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Business Updates: अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी गुजरात के कारोबारी को हिरासत में रखा, सुप्रीम कोर्ट सख्त

Wed, 10 Jan 2024 07:36 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 10 Jan 2024 07:36 PM IST
सार

Business Updates: अदालत ने गुजरात के कारोबारी की पुलिस हिरासत को ''घोर अवमानना'' करार देते हुए बुधवार को सूरत के पुलिस अधिकारियों और एक न्यायिक मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया और उन्हें 29 जनवरी को अदालत समक्ष पेश होने का आदेश दिया।

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"Grossest of contempt", says SC on illegal custody of businessman despite bail order Business News and Updates
बिजनेस न्यूज एंड अपडेट्स - फोटो : amarujala.com

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने गुजरात के एक कारोबारी को अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी उसे पुलिस हिरासत में भेजने के मामले में कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने पुलिस हिरासत को ''घोर अवमानना'' करार देते हुए बुधवार को सूरत के पुलिस अधिकारियों और एक न्यायिक मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया और उन्हें 29 जनवरी को अदालत समक्ष पेश होने का आदेश दिया।

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न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने धोखाधड़ी के एक मामले में सूरत निवासी तुषारभाई रजनीकांतभाई शाह को अग्रिम जमानत दे दी थी और जब उसे सूचित किया गया कि कारोबारी को नीतिगत हिरासत में भेजा गया है तो अदालन ने नाराजगी जाहिर की।
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अदालत ने कहा, 'ऐसा लगता है कि गुजरात अलग-अलग कानूनों का पालन करता है। यह दुनिया की हीरे की राजधानी में हो रहा है। यह हमारे आदेशों का पूरी तरह उल्लंघन है। मजिस्ट्रेट और जांच अधिकारी को आकर यह बताने दीजिए कि रिमांड के आदेश कैसे पारित किए गए। हम डीजीपी को अवमाननाकर्ताओं को साबरमती जेल या कहीं और भेजने का निर्देश देंगे। उन्हें 29 जनवरी को आने दीजिए और एक हलफनामे में हमें (रिमांड के कारणों) के बारे में बताने दीजिए। यह घोर अवमानना है।'  
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191 करोड़ की गड़बड़ी मामले में सीबीआई ने दर्ज किया केस
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने चेन्नई की सीमेंस गेम्सा रिन्यूएबल पावर और एसजेवीएन के तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम को कथित तौर पर 191 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए मामला दर्ज किया है। उन पर अहमदनगर में पवन ऊर्जा संयंत्र की स्थापना में अनियमितता का आरोप है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

एजेंसी ने बताया कि एसजेवीएन लिमिटेड (जिसे पहले सतलुज जल विद्युत निगम के नाम से जाना जाता था) के तीन सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों आरके अग्रवाल (कार्यकारी निदेशक), संजय उप्पल (मुख्य महाप्रबंधक) और एके जिंदल (उप महाप्रबंधक) के अलावा बिजली और ऊर्जा सलाहकार के प्रतिनिधियों विनीत शर्मा और सीएम जैन और चेन्नई स्थित गेमा विंड टर्बाइन प्राइवेट लिमिटेड (अब सीमेंस गेम्सा रिन्यूएबल पावर प्राइवेट लिमिटेड) के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीमेंस गेम्सा रिन्यूएबल पावर की ओर से इस मामले में अब तक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 

प्राथमिकी दर्ज करने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली, गाजियाबाद, गुरुग्राम, पंजाब के पटियाला जिले के समाना और चेन्नई में सात स्थानों पर आरोपियों के परिसरों की तलाशी ली, जिसमें कुछ दस्तावेज बरामद किए गए।

पेड़ों की कटाई मामले में रक्षा मंत्रालय व दो अन्य को नोटिस
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली के सेंट्रल रिज इलाके में सेना मुख्यालय द्वारा पेड़ों की कथित कटाई के संबंध में केंद्रीय रक्षा मंत्रालय और दो अन्य को नोटिस जारी किया है। ग्रीन पैनल उस मामले की सुनवाई कर रहा था जिसमें उसने सेना मुख्यालय की ओर से 8.78 हेक्टेयर क्षेत्र को साफ करने के दौरान पेड़ों की कटाई के बारे में एक समाचार पत्र की खबर का स्वत: संज्ञान लिया था।

अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसके अनुसार सेना ने दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम और भारतीय वन अधिनियम सहित पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन किया है।


तमिलनाडु में परिवहन यूनियनों को अस्थायी रूप से हड़ताल वापस लेने का आदेश

तमिलनाडु उच्च न्यायालय ने परिवहन यूनियनों को अस्थायी रूप से अपनी हड़ताल वापस लेने का आदेश दिया है। राज्य के परिवहन मंत्री एसएस शिवशंकर ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, बैठक के बाद हम निर्णय लेंगे। पिछले दो दिनों से, हड़ताल के कारण कोई समस्या नहीं हुई।



कोर्ट ने नरेश गोयल को बीमार पत्नी से मिलने की अनुमति दी
मुंबई की विशेष अदालत ने केनरा बैंक से 538 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोपी जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल को मानवीय आधार पर 13 जनवरी को अपनी बीमार पत्नी से मिलने की अनुमति दे दी है। उन्हें कई बीमारियों के लिए अपने निजी डॉक्टरों से परामर्श करने की भी अनुमति दी गई है। आदेश तब आया, जब कुछ दिन पहले गोयल ने अदालत से कहा था कि उन्होंने जीवन की हर उम्मीद खो दी है और ऐसी स्थिति में जीने से बेहतर होगा कि वह जेल में ही मर जाएं। गोयल ने कहा था कि उन्हें अपनी पत्नी की बहुत याद आ रही है जो कैंसर के अंतिम चरण में हैं।

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