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EC: सियासी दलों ने 2015 से 2020 तक पांच साल में प्रचार-प्रसार में खर्च किए 6500 करोड़, आयोग की ऑडिट में खुलासा

Sat, 16 Mar 2024 06:18 AM IST
जलज मिश्रा अजीत सिंह, नई दिल्ली
अजीत सिंह, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 16 Mar 2024 06:18 AM IST
सार

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, सात राष्ट्रीय पार्टियों में भाजपा, कांग्रेस, बसपा, एनसीपी, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस व अन्य हैं। उपरोक्त रकम में से करीब 3,400 करोड़ यानी 54 फीसदी रकम पार्टियों ने विज्ञापनों पर खर्च की है। हालांकि, इसमें स्थानीय स्तर के भी खर्च शामिल हैं।

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Political parties spent Rs 6500 crore on publicity in five years from 2015 to 2020 EC audit
मतों की गणना 22 जून को होगी - फोटो : File Photo

विस्तार

चुनाव आयोग ने भले ही राजनीतिक दलों के लिए चुनावी खर्च की सीमा तय कर रखी हो, लेकिन पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए खुले हाथों से खर्च करने में पीछे नहीं रहतीं। यहां तक कि अपनी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए करोड़ों रुपये बहाती हैं। निर्वाचन आयोग को दी अपनी ऑडिट रिपोर्ट में राजनीतिक दलों ने खुद यह बात मानी है। वर्ष 2015 से 2020 तक हुए विभिन्न चुनावों में राजनीतिक दलों ने 6,500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इनमें 11 दल क्षेत्रीय जबकि सात राष्ट्रीय हैं।

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ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, सात राष्ट्रीय पार्टियों में भाजपा, कांग्रेस, बसपा, एनसीपी, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस व अन्य हैं। उपरोक्त रकम में से करीब 3,400 करोड़ यानी 54 फीसदी रकम पार्टियों ने विज्ञापनों पर खर्च की है। हालांकि, इसमें स्थानीय स्तर के भी खर्च शामिल हैं। इस दौरान, पांच वर्षों में भाजपा ने सबसे अधिक 56 फीसदी यानी 3,600 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं, कांग्रेस ने 21.41 फीसदी (1,400 करोड़) रकम खर्च की। इसका मतलब कुल 18 पार्टियों में से इन दोनों ने अकेले 77 फीसदी से ज्यादा पैसा खर्च किया है। सपा ने 3.95 फीसदी, डीएमके ने 3.6 फीसदी, वाईएसआर कांग्रेस ने 2.17 फीसदी, बसपा ने 2.04 और तृणमूल कांग्रेस ने 1.83 फीसदी रकम खर्च की है। 

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2019-20 में 18 पार्टियों ने कुल बजट का 49 फीसदी हिस्सा यानी 2,800 करोड़ रुपये विज्ञापन व प्रचार पर खर्च किए हैं। 1,300 करोड़ प्रचार पर खर्च हुए। सबसे अधिक 58% यानी 700 करोड़ भाजपा ने अकेले खर्च किए। वहीं, कांग्रेस ने 29.5%, एनसीपी ने 3.6% और आम आदमी पार्टी ने 1.7% रकम खर्च की।

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उम्मीदवारों पर भी जमकर खर्च
राजनीतिक पार्टियां उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता देने पर भी जमकर खर्च करती हैं। भाजपा ने पांच वर्षों में कुल खर्च का 11.41% उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता देने पर खर्च किया है। एनसीपी ने 7.9 फीसदी, टीएमसी ने 5.1 फीसदी, आम आदमी पार्टी ने 2.3 फीसदी और जनता दल (यू) ने 1.7 फीसदी रकम इस मद में खर्च की है।

वास्तविक खर्च का अनुमान मुश्किल
हर चुनाव में प्रत्याशियों के खर्च की सीमा तय है। बावजूद इसके किसी प्रत्याशी ने कितना खर्च किया, इसका वास्तविक अनुमान लगाना मुश्किल है।

चुनावों में प्रमुख खर्च

  1. हेलिकॉप्टर एक इंजन- 65,000 रुपये घंटे।
  2. हेलिकॉप्टर दो इंजन-3.75 लाख रुपये घंटे
  3. एसयूवी कार : 10,000 प्रतिदिन, होर्डिंग : 20 हजार रुपये। सोफा : 10 से 15 हजार रुपये।
  4. होर्डिंग- एक से डेढ़ लाख रुपये। अखबारों व सोशल मीडिया में विज्ञापन 30-42 लाख।

सबसे महंगा चुनाव इस बार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च की उम्मीद
अमेरिका स्थित कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस थिंक-टैंक में वरिष्ठ फेलो और दक्षिण एशिया कार्यक्रम के निदेशक वैष्णव के अनुसार, भारत में 2019 का आम चुनाव भारतीय इतिहास में सबसे महंगा था और संभवत: किसी भी लोकतांत्रिक देश में अब तक के सबसे महंगे चुनावों में से एक था। यह रकम 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा थी। इस साल इसके एक लाख करोड़ रुपये के पार जाने की उम्मीद है।

3,400 करोड़ यानी 54 फीसदी रकम सिर्फ विज्ञापनों पर खर्च
भाजपा

  1. विज्ञापनों और प्रचार पर भाजपा ने इन पांच सालों में 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
  2. 15.29 % रकम परिवहन पर, 11.25% उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता व 7.2% रकम यानी 260 करोड़ मोर्चा, रैली और अन्य पर खर्च किए गए हैं।
  3. 324 फीसदी बढ़ा : भाजपा का प्रचार व विज्ञापन खर्च 2015-16 में 150 करोड़ से बढ़कर 2019-20 में 790 करोड़ रुपये हो गया। यानी 324 प्रतिशत का इजाफा।

कांग्रेस

  1. सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने कुल खर्च में से 40.8 फीसदी यानी 560 करोड़ रुपये प्रचार और विज्ञापन पर खर्च किए हैं।
  2. 17.47 फीसदी खर्च (250 करोड़ रुपये) चुनावी यात्राओं पर किया गया।
  3. 50 गुना बढ़ा : कांग्रेस का खर्च इसी दौरान 8 करोड़ से 50 गुना बढ़कर 400 करोड़ हो गया। 2016-17 की तुलना में 2017-18 में खर्च में 86% की कमी आई थी।
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