के जरिए जमा धन में भारी वृद्धि है। स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में अपने वार्षिक आंकड़े गुरुवार को जारी किए। हालांकि,  भारतीय ग्राहकों के खातों में जमा धन 11 फीसदी बढ़कर 346 मिलियन स्विस फ्रैंक (करीब 3,675 करोड़ रुपये) हुआ, जो कुल जमा राशि का लगभग दसवां हिस्सा ही है।

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स्विस बैंकों में जमा भारतीयों और भारतीय कंपनियों के पैसे में 2023 में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। उस साल जमा राशि लगभग 70 फीसदी घट गई थी, जिससे कुल रकम घटकर करीब 9,771 करोड़ रुपये या 1.04 अरब स्विस फ्रैंक रह गई थी। यह पिछले कई वर्षों में सबसे निचले स्तर था। लेकिन 2024 में इस स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। इस साल भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में जमा की गई धनराशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जो 2021 के बाद से सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। 2021 में भारतीय पैसा 14 साल के सबसे ऊंचे स्तर 3.83 अरब स्विस फ्रैंक पर पहुंच गया था। यह आंकड़े स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक यानी स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) द्वारा जारी किए गए हैं, जो बैंकों से आधिकारिक तौर पर इकट्ठा किए गए डाटा पर आधारित होते हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को स्विट्जरलैंड में भारतीयों द्वारा जमा किए गए कथित काले धन के वास्तविक संकेतक के रूप में नहीं देखा जा सकता। साथ ही इसमें वह पैसा भी शामिल नहीं होता जो भारतीयों, अनिवासी भारतीयों (NRI) या अन्य लोगों ने किसी तीसरे देश की कंपनियों या संस्थाओं के नाम पर स्विस बैंकों में रखा हो।
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2023 के अंत में कुल देनदारियां 354.5 करोड़ स्विस फ्रैंक
एसएनबी की ओर से 2023 के अंत में स्विस बैंकों की कुल देनदारियों या उनके भारतीय ग्राहकों को बकाया राशियों के रूप में 354.5 करोड़ स्विस फ्रैंक बताए गए हैं। इनमें ग्राहक जमा में 34.6 करोड़ स्विस फ्रैंक (2023 के अंत में 31.0 करोड़ स्विस फ्रैंक से अधिक), अन्य बैंकों के माध्यम से रखे गए 302 करोड़ स्विस फ्रैंक (42.7 करोड़ स्विस फ्रैंक से कम), न्यासों या ट्रस्टों के माध्यम से 4.1 करोड़ स्विस फ्रैंक (1 करोड़ स्विस फ्रैंक से अधिक) और बॉन्ड, प्रतिभूतियों और विभिन्न अन्य वित्तीय साधनों के रूप में ग्राहकों को देय अन्य राशियों के रूप में 13.5 करोड़ स्विस फ्रैंक (29.3 करोड़ स्विस फ्रैंक से कम) शामिल हैं। एसएनबी के अनुसार, भारतीय ग्राहकों के प्रति स्विस बैंकों की कुल देनदारियों के लिए इसके डाटा में स्विस बैंकों में भारतीय ग्राहकों के सभी प्रकार के फंड को शामिल किया गया है। इसमें व्यक्तियों, बैंकों और उद्यमों से जमा राशि भी शामिल है। इसमें भारत में स्विस बैंकों की शाखाओं के साथ-साथ गैर जमा देनदारियों का डाटा भी शामिल है।


2006 में रिकॉर्ड उच्चस्तर पर थी जमा राशि
एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार, 2006 में कुल राशि करीब 6.5 अरब स्विस फ्रैंक के रिकॉर्ड उच्चस्तर पर थी। इसके बाद 2011, 2013, 2017, 2020 और 2021 सहित कुछ वर्षों को छोड़कर यह ज्यादातर नीचे की ओर ही रही है। दूसरी ओर, बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (बीआईएस) के स्थानीय बैंकिंग सांख्यिकी ने 2024 के दौरान ऐसी निधियों में करीब 6 प्रतिशत की वृद्धि दिखाते हुए 74.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 650 करोड़ रुपये) की बढ़ोतरी की है। इसे अतीत में भारतीय और स्विस अधिकारियों की ओर से स्विस बैंकों में भारतीय व्यक्तियों द्वारा जमा के लिए अधिक विश्वसनीय उपाय के रूप में वर्णित किया गया है। हालांकि 2020 में लगभग 39 प्रतिशत की वृद्धि के बाद 2023 में इसमें 25 प्रतिशत, 2022 में 18 प्रतिशत तथा 2021 में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। यह आंकड़ा स्विस-निवासी बैंकों के भारतीय गैर-बैंक ग्राहकों के जमा के साथ-साथ ऋण को भी ध्यान में रखता है और 2018 में 11 प्रतिशत और 2017 में 44 प्रतिशत की गिरावट के बाद 2019 में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 2007 के अंत में यह 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर (9,000 करोड़ रुपये से अधिक) के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

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काला धन नहीं कहा जा सकता
स्विस प्राधिकारियों ने हमेशा यह कहा है कि स्विट्जरलैंड में भारतीय नागरिकों की ओर से रखी गई संपत्ति को काला धन नहीं माना जा सकता है और वे कर धोखाधड़ी तथा कर चोरी के खिलाफ लड़ाई में भारत का पूरी तरह से समर्थन करते हैं। स्विट्जरलैंड और भारत के बीच कर मामलों में सूचनाओं का स्वचालित आदान-प्रदान 2018 से लागू है। इसके तहत, 2018 से स्विस वित्तीय संस्थानों में खाते रखने वाले सभी भारतीय निवासियों की विस्तृत वित्तीय जानकारी पहली बार सितंबर 2019 में भारतीय कर अधिकारियों को प्रदान की गई थी और इसका पालन हर साल किया जा रहा है। इसके अलावा, स्विट्जरलैंड ने प्रथमदृष्टया साक्ष्य पेश करने के बाद वित्तीय गड़बड़ियों में लिप्त संदिग्ध भारतीयों के खातों के बारे में सक्रिय रूप से जानकारी साझा की है। अब तक सैकड़ों मामलों में सूचनाओं का ऐसा आदान-प्रदान हुआ है।

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