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Insurance: स्वास्थ्य-जीवन बीमा पॉलिसी की जीएसटी दरों में कमी संभव, कल होने वाली बैठक में किया जा सकता है फैसला

Sun, 08 Sep 2024 06:03 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 08 Sep 2024 06:03 AM IST
सार

केद्र सहित सभी राज्य इस बात से सहमत हैं कि स्वास्थ और जीवन बीमा पर वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी दरें 18 फीसदी के रूप में बहुत ज्यादा है, जबकि बीमा लोगों के लिए बहुत ही जरूरी विषय है।

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Relief expected from higher GST rates on life and health insurance policies
जीवन बीमा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : i stock

विस्तार

जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर ज्यादा जीएसटी की दरों से राहत मिलने की उम्मीद है। सोमवार को जीएसटी परिषद की होने वाली बैठक में इस पर फैसला किया जा सकता है। हालांकि, राज्यों को यह चिंता है कि दरों को कम करने के बाद भी बीमा कंपनियां इसका फायदा ग्राहकों को देंगी या नहीं।

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सूत्रों के मुताबिक, केद्र सहित सभी राज्य इस बात से सहमत हैं कि स्वास्थ और जीवन बीमा पर वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी दरें 18 फीसदी के रूप में बहुत ज्यादा है, जबकि बीमा लोगों के लिए बहुत ही जरूरी विषय है। ऐसे में दरों को कम करने के साथ ही ग्राहकों को इसका फायदा देने के लिए एक प्रणाली भी तैयार की जा सकती है, जिससे बीमा कंपनियां फायदा न ले सकें। एक राज्य के वित्त मंत्री ने बताया, अधिकारी उन विकल्पों की तलाश कर रहे हैं जो पॉलिसीधारकों की मदद कर सकते हैं, लेकिन बीमा कंपनियों के मुनाफा काटने की चिंता भी बनी है। एक दूसरे वित्त मंत्री ने कहा, कंपनियां बढ़े हुए दावों का हवाला देते हुए कोरोना के बाद से प्रीमियम बढ़ा रही हैं। हालांकि, कोरोना संबंधित दावों में कमी आई है, लेकिन बीमा कंपनियों ने पॉलिसीधारकों को कोई राहत नहीं दी है। 
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राज्यों के मंत्री सुझाएंगे फॉर्मूला
राज्यों के मंत्री एक ऐसा फॉर्मूला सुझाने का प्रयास करेंगे, जिससे ग्राहकों पर बोझ कम हो। यह भी सुनिश्चित हो कि जीएसटी दर घटने का लाभ कंपनियों की जेब में न जाए। पहले सरकार के पास मुनाफाखोरी विरोधी कानून थे जो यह सुनिश्चित करते थे कि जीएसटी दरें कम होने पर ग्राहकों को इसका लाभ मिले। हालांकि, जीएसटी दर में कम बदलाव होने के कारण सरकार ने इन कानूनों को निष्क्रिय कर दिया है। इससे अधिकारियों के पास यह अधिकार नहीं है कि वे दरों के घटने पर कंपनियों को कम प्रीमियम लेने का दबाव बना सकें।


ज्यादा प्रीमियम वाली पॉलिसी को मिल सकता है फायदा
मंत्रियों के बीच एक राय यह भी है कि सालाना 50,000 और 60,000 रुपये के बीच वाले प्रीमियम की पॉलिसियों के लिए कर राहत प्रदान की जाए। हालांकि, इससे ज्यादातर मध्यमवर्गीय परिवारों को मदद नहीं मिलेगी। चार लोगों के एक परिवार को आमतौर पर 15 लाख के कवर वाली स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के लिए लगभग 50,000 का प्रीमियम देना होता है। गंभीर बीमारी की स्थिति में ये रकम भी अपर्याप्त हो सकती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए बीमा की लागत इससे भी अधिक है।

 कई राज्य राजस्व घाटे को लेकर चिंतित
भले ही स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी कम करने का दबाव है, लेकिन कई राज्य संभावित राजस्व हानि को लेकर चिंतित हैं। केंद्र और राज्य के अधिकारियों वाली जीएसटी फिटमेंट कमेटी किसी समाधान पर सहमत नहीं हो पाई है। अप्रैल 2021 से मार्च 2024 के बीच केंद्र और राज्यों ने स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम से 21,000 करोड़ का जीएसटी एकत्र किया।

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