बदलेगा रोटी का रंग, तीन रंगों वाले पौष्टिक गेहूं की किस्में हुईं तैयार
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आठ साल के लंबे शोध के बाद अब कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं की तीन अलग-अलग रंगों वाली किस्मों को तैयार करने में सफलता प्राप्त कर ली है। इससे अब रोटी का रंग भी बदल जाएगा।
इन तीन रंगों की तैयार हुईं किस्में
पंजाब के मोहाली में स्थित नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट ने इन किस्मों को तैयार किया है। अब बैंगनी, काला और नीले रंग की प्रजाति का गेहूं तैयार किया गया है। फिलहाल इसकी खेती 700 एकड़ से अधिक में की गई है। यह खेती पंजाब के पटियाला, जालंधर से लेकर के मध्य प्रदेश के विदिशा तक में हो रही है।
इन लोगों के लिए फायदेमंद
रंगीन गेहूं से आपको एंथोक्यानिन की जरूरी मात्रा मिल सकती है। एंथोक्यानिन एक एंटीऑक्सिडेंट है और इसको खाने से ह्रदय रोगों, मधुमेह और मोटापे जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को रोकने में मदद मिलेगी। एनएबीआई में रंगीन गेहूं प्रोजेक्ट की प्रमुख वैज्ञानिक मोनिका गर्ग ने बताया, 'हमने जापान से जानकारी मिलने के बाद 2011 से इस पर कार्य शुरू किया था। हमने कई सीजन तक प्रयोग करने के बाद इसमें सफलता पाई है।'
जहां साधारण गेहूं में इसकी मात्रा पांच पीपीएम होती है, वहीं काले गेंहू में 140 पीपीएम, नीले गेहूं में 80 पीपीएम और बैंगनी गेहूं में 40 पीपीएम होती है। वैज्ञानिकों ने कहा कि हमने चूहे पर इसका प्रयोग किया है और यह पाया गया है कि रंगीन गेहूं खाने वालों का वजन बढ़ने की संभावना कम होती है।
प्रति एकड़ पैदावार कम
हालांकि इस तरह के गेहूं की प्रति एकड़ पैदावार काफी कम है। जहां सामान्य गेहूं की पैदावार 24 क्विंटल प्रति एकड़ है, वहीं रंगीन गेहूं की प्रति एकड़ पैदावार 17 से 20 क्विंटल है। इसलिए हो सकता है बाजार में यह गेहूं थोड़ा सा महंगा मिले।