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LPG: चाय ₹20 की, शादियों के मेन्यू पर कैंची और मरीजों की रोटी बंद; यूपी-बिहार से दिल्ली तक गैस की जमीनी हकीकत

Fri, 13 Mar 2026 06:48 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Fri, 13 Mar 2026 06:48 PM IST
सार

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण भारत की एलपीजी आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है, क्योंकि देश अपनी लगभग 60% एलपीजी आयात करता है। अफवाहों से आम जनता में 'पैनिक बुकिंग' मची है, जिससे गैस एजेंसियों पर कतारें लग गई हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है और उत्पादन 25-28% बढ़ाया गया है। आइए राज्यों के हालात से समझते हैं, असली दिक्कत कहां है।

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LPG Crisis India Gas Cylinder Shortage Petroleum Ministry Hardeep Singh Puri Indian Economy Black Marketing
एलपीजी संकट - फोटो : amarujala.com

विस्तार

पश्चिम एशिया में ईरान-इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत की घरेलू और व्यावसायिक रसोई गैस आपूर्ति पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आवाजाही प्रभावित होने की खबरों ने उपभोक्ताओं के बीच घबराहट बढ़ा दी है। यही कारण है कि रसोई गैस की मांग और कालाबाजारी दोनों अचानक से बढ़ गई है। एक तरफ आम लोग घंटों लाइनों में खड़े हैं, तो दूसरी तरफ उद्योग-धंधे ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं. आइए सवाल-जवाब के जरिए इस संकट की राज्यवार जमीनी हकीकत और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का विश्लेषण करते हैं।

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सवाल: पश्चिम एशिया के तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट ने भारत में एलपीजी सप्लाई चेन को किस तरह प्रभावित किया है? 

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जवाब: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत की रसोई और व्यापार पर पड़ा है, क्योंकि भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 से 62 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस आयात का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण यह मार्ग लगभग बंद जैसी स्थिति में आ गया है, जिससे जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है, बीमा लागत बढ़ गई है और गैस की खेप समय पर नहीं पहुंच पा रही है।
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सवाल: इस वैश्विक संकट से आम भारतीयों के बीच क्या चिंताएं और परेशानियां पैदा हुई हैं? 
जवाब: होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की खबरों ने देश भर में गैस की कमी की आशंकाओं को जन्म दिया है। नतीजतन, आम जनता के बीच पैनिक बुकिंग शुरू हो गई है। लोग गैस खाली होते ही तुरंत नया सिलेंडर बुक कर रहे हैं, जिससे गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग गई हैं और डिलीवरी सिस्टम चरमरा गया है। भारत के पास कच्चे तेल की तरह एलपीजी का लंबा रणनीतिक भंडार नहीं है; देश में आमतौर पर केवल 25 से 30 दिन का ही एलपीजी स्टॉक रहता है। यही कारण है कि आयात में जरा सी भी देरी का असर सीधे आम आदमी के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर दिखने लगा है, जिससे होटलों के मेन्यू छोटे हो गए हैं और शादियों के कैटरर्स बुकिंग रद्द कर रहे हैं।

सवाल: देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और राजधानी दिल्ली में एलपीजी की जमीनी हकीकत और कालाबाजारी की क्या स्थिति है? 
जवाब: उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर में स्थिति काफी तनावपूर्ण है, जहां आम लोग और छोटे कारोबारी दोनों ही गैस की किल्लत से जूझ रहे हैं। दिल्ली के कई हिस्सों में गैस संकट के चलते 'ब्लैक मार्केटिंग' का खुला खेल चल रहा है। जो घरेलू सिलेंडर सामान्य तौर पर 1000 रुपये के आसपास मिलता है, उसे 'दो घंटे में तुरंत डिलीवरी' का लालच देकर 2500 रुपये तक में बेचा जा रहा है। शादियों के इस सीजन में कैटरिंग संचालकों को गैस न मिलने के कारण मेन्यू में 30 से 40 फीसदी तक की कटौती करनी पड़ रही है। हालांकि, दिल्ली के कुछ क्षेत्रों, जैसे चिल्ला (पूर्वी दिल्ली) के गोदामों में स्थिति सामान्य बनी हुई है, जहां 5 से 7 मिनट के भीतर सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के आगरा में कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत के कारण 3500 रुपये खर्च करने पर भी गैस नहीं मिल रही है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में 10 रुपये की चाय 20 रुपये में और 10 रुपये का समोसा 14 रुपये में बिक रहा है। वाराणसी (काशी) की स्थिति और भी गंभीर है, जहां कमर्शियल सप्लाई ठप होने के कारण प्रसिद्ध 'होटल रीजेंसी', पातालपुरी मठ और अपना घर आश्रम जैसे स्थानों पर भोजन बनाने के लिए छतों पर मिट्टी और लकड़ी के चूल्हे बना दिए गए हैं।

