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NPA: सरकारी बैंकों का मुनाफा 1.79 लाख करोड़ के नए शिखर पर, एनपीए घटा; कारोबार और बेहतर मार्जिन का दिखा असर
Sat, 10 May 2025 05:22 AM IST
शुभम कुमार
अजीत सिंह
अजीत सिंह
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 10 May 2025 05:22 AM IST
सार
वित्त वर्ष 2024-25 में 12 सरकारी बैंकों ने कुल ₹1.79 लाख करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया, जो पिछले साल से 27% ज्यादा है। सबसे ज्यादा मुनाफा SBI ने ₹70,901 करोड़ कमाया। वहीं PNB का लाभ 101% बढ़ा।
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बैंक
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
एनपीए घटने, कारोबार बढ़ने और बेहतर मार्जिन के दम पर सभी 12 सरकारी बैंकों ने बीते वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 1.79 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। यह वित्त वर्ष 2023-24 में 1.41 लाख करोड़ के रिकॉर्ड मुनाफे से 27 फीसदी अधिक है। रुपये के लिहाज से कुल मुनाफे में से अकेले एसबीआई की हिस्सेदारी 70,901 करोड़ रुपये रही। बैंक ऑफ बड़ौदा 19,581 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
पंजाब नेशनल बैंक का प्रतिशत के रूप में मुनाफा सबसे अधिक 101 फीसदी बढ़कर 16,630 करोड़ रुपये पहुंच गया। सेंट्रल बैंक 78 फीसदी वृद्धि के साथ दूसरे और पंजाब एंड सिंध बैंक 71 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर है। तीसरे स्थान पर काबिज यूनियन बैंक को 17,987 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है। केनरा बैंक 17,540 करोड़ के साथ चौथे और पंजाब नेशनल बैंक 16,630 करोड़ के साथ पांचवें स्थान पर है। छह बैंक ऐसे हैं, जिन्होंने सालाना 10,000 करोड़ से अधिक फायदा कमाया है। सालाना आधार पर सभी बैंकों का लाभ बढ़ा है।
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चौथी तिमाही में भी बढ़ा फायदा
चौथी तिमाही यानी जनवरी-मार्च के बीच बैंकों का फायदा 48,451 करोड़ रहा, जो 2023-24 की समान तिमाही में 42,847 करोड़ था। इसमें से एसबीआई का अकेले 18,643 करोड़ है। तिमाही आधार पर सभी बैंकों का लाभ बढ़ा, लेकिन एसबीआई का 10 फीसदी गिर गया। सबसे अधिक फायदा कमाने में 124 फीसदी के साथ पंजाब एंड सिंध बैंक है। बैंक ऑफ इंडिया का 82 फीसदी, पंजाब नेशनल बैंक का 52 फीसदी, केनरा का 28 फीसदी, इंडियन बैंक का 32 फीसदी और इंडियन ओवरसीज बैंक का 30 फीसदी मुनाफा बढ़ा है।
सरकार की चार आर की रणनीति का असर
सरकार ने घाटे में चल रहे इन बैंकों को उबारने के लिए चार आर की रणनीति शुरू की। इसमें बैंकों में फिर से पूंजी डालना, पहचान करना, रिजॉल्यूशन और सुधार शामिल हैं। इससे बैंकों के बुरे फंसे कर्ज यानी एनपीए में कमी हुई तो उधारी देने में तेजी आई।
हर साल ऐसे बढ़ा लाभ
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शुद्ध एनपीए 0.70% से कम
बैंकों का शुद्ध एनपीए 0.70 फीसदी से कम है। एकमात्र पंजाब एवं सिंध बैंक का 0.96 फीसदी है। सबसे कम 0.18 फीसदी एनपीए बैंक ऑफ महाराष्ट्र का है। एसबीआई का 0.47 फीसदी, यूनियन बैंक का 0.63 फीसदी, बैंक ऑफ बड़ौदा का 0.58 फीसदी व पीएनबी का 0.40 फीसदी है।
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पंजाब नेशनल बैंक का प्रतिशत के रूप में मुनाफा सबसे अधिक 101 फीसदी बढ़कर 16,630 करोड़ रुपये पहुंच गया। सेंट्रल बैंक 78 फीसदी वृद्धि के साथ दूसरे और पंजाब एंड सिंध बैंक 71 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर है। तीसरे स्थान पर काबिज यूनियन बैंक को 17,987 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है। केनरा बैंक 17,540 करोड़ के साथ चौथे और पंजाब नेशनल बैंक 16,630 करोड़ के साथ पांचवें स्थान पर है। छह बैंक ऐसे हैं, जिन्होंने सालाना 10,000 करोड़ से अधिक फायदा कमाया है। सालाना आधार पर सभी बैंकों का लाभ बढ़ा है।
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चौथी तिमाही में भी बढ़ा फायदा
चौथी तिमाही यानी जनवरी-मार्च के बीच बैंकों का फायदा 48,451 करोड़ रहा, जो 2023-24 की समान तिमाही में 42,847 करोड़ था। इसमें से एसबीआई का अकेले 18,643 करोड़ है। तिमाही आधार पर सभी बैंकों का लाभ बढ़ा, लेकिन एसबीआई का 10 फीसदी गिर गया। सबसे अधिक फायदा कमाने में 124 फीसदी के साथ पंजाब एंड सिंध बैंक है। बैंक ऑफ इंडिया का 82 फीसदी, पंजाब नेशनल बैंक का 52 फीसदी, केनरा का 28 फीसदी, इंडियन बैंक का 32 फीसदी और इंडियन ओवरसीज बैंक का 30 फीसदी मुनाफा बढ़ा है।
सरकार की चार आर की रणनीति का असर
सरकार ने घाटे में चल रहे इन बैंकों को उबारने के लिए चार आर की रणनीति शुरू की। इसमें बैंकों में फिर से पूंजी डालना, पहचान करना, रिजॉल्यूशन और सुधार शामिल हैं। इससे बैंकों के बुरे फंसे कर्ज यानी एनपीए में कमी हुई तो उधारी देने में तेजी आई।
हर साल ऐसे बढ़ा लाभ
| वित्त वर्ष | फायदा |
|---|---|
| 2020-21 | ₹31,816 करोड़ |
| 2021-22 | ₹66,539 करोड़ |
| 2022-23 | ₹1.04 लाख करोड़ |
| 2023-24 | ₹1.41 लाख करोड़ |
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शुद्ध एनपीए 0.70% से कम
बैंकों का शुद्ध एनपीए 0.70 फीसदी से कम है। एकमात्र पंजाब एवं सिंध बैंक का 0.96 फीसदी है। सबसे कम 0.18 फीसदी एनपीए बैंक ऑफ महाराष्ट्र का है। एसबीआई का 0.47 फीसदी, यूनियन बैंक का 0.63 फीसदी, बैंक ऑफ बड़ौदा का 0.58 फीसदी व पीएनबी का 0.40 फीसदी है।