फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   msme sector felt the burn of rolling out of gst and demonetisation, says rbi

एमएसएमई सेक्टर के लिए 'कोढ़ में खाज' साबित हुई थी नोटबंदी, जीएसटीः आरबीआई

Sat, 18 Aug 2018 11:31 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 18 Aug 2018 11:31 AM IST
विज्ञापन
msme sector felt the burn of rolling out of gst and demonetisation, says rbi

नवंबर 2016 में केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी के चलते सबसे ज्यादा बेहाल सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) सेक्टर हुआ था। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की एक रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के बाद लागू की जीएसटी ने पूरे सेक्टर पर कोढ़ में खाज साबित हुई। 

विज्ञापन


2015 के स्तर पर पहुंचा कारोबार

 सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले कर्ज में गिरावट आई।आरबीआई की मिनी स्ट्रीट मेमो रिपोर्ट में कहा गया है कि लघु उद्योगों को वितरित कर्ज 2017 के निचले स्तर से सुधर कर 2015 मध्य के बढ़े स्तर पर पहुंच गया। यद्यपि एमएसएमई क्षेत्र को बैंकों और एनबीएफसी द्वारा दिये गये कर्ज सहित सूक्ष्म ऋण में हाल की तिमाहियों में तेजी आई।
विज्ञापन


जीएसटी का दिखा असर 

2017 में लागू की गई जीएसटी का असर भी इस सेक्टर में देखने को मिला। खासतौर पर हीरे व सोने-चांदी से आभूषण तैयार करने वाले ज्वैलरी सेक्टर में कर्मचारियों को वेतन देने के लाले पड़ गए थे। जीएसटी के लागू होने से व्यापार काफी मंदा हो गया, क्योंकि इस सेक्टर में बिना बिल के ही कारोबार होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जीएसटी के चलते अनुपालन लागत और अन्य परिचालन लागत में वृद्धि हुई क्योंकि 60 प्रतिशत से अधिक छोटे उद्योग कर दायरे में आये। हालांकि, इनमें से 60 प्रतिशत नई कर प्रणाली में समायोजित होने के लिये तैयार नहीं थे

कर्ज में आई गिरावट

सिडबी के अध्ययन में पाया गया है कि नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद अधिकतर एमएसएमई के कर्ज में गिरावट आई लेकिन मार्च 2018 से इसमें सुधार दिखाई दे रहा है। इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन के अनुमान के मुताबिक, एमएसएमई में अधिक से अधिक पूंजी की संभावित मांग करीब 370 अरब डॉलर है जबकि वर्तमान में 139 अरब डॉलर की आपूर्ति की जा रही है।  


दोनों के बीच 230 अरब डॉलर का अंतर है, जो कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 11 प्रतिशत है. नवंबर 2016 से फरवरी 2017 तक ऋण वृद्धि में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गयी। माना जा रहा है कि इसकी वजह नोटबंदी रही। हालांकि, कर्ज में फरवरी 2017 के बाद सुधार देखा गया और जनवरी-मई 2018 में यह औसतन 8.5 प्रतिशत पर पहुंच गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed