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CRISIL Report: इस्राइल-ईरान युद्ध का भारतीय कंपनियों पर खास असर नहीं, क्रूड पर रखनी होगी नजर
Sat, 21 Jun 2025 04:50 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
कालीचरण
कालीचरण
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sat, 21 Jun 2025 04:50 AM IST
सार
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक,भारत के कुल व्यापार (आयात-निर्यात) में इस्राइल और ईरान की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम है। इसलिए, मौजूदा संघर्ष का भारत के व्यापार पर बड़ा असर नहीं दिख रहा है। लेकिन, तनाव में किसी भी तरह की वृद्धि ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने के साथ कच्चे तेल की कीमतें बढ़ा सकती हैं।
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सांकेतिक
- फोटो : Freepik
विस्तार
इस्राइल-ईरान में जारी तनाव से भारतीय कंपनियों के वैश्विक व्यापार पर खास असर नहीं पड़ा है। हालांकि, स्थिति और बिगड़ने पर बासमती चावल, उर्वरक, हीरे एवं बिजली उपकरणों जैसे क्षेत्रों में व्यापार प्रभावित हो सकता है। क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक,भारत के कुल व्यापार (आयात-निर्यात) में इस्राइल और ईरान की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम है। इसलिए, मौजूदा संघर्ष का भारत के व्यापार पर बड़ा असर नहीं दिख रहा है। लेकिन, तनाव में किसी भी तरह की वृद्धि ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने के साथ कच्चे तेल की कीमतें बढ़ा सकती हैं। अगर क्रूड की कीमतें लंबी अवधि तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय कंपनियों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है।
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ब्रेंट क्रूड पिछले एक सप्ताह में महंगा होकर 73-76 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है, जो अप्रैल-मई, 2025 की औसत कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल से अधिक है। भारत ईरान के बासमती चावल और इस्राइल को उर्वरक, हीरे एवं बिजली उपकरणों का निर्यात करता है।
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भारत का दोनों देशों से व्यापार और असर
बासमती चावल : 2024-25 में भारत के कुल बासमती चावल निर्यात में इस्राइल और ईरान का योगदान 14 फीसदी था। चूंकि, बासमती चावल प्रमुख अनाज है, इसलिए दोनों देशों में तनाव का इसके मांग पर सीमित असर रहने का अनुमान है। हालांकि, लंबे समय तक संकट रहने से इन देशों से भुगतान में देरी हो सकती है, जिससे कार्यशील पूंजी प्रभावित होगी।
हीरा : घरेलू हीरा पॉलिश करने वालों के लिए इस्राइल प्रमुख व्यापारिक केंद्र हैं, जिसे 2024-25 में 4 फीसदी हीरा निर्यात किया गया। पॉलिश करने वालों के पास बेल्जियम और यूएई जैसे वैकल्पिक केंद्र भी हैं, जिनके अंतिम खरीदार अमेरिका-यूरोप हैं, जो इस क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन में मदद करेंगे।
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उर्वरक : इस्राइल म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) का प्रमुख वैश्विक उत्पादक है, जो 2024-25 में भारत के बड़े निर्यातकों में से एक था। हालांकि, एमओपी की हिस्सेदारी घरेलू उर्वरक खपत में 10 फीसदी से भी कम है। अन्य देशों से एमओपी प्राप्त करने की भारत की क्षमता भी आपूर्ति जोखिम को कम करती है और इस क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को सीमित करेगी।
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