SEBI: सेबी ने यस बैंक और निप्पॉन म्यूचुअल फंड के खिलाफ शुरू की जांच, जल्द आ सकता है फैसला
2020 में यस बैंक डूबने के कगार पर आ गया था। उस समय भारतीय रिजर्व बैंक ने कई निवेशकों का एक समूह बनाकर बैंक को डूबने से बचा लिया था। हालांकि, जो बॉन्ड था, उसे राइट ऑफ कर दिया गया यानी जो निवेश उसमें किया गया था वह डूब गया। बॉन्ड्स की ब्याज दर बहुत ज्यादा थी।
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निवेशकों की रकम का दुरुपयोग करने के मामले में सेबी ने निप्पॉन म्यूचुअल फंड और यस बैंक की जांच शुरू की है। इसका फैसला जल्द आ सकता है। यह मामला 2016-2019 के बीच का है। उस समय यह रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड था जो अनिल अंबानी की कंपनी थी।
अक्तूबर, 2019 में जापान की निप्पॉन लाइफ ने इसमें अनिल अंबानी की 75 फीसदी हिस्सेदारी खरीद कर मालिकाना हक ले ली थी। यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के टियर-1 बॉन्ड में निप्पॉन ने 2016 से 2019 के बीच निवेशकों का पैसा लगाया था। उस समय कोटक महिंद्रा, फ्रैंकलिन सहित अन्य फंड हाउसों ने भी निवेश किया था। हालांकि, निप्पॉन ने सबसे अधिक 20 फीसदी रकम लगाई थी। निप्पॉन इंडिया का असेट अंडर मैनेजमेंट यानी निवेशकों की कुल रकम दिसंबर, 2022 तक 2.90 लाख करोड़ रुपये थी। यह देश का सातवां और विदेशी मालिकाना हक वाला सबसे बड़ा फंड हाउस है। उधर, निप्पॉन के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी जांच में नियामक का सहयोग कर रही है।
ऐसे बढ़ी समस्या
2020 में यस बैंक डूबने के कगार पर आ गया था। उस समय भारतीय रिजर्व बैंक ने कई निवेशकों का एक समूह बनाकर बैंक को डूबने से बचा लिया था। हालांकि, जो बॉन्ड था, उसे राइट ऑफ कर दिया गया यानी जो निवेश उसमें किया गया था वह डूब गया। बॉन्ड्स की ब्याज दर बहुत ज्यादा थी। इसमें एक शर्त थी कि अगर बैंक दिवालिया हुआ तो बॉन्ड के निवेश को राइट ऑफ किया जा सकता है। इस मामले में बॉन्ड धारकों ने अदालत में केस भी किया है।
इसलिए निप्पॉन की ही जांच
यस बैंक ने अनिल अंबानी की अन्य कंपनियों को कर्ज दिया था। सेबी इसकी जांच कर रहा है कि क्या यस बैंक ने निप्पॉन के निवेश को ही वापस अनिल अंबानी की कंपनियों में निवेश किया?
- सेबी का नियम है कि फंड हाउसों की मुख्य यानी पैरेंट कंपनी निवेशकों के पैसों का उपयोग नहीं कर सकती है।
आरोप सही हुए तो जुर्माना और प्रतिबंध लगेगा
जांच में यदि आरोप सही पाए गए तो निप्पॉन और यस बैंक के मौजूदा व पूर्व अधिकारियों पर जुर्माना लगेगा। साथ ही शेयर बाजार में कारोबार पर प्रतिबंध लग सकता है। इस मामले में निप्पॉन के वर्तमान सीईओ संदीप सिक्का पर भी जुर्माना लग सकता है क्योंकि वे 2009 से मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।
गो मैकेनिक वित्तीय गड़बड़ियों में फंसा
वाहनों को बिक्री के बाद सेवा व रखरखाव सेवाएं मुहैया कराने वाला देश का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म गोमैकेनिक गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में फंस गया है। इसमें अनियमितता इतनी ज्यादा है कि कंपनी के चलने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। निवेशक कंपनी के संस्थापकों को छुट्टी पर जाने के लिए कह सकते हैं। कंपनी के वित्तीय खातों की फोरेंसिक जांच ईवाई कर रही है।