सवाल: पंजाब और हरियाणा में एलपीजी किल्लत का औद्योगिक इकाइयों और शादियों पर क्या असर देखा जा रहा है?
जवाब:
उत्तर भारत के इन दोनों राज्यों में कमर्शियल गैस की कमी ने व्यापार और उत्सवों पर ग्रहण लगा दिया है। पंजाब में गैस का स्टॉक कम होने की खबरों के बीच हाहाकार मचा हुआ है। चंडीगढ़ और मोहाली में लंबी लाइनें देखी जा रही हैं; जीरकपुर में रिफिल के लिए कालाबाजारी में 1700 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। बरनाला जिले में गैस के लिए कतार में लगे 66 वर्षीय बुजुर्ग भूषण कुमार की अपनी बारी का इंतजार करते समय हार्ट अटैक से मौत हो गई। गैस न होने के कारण कैटरर्स ने शादियों के लिए लिया गया एडवांस पैसा लौटाना शुरू कर दिया है। हरियाणा के औद्योगिक शहर पानीपत में एलपीजी और पीएनजी की किल्लत के कारण लगभग 300 फैक्ट्रियां और डाइंग हाउस बंद हो चुके हैं। हिसार, सिरसा, और फतेहाबाद की सभी गैस एजेंसियों पर कमर्शियल बुकिंग बंद कर दी गई है, जिसके चलते होटल और मिठाई संचालकों ने वर्षों बाद एक बार फिर प्रदूषणकारी 'डीजल भट्ठियों' को चालू कर दिया है।

सवाल: पहाड़ी राज्यों-हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में गैस एजेंसियों का क्या हाल है?
जवाब:
रसद के लिहाज से चुनौतीपूर्ण इन पहाड़ी क्षेत्रों में आपूर्ति शृंखला बुरी तरह चरमराई है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कमर्शियल सिलेंडर पूरी तरह से अनुपलब्ध होने की खबरें हैं। 'दून होटल ओनर एसोसिएशन' के अनुसार स्टॉक खत्म होने की कगार पर है और रेस्टोरेंट संचालक तेजी से इंडक्शन चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में गैस खत्म होने की अफवाहें तेजी से फैली हैं, जिसके चलते लोग एजेंसियों पर भारी भीड़ लगाकर सिलेंडर जमा कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में स्थिति आधिकारिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच विरोधाभास दिखाती है। डिविजनल कमिश्नर ने दावा किया है कि घाटी में 13 दिन का एलपीजी स्टॉक मौजूद है। इसके उलट, जम्मू क्षेत्र में घरेलू उपभोक्ताओं को 25-25 दिन तक रिफिल नहीं मिल रहा है, बुकिंग के बाद ओटीपी नहीं आ रहे हैं, और कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से ढाबे बंद होने की कगार पर हैं।

सवाल: मध्य प्रदेश और राजस्थान में छात्रों की मेस और स्ट्रीट फूड का कारोबार कैसे प्रभावित हुआ है? 
जवाब:
इन दोनों राज्यों में शिक्षा और खान-पान के प्रमुख हब गैस किल्लत का खामियाजा भुगत रहे हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर का प्रसिद्ध सराफा बाजार, जो अपने स्ट्रीट फूड के लिए जाना जाता है, बुरी तरह प्रभावित है। तेज आंच की जरूरत वाले 'भुट्टे का किस' और 'गराडू' जैसे व्यंजन अब नहीं बन पा रहे हैं, और 'छप्पन दुकान' के व्यापारी मजबूरी में इंडक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं। छतरपुर जिले में कालाबाजारी रोकने के लिए मारे गए छापों में 38 अवैध कमर्शियल सिलेंडर जब्त किए गए हैं। राजस्थान में कोचिंग के लिए प्रसिद्ध शहर कोटा, जहां 500 से अधिक मेस रोजाना 30,000 छात्रों को भोजन कराती हैं, वहां गैस संकट के कारण थाली में डिश की संख्या घटाकर एक कर दी गई है। तवा चपाती की जगह तंदूरी रोटी दी जा रही है और नाश्ते में केवल सूखा भोजन परोसा जा रहा है।

