RBI Bulletin: टैरिफ से मंदी-अस्थिरता का खतरा पर भारत मजबूत; प्रवासी भारतीय पैसे भेजने में खाड़ी देशों से आगे
RBI March Month Bulletin: भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक व्यापार तनाव के बावजूद मजबूत बनी हुई है। ये जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक के मार्च महीने के बुलेटिन में दी गई है। इसका मुख्य कारण कृषि क्षेत्र का अच्छा प्रदर्शन और उपभोग (खपत) में सुधार है। इसके अलावा विकसित अर्थव्यवस्थाओं में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने देश में पैसे भेजने के मामले में खाड़ी देशों को पीछे छोड़ दिया है।
विस्तार
भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती बनाए हुए है, जो कृषि क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन और उपभोग (खपत) में सुधार से साफ दिखता है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मार्च महीने के बुलेटिन में दी गई है। आरबीआई के 'स्टेट ऑफ द इकोनॉमी' लेख में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को इस समय व्यापारिक तनाव और अनिश्चितता की लहरों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ते टैरिफ (आयात शुल्क) के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है और इससे वैश्विक आर्थिक वृद्धि में मंदी की आशंका भी बनी हुई है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था बनी मजबूत
इन चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती दिखा रही है। इसका मुख्य कारण कृषि क्षेत्र का अच्छा प्रदर्शन और उपभोग (खपत) में सुधार है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
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महंगाई घटी, अर्थव्यवस्था को राहत
आरबीआई के लेख में यह भी बताया गया है कि भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने में महंगाई में आई गिरावट भी मददगार साबित हुई है। फरवरी 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर सात महीने के निचले स्तर 3.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट है। हालांकि, आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि यह लेख लेखकों के व्यक्तिगत विचार हैं और यह केंद्रीय बैंक (आरबीआई) का आधिकारिक दृष्टिकोण नहीं दर्शाता।
विकसित अर्थव्यवस्थाओं में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने पैसे भेजने में खाड़ी देशों को पीछे छोड़ा
अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने भारत में पैसा भेजने के मामले में 2023-24 में खाड़ी देशों को पीछे छोड़ दिया है। आरबीआई के बुधवार को जारी मार्च बुलेटिन के मुताबिक, प्रवासी भारतीयों ने 2010-11 में भारत में 55.6 अरब डॉलर भेजे थे। यह राशि दोगुना होकर 2023-24 में 118.7 अरब डॉलर पहुंच गई। यह देश के वस्तु व्यापार घाटे के करीब आधे हिस्से की भरपाई करता है और इस अवधि में बाहरी झटकों को झेलने में बड़ी भूमिका निभाई है। बुलेटिन के मुताबिक, विदेश में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की संख्या 1990 के 66 लाख से तिगुना होकर 2024 में 1.85 करोड़ पहुंच गई। इस दौरान वैश्विक प्रवासियों में भारतीयों की हिस्सेदारी भी 4.3 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी पहुंच गई। भारत के कुल रेमिटेंस में अमेरिका की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। यह 23.4 फीसदी से बढ़कर 2023-24 में 27.7 फीसदी हो गई। यूएई 19.2 फीसदी के साथ दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।