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Indian Economy: पूंजीगत खर्च में तेजी का दौर, बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार
Wed, 21 Dec 2022 05:45 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, मुंबई।
एजेंसी, मुंबई।
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 21 Dec 2022 05:45 AM IST
सार
आरबीआई ने मंगलवार को जारी लेख में कहा कि वैश्विक महंगाई के संभवतः उच्चतम स्तर पर पहुंच जाने के संकेतों के बावजूद जोखिमों का संतुलन बिगड़ते वैश्विक परिदृश्य की ओर झुकता दिख रहा है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
भारतीय अर्थव्यवस्था को घरेलू वजहों से समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही उत्पादन लागत पर से दबाव कम होने, कंपनियों की बिक्री में तेजी जारी रहने और स्थिर परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ने की वजह से देश में पूंजीगत खर्च में वृद्धि का दौर शुरू हो रहा है। इससे आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार और तेज करने में मदद मिलेगी।
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आरबीआई ने मंगलवार को जारी लेख में कहा कि वैश्विक महंगाई के संभवतः उच्चतम स्तर पर पहुंच जाने के संकेतों के बावजूद जोखिमों का संतुलन बिगड़ते वैश्विक परिदृश्य की ओर झुकता दिख रहा है। उभरते बाजार वाली अर्थव्यवस्थाएं अधिक कमजोर दिखने लगी हैं।
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लेख में कहा गया है कि निकट अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था को घरेलू कारकों से समर्थन मिलेगा। उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों के रुझान में यह दिख रहा है। नवंबर में शेयर बाजारों के नई ऊंचाई पर पहुंचने में मजबूत पोर्टफोलियो निवेश का भी योगदान रहा है। लेख केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल देवब्रत पात्रा की अगुवाई में लिखा गया है।
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जी20 देशों में सबसे अधिक रहेगी भारत की विकास दर
लेख के मुताबिक, भारत 2023 में सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाली जी20 अर्थव्यवस्थाओं में एक होगा। जी20 देशों की कुल जीडीपी में भारत का योगदान 3.6 फीसदी है। वास्तविक क्रय-शक्ति के संबंध में यह अनुपात 8.2 फीसदी है। भारत ने दिसंबर की शुरुआत में ही दुनिया के 20 विकसित-विकासशील देशों के समूह जी20 की अध्यक्षता संभाली है।
सरकार ने आठ साल में विनिवेश से जुटाए चार लाख करोड़ से ज्यादा
सरकार ने 2014 के बाद पिछले आठ साल में विनिवेश और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की रणनीतिक बिक्री से 4.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटाए हैं। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि इसमें से सबसे ज्यादा 1.07 लाख करोड़ 59 मामलों में ऑफर फॉर सेल से जुटाए गए।
इसके अलावा, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के जरिये 10 किस्तों में हिस्सेदारी बिक्री से कुल मिलाकर 98,949 करोड़ जुटाए गए हैं। पिछले आठ साल में एअर इंडिया समेत 10 कंपनियों में रणनीतिक बिक्री से 69,412 करोड़ रुपये मिले। वहीं 45 मामलों में शेयर पुनर्खरीद से 45,104 करोड़ रुपये मिले।
सिर्फ एलआईसी आईपीओ से मिले 20,516 करोड़
वित्त मंत्रालय ने बताया कि पिछले आठ साल में जुटाई गई कुल राशि में से सरकार को अकेले बीमा कंपनी एलआईसी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से 20,516 करोड़ रुपये मिले। वर्ष 2014-15 से 17 सीपीएसई सूचीबद्ध हुए जिनसे 50,386 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।