सवाल: बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन बुकिंग और औद्योगिक इकाइयों की क्या स्थिति है? 
जवाब:
पूर्वी और मध्य भारत के इन राज्यों में तकनीकी विफलताएं और औद्योगिक आपूर्ति में कटौती प्रमुख समस्याएं हैं। बिहार की राजधानी पटना में ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम ठप हो गया है। लोगों को बुकिंग के समय 951 रुपये का मैसेज आता है, लेकिन वेंडर 1011 रुपये वसूल रहे हैं; नाराज लोगों ने पटना में एनएच 98 को भी जाम कर दिया। इस परेशानी को देखते हुए दरभंगा के जिलाधिकारी ने गैस डिलीवरी के लिए जरूरी छह अंकों वाले डीएसी (डिलिवरी ऑथेंटिकेशन कोड) की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है। झारखंड के सरायकेला-खरसावां में स्थित आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में कमर्शियल गैस की आपूर्ति रुकने से 1300 औद्योगिक इकाइयों (जो टाटा मोटर्स को पुर्जे सप्लाई करती हैं) का संचालन बाधित हो गया है। रांची और जमशेदपुर के होटल ने कोयले और इलेक्ट्रिक चूल्हे इस्तेमाल करने लगे हैं। छत्तीसगढ़ में एलपीजी किल्लत एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। विधानसभा में विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने गैस की कमी और बढ़ती कीमतों पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा किया, जिसके चलते 30 विधायकों को निलंबित कर दिया गया।

सवाल: महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में क्या हाल है? क्या वहां भी गैस के लिए मारामारी है?
जवाब:
मुंबई में मंझोले और छोटे आकार के 20 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो गए हैं और होटल उद्योग ने कहा है यदि आपूर्ति बाधित रही तो दो दिन भीतर 50 प्रतिशत तक रेस्टोरेंट और होटल जल्द ही बंद हो सकते हैं। बंगलूरू से भी ऐसी ही खबरें हैं। कई गैस एजेंसियों में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के लिए पूछताछ में घबराहट बढ़ गई है, हालांकि डीलरों ने बुधवार को कहा कि फिलहाल स्टॉक पर्याप्त है। दूसरी ओर एक एलपीजी डीलर ने पीटीआई को बताया, व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी है, जिसके कारण शहर के कई होटल और रेस्तरां दबाव में काम करने के लिए मजबूर हैं। होटल और रेस्तरां मालिकों ने दोहराया कि उनका स्टॉक खत्म हो जाने पर उन्हें बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इंडेन के वितरक गिरिधर एजेंसीज के एक प्रतिनिधि ने कहा कि घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं आया है। 


सवाल: क्या देश में वास्तव में एलपीजी की कमी है? संसद में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने क्या आश्वासन दिए हैं?
जवाब: केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ तौर पर घरेलू एलपीजी की किसी भी वास्तविक कमी से इनकार किया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बयान देते हुए कहा कि देश में 33 करोड़ से अधिक परिवारों की रसोई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और घरेलू गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। मंत्री ने कहा कि वर्तमान संकट आपूर्ति की कमी से नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की 'उपभोक्ता चिंता' और डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर होने वाली 'पैनिक बुकिंग' और जमाखोरी से पैदा हुआ है। इसके अलावा, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को बिना किसी रुकावट के गैस मिलती रहे।

सवाल: उत्पादन बढ़ाने और आयात को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने क्या कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं?

जवाब: वैश्विक बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सरकार ने कई मोर्चों पर काम किया है:

  1. रिफाइनरी उत्पादन में बढ़ोतरी: सरकार ने 8 मार्च को एक 'एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर' जारी किया, जिसके तहत देश की सभी रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया कि वे सी 3 और सी4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम (प्रोपेन, ब्यूटेन आदि) का इस्तेमाल पूरी तरह से एलपीजी बनाने में करें। इसके परिणामस्वरूप केवल पांच दिनों में घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25 से 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
  2. आयात विविधीकरण: होर्मुज मार्ग के बाधित होने पर भारत ने अन्य रास्तों से आयात तेज कर दिया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, संकट से पहले 45% कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते आता था, लेकिन अब 'नॉन-होर्मुज' रास्तों से होने वाला आयात 55% से बढ़कर 70% हो गया है।
  3. सप्लायर देशों की संख्या में वृद्धि: भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति के तहत तेल और गैस खरीदने वाले देशों की संख्या जो 2006-07 में 27 थी, वह अब बढ़कर 40 हो गई है।
  4. घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता और कीमतों से बचाव: वैश्विक बाजार में 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' में 41% की वृद्धि होने के बावजूद सरकार ने सब्सिडी और टैक्स का बोझ खुद उठाकर घरेलू कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास किया है, हालांकि हाल ही में घरेलू सिलेंडर में 60 रुपये और कमर्शियल में 114.50 रुपये का इजाफा हुआ है।


