पांच साल में सबसे कम हुई जीडीपी, 45 साल के उच्चतम स्तर पर बेरोजगारी
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मोदी सरकार द्वारा दोबारा सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही देश की नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आर्थिक मोर्चे पर अच्छी खबर सुनने को नहीं मिली है। पांच साल में पहली बार विकास दर में कमी देखने को मिली है। यह पिछले वित्त वर्ष की तीन तिमाही के मुकाबले भी काफी कम है। वहीं बेरोजगारी 45 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
चौथी तिमाही में यह रही विकास दर
जनवरी-मार्च के बीच देश की विकास दर 5.8 फीसदी रही। हालांकि इससे पहले की तीन तिमाही में विकास दर का आंकड़ा 8.2 फीसदी, 7.1 फीसदी और 6.6 फीसदी रहा था। अगर चार तिमाही का औसत निकाला जाए तो फिर पूरे वित्त वर्ष में विकास दर 6.8 फीसदी रही है।
चीन से पिछड़े हम
चौथी तिमाही में विश्व की सबसे तेज गति की अर्थव्यवस्था के मामले में पड़ोसी देश चीन भी आगे हो गया है। वही बेरोजगारी का आंकड़ा भी काफी बढ़ गया है। देश में बेरोजगारी 6.1 फीसदी आंकी गई है।
इन वजह से लगा ब्रेक
चौथी तिमाही में जीडीपी में कमी होने के पीछे कई सारे कारण हैं। घरेलू बाजार में खपत में कमी, वैश्विक मांग में भी कमी और अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध की आशंका के चलते पहली बार जीडीपी सात फीसदी से कम आई है।
उत्पादन भी हुआ कम
देश में कई सेक्टर में उत्पादन में भी कमी देखने को मिली है। हालांकि विश्व में छठे सबसे बड़े ऑटो निर्माता और स्मार्टफोन का उत्पादन बढ़ने के बावजूद जीडीपी में कमी होना बड़ी बात है। हालांकि फिक्की ने विकास दर के लिए इस साल 7.1 फीसदी और अगले साल 7.2 फीसदी का अनुमान लगाया है।
45 साल के उच्चतम स्तर पर बेरोजगारी
केंद्र सरकार ने पहली बार बेरोजगारी का आंकड़ा जारी कर दिया है। वित्त वर्ष 2017-18 में बेरोजगारी 6.1 फीसदी रही थी, जो कि पिछले 45 सालों (1972-73 के बाद) में सबसे ज्यादा है। इससे पहले एक अखबार ने भी इसी डाटा को लीक किया था। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 5.3 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 7.8 फीसदी रही थी। इसी तरह, देशभर में 6.2 फीसदी पुरुषों के पास कोई रोजगार नहीं, जबकि 5.7 फीसदी महिलाएं बेरोजगार हैं।
लेखा महानियंत्रक (सीजीए) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च, 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के मुकाबले 6.45 लाख करोड़ रुपये रहा। यह जीडीपी के अनुपात में 3.39 फीसदी है। सरकार ने बजट में अपना संशोधित लक्ष्य 6.34 लाख करोड़ रुपये रखा था।
सीजीए का कहना है कि वास्तविक रूप में राजकोषीय घाटा बढ़ा है, लेकिन जीडीपी के अनुपात में यह नीचे आया है। इसी दौरान केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने आंकड़े जारी कर बताया कि 2018-19 में देश की जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 6.8 फीसदी हो गई है, जो इससे पहले के वित्त वर्ष में 7.2 फीसदी थी। सीएसओ का कहना है कि सुस्त विकास दर पर सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र के खराब प्रदर्शन और उत्पादन क्षेत्र में नरमी का पड़ा है।