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लॉकडाउन का असर : अप्रैल में 16 में से नौ आर्थिक संकेतक लाल निशान पर रहे
Thu, 27 May 2021 04:00 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 27 May 2021 04:00 AM IST
सार
- पांच साल के औसत से भी नीचे चली गई इन क्षेत्रों की विकास दर
- पीएम मोदी ने भी जताई चिंता, बढ़ती महंगाई भी चिंता का सबब
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सांकेतिक तस्वीर...
- फोटो : pixabay
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विस्तार
कोविड-19 की दूसरी लहर ने हजारों जानें लेने के साथ अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बुधवार को महामारी के गंभीर आर्थिक असर पर चिंता जताई। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है अप्रैल में ही अर्थव्यवस्था के 16 प्रमुख संकेतकों में से नौ लाल निशान से नीचे रहे। इन क्षेत्रों की विकास दर पांच साल के औसत से भी नीचे चली गई।
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एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च के अर्थशास्त्रियों ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 16 में से महज चार संकेत ही हरे निशान पर रहे और इनकी विकास दर पांच साल के औसत से कुछ ज्यादा रही। जबकि तीन संकेतों पर कोई असर नहीं पड़ा।
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ये 16 संकेत अर्थव्यवस्था के चार प्रमुख क्षेत्रों से लिए गए, जिनमें उपभोक्ता, उत्पादक, बाहरी व्यापार और जीवन सुगमता शामिल है। लॉकडाउन से पहले मार्च में सिर्फ सात संकेतक ही लाल निशान पर थे।
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रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी लहर में आर्थिक असर 2020 के मुकाबले कम तो रहा, लेकिन भविष्य की अनिश्चितता उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। ज्यादातर रेटिंग एजेंसियों ने भारत के विकास दर अनुमान घटा दिए हैं और सॉवरेन रेटिंग में भी गिरावट का जोखिम पैदा हो गया है।
उपभोक्ता खपत-उत्पाद, वाहन बिक्री व यात्रा में कमी
महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित उपभोक्ता वर्ग हुआ है, जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी का संकेत माने जाने वाले ट्रैक्टर की बिक्री 6 महीने के निचले स्तर पर चली गई है। यात्री वाहनों की डिलीवरी में 4 फीसदी गिरावट रही, जबकि सभी वाहनों का पंजीकरण 17 फीसदी कम रहा। हवाई यात्राएं भी छह महीने में सबसे कम रहीं। उत्पादन के क्षेत्र में थोड़ा सुधार रहा और अप्रैल का विनिर्माण पीएमआई 55.4 पहुंच गया। निर्यात में भी तेजी आई, जबकि रेल ढुलाई सालाना आधार पर 5 फीसदी बढ़ी।
हालांकि, इन सुधारों के बावजूद उत्पादन क्षेत्र महामारी के दबाव में रहा और अप्रैल में आठ बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में इस साल पहली गिरावट दिखी। इस बीच, महंगाई चिंता का सबब बनती जा रही है, जो अप्रैल में 5.7 फीसदी के साथ रिजर्व बैंक के हाथ से निकलती दिखी। खासकर बुनियादी क्षेत्र की महंगाई दर 2021 में पूरे साल बढ़ने का अनुमान है, जो पूरी खुदरा महंगाई पर गंभीर असर डालेगी।
आधी रह गई सामानों की खुदरा बिक्री
दिल्ली, मुंबई सहित देश के लगभग सभी बड़े शहरों में लॉकडाउन की वजह से अप्रैल में खुदरा बिक्री में 49 फीसदी गिरावट आई। खुदरा क्षेत्र के संगठन राई ने बुधवार को बताया कि कपड़े, जूते, व्यक्तिगत सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री में बड़ी गिरावट दिखी है। खेल के सामानों की बिक्री 66 फीसदी, तो उपभोक्ता टिकाऊ एवं इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री में 31 फीसदी कमी आई है।
देश के पश्चिमी क्षेत्र की खुदरा बिक्री में 72 फीसदी, उत्तर में 45 फीसदी, दक्षिण में 40 फीसदी और पूर्वी क्षेत्र में 20 फीसदी गिरावट रही। ऐसे विक्रे ता जिनका सालाना टर्नओवर 20 करोड़ से ज्यादा है, उन्हें 87 फीसदी गिरावट का सामना करना पड़ा। राई का कहना है कि बुरा समय अभी गया नहीं है और मई के आंकड़े इससे ज्यादा डरावने हो सकते हैं।
मकानों की बिक्री 60 फीसदी गिरी
अप्रैल में रियल एस्टेट क्षेत्र पर भी दूसरी लहर का व्यापक असर दिखा और आवासीय मकानों की बिक्र में 60 फीसदी गिरावट आई। एडलवीज रिसर्च ने बुधवार को बताया कि नए प्रोजेक्ट की लॉन्चिंग भी 55 फीसदी कम रही।
हालांकि, पिछले साल के अप्रैल महीने से तुलना करें तो बिक्री 92 फीसदी और लॉन्चिंग 110 फीसदी बढ़ी है। दिल्ली-एनसीआर में मकानों की बिक्री सबसे ज्यादा प्रभावित हुई और यहां तैयार मकानों को बिकने के लिए करीब साढ़े पांच साल का इंतजार करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, मजदूरों व फंड की कमी से प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा होने पर भी संकट है और 2021 में 28 फीसदी मकानों का निर्माण अधूरा रह सकता है।
सरकारी नौकरियां तीन साल में सबसे कम
2020-21 में सरकारी नौकरियों पर भी महामारी की मार पड़ी है। इस दौरान केंद्र सरकार की नौकरियों में 27 फीसदी और राज्यों की नौकरियों में 21 फीसदी गिरावट आई। केंद्र ने बीते वित्त वर्ष में 87,423 लोगों को नौकरियां दीं, जो 2019-20 के 1.19 लाख से 31,577 कम है।
इसी दौरान राज्य सरकारों ने 3,89,052 लोगों को हायर किया, जो इससे पहले के वित्त वर्ष के मुकाबले 1.07 लाख कम है। ये आंकड़े राष्ट्रीय पेंशन योजना से जुटाए गए हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनमी ने 10 मई को जारी रिपोर्ट में बताया था कि अप्रैल 2021 में कुल 73 लाख लोगों ने अपनी नौकरियां गंवाई हैं।
केंद्र को लेना पड़ सकता है 1.58 लाख करोड़ का अतिरिक्त कर्ज
लॉकडाउन से राजस्व वसूली में कमी के अनुमान को देखते हुए केंद्र सरकार को राज्यों की क्षतिपूर्ति के लिए 1.58 लाख करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ सकता है।
मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को जीएसटी परिषद की बैठक में इस पर चर्चा हो सकती है। कर्ज की यह राशि बजट में रखे गए 12 लाख करोड़ से अलग रहेगी। हालांकि, चालू वित्त वर्ष में राज्यों को क्षतिपूर्ति के तौर पर 2.7 लाख करोड़ देने का अनुमान है, जिसमें शेष राशि जीएसटी उपकर के रूप में आ जाएगी।