 

सवाल: कमर्शियल गैस की किल्लत दूर करने के लिए मंत्रालय और तेल कंपनियों का सप्लाई चेन मैनेजमेंट कैसा है? क्या वैकल्पिक ईंधन पेश किए गए हैं? 

जवाब: चूंकि घरेलू गैस को प्राथमिकता दी गई है, इसलिए व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति में भारी कटौती की गई है। इस खालीपन को भरने के लिए सरकार ने एक आपातकालीन रणनीति लागू की है:

  • केरोसिन की वापसी: स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए जिस केरोसिन को रसोई से बाहर कर दिया गया था, उसे अब वापस लाया गया है। केंद्र सरकार ने राज्यों को उनके 1 लाख किलोलीटर के नियमित कोटे के अलावा 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और तेल कंपनियों के रिटेल आउटलेट्स के जरिए बांटा जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों और होटलों को फौरी राहत मिल सके।

  • कोयला और बायोमास का उपयोग: पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को सलाह दी है कि वे एक महीने के लिए होटलों और रेस्टोरेंट्स को बायोमास, आरडीएफ पेलेट्स और कोयले का उपयोग करने की अस्थायी छूट दें, जो सामान्य तौर पर प्रदूषण मानकों के कारण प्रतिबंधित होते हैं।

  • आपूर्ति का विनियमन: तेल कंपनियों ने कालाबाजारी रोकने के लिए कमर्शियल गैस के आवंटन को सख्ती से रेगुलेट किया है और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए दो बुकिंग के बीच शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अनिवार्य अंतर तय कर दिया है।

सवाल: गैस संकट, जमाखोरी और कालाबाजारी को लेकर राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन कितने सतर्क हैं?

जवाब: अफवाहों और पैनिक से निपटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद राज्य सरकारें एक्शन मोड में हैं।

  • प्रशासनिक निगरानी और छापे: गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी को जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अनुपालन में मध्य प्रदेश के छतरपुर और महाराष्ट्र के नागपुर में अवैध रूप से स्टोर किए गए सिलेंडरों के खिलाफ छापे मारे गए। देहरादून में प्रशासन ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कालाबाजारी करने वालों को जेल भेजने की चेतावनी दी है।

  • राज्यों के बयान: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उपायुक्तों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त स्टॉक है और लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। दिल्ली सरकार ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर राजधानी में ईंधन की कमी से साफ इनकार किया है।

  • शिकायत निवारण: तेलंगाना सरकार ने गैस से जुड़ी समस्याओं के लिए 1967 टोल-फ्री नंबर जारी किया है, जबकि गाजियाबाद और चंदौली प्रशासन ने भी हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं।

सवाल: गैस न मिलने के कारण बाजार और उपभोक्ताओं के व्यवहार में अचानक क्या बड़े बदलाव आए हैं?

जवाब: गैस संकट ने बाजार में एक 'डोमिनो इफेक्ट' पैदा कर दिया है, जिससे न केवल रसोई बल्कि खाद्य और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार भी हिल गया है।

  • पैनिक बुकिंग का दबाव: युद्ध की खबर फैलते ही आम जनता ने घबराहट में अतिरिक्त सिलेंडरों की बुकिंग शुरू कर दी। इसी 'पैनिक बाइंग' ने सिस्टम पर अचानक इतना बोझ डाल दिया कि डिलीवरी की शृंखला टूट गई।

  • होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर असर: कमर्शियल गैस न मिलने से रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू छोटे कर दिए हैं। तंदूर और ऐसे व्यंजन जिनमें ज्यादा गैस लगती है (जैसे डोसा, पिज्जा), उन्हें मेन्यू से हटाया जा रहा है। जोमाटो और स्विगी जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर भी मार्च और अप्रैल के डिलीवरी वॉल्यूम में गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

  • इलेक्ट्रिक उपकरणों की मांग में उछाल: गैस के विकल्प के रूप में इंडक्शन चूल्हे, इलेक्ट्रिक हीटर और केटल की मांग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। जयपुर, आगरा और वाराणसी के बाजारों में इंडक्शन की बिक्री 15 फीसदी तक बढ़ गई है, जिसके चलते ऑनलाइन और ऑफलाइन दुकानदारों ने इनके दाम बढ़ा दिए हैं।

सवाल: एलपीजी सप्लाई चेन, भारत की आयात निर्भरता और ग्लोबल ऑयल मार्केट के दबाव का अर्थव्यवस्था पर क्या दीर्घकालिक असर पड़ेगा?

जवाब: यह संकट भारत के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और आपूर्ति शृंखला की कुछ अंतर्निहित कमजोरियों को उजागर करता है।

  • आयात निर्भरता और चोकप्वाइंट का जोखिम: भारत प्रतिवर्ष 30 मिलियन टन से अधिक एलपीजी की खपत करता है, जिसका घरेलू उत्पादन केवल 40-45% ही मांग को पूरा कर पाता है। बाकी 60% के लिए भारत होर्मुज जलडमरूमध्य पर अत्यधिक निर्भर है। जब तक भारत इस क्षेत्र से परे अपने सोर्सिंग नेटवर्क (जैसे अमेरिका या अन्य देशों से) को पूरी तरह से विविधीकृत नहीं कर लेता, तब तक भू-राजनीतिक झटके बाजार को अस्थिर करते रहेंगे।

  • भंडारण क्षमता की कमी: कच्चे तेल के लिए भारत के पास 'रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार'  हैं जो 60 दिनों तक चल सकते हैं, लेकिन एलपीजी और एलएनजी (एलएनजी) के लिए क्रायोजेनिक और उच्च दबाव वाले स्टोरेज बनाना बहुत महंगा है। इसलिए भारत के पास मात्र 25-30 दिनों का एलपीजी बफर स्टॉक होता है। इस 'जस्ट-इन-टाइम' डिलीवरी मॉडल के कारण थोड़ी सी भी शिपिंग देरी बाजार में खलबली मचा देती है।

  • आने वाले महीनों में संभावित स्थिति: फ्यूचर्स मार्केट के अनुमानों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही तक एलपीजी की कीमतें ऊंची बनी रहने की संभावना है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और एमएसएमई उद्योगों को लंबे समय तक वैकल्पिक ईंधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है, जिससे पैकेजिंग सामग्री और तैयार माल की लागत बढ़ेगी।

क्या भारत में सचमुच एलपीजी संकट है या यह सिर्फ अफरातफरी की स्थिति है?

जमीनी हालात के आकलन से हम यह कह सकते हैं कि घरेलू गैस के मोर्चे पर पैनिक और कमर्शियल गैस के मोर्चे पर वास्तविक संकट की स्थिति है। सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू उत्पादन को 25-28% बढ़ाकर और 33 करोड़ परिवारों को प्राथमिकता देकर घरों की रसोई को काफी हद तक सुरक्षित कर लिया है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एजेंसियों पर जो लंबी लाइनें दिख रही हैं, वह मुख्य रूप से अफवाह, कालाबाजारी और लोगों के बीच घबराहट के कारण अधिक है, जिससे बचने की जरूरत है।

हालांकि, कमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्र के लिए गैस की परेशानी  कोई अफवाह नहीं बल्कि एक कड़वी सच्चाई है। कमर्शियल सप्लाई को रोककर घरों की तरफ मोड़ने की नीति के कारण रेस्टोरेंट, होटल, शादियों के कैटरर्स और एमएसएमई इकाइयां बुरी तरह से गैस की कमी से जूझ रही हैं। चाय और समोसे के बढ़ते दाम, बंद होती फैक्ट्रियां और छतों पर जलते लकड़ी के चूल्हे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि भू-राजनीतिक तनाव ने भारत के व्यावसायिक ढांचे पर असर डाला है। अंततः, जब तक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और बहाल नहीं हो जाते, तब तक सरकार को वैकल्पिक ईंधनों के सहारे और सख्त प्रशासनिक निगरानी के बल पर ही इस सप्लाई चेन को सुचारू रखना होगा और तब तक आम लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देकर अपने विवेक का इस्तेमाल करना होगा।

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