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Citigroup: 'कॉपी-पेस्ट का चक्कर बैंक' को पड़ा भारी, कर्मी ने अमाउंट डालकर एंटर बटन दबाया तो उड़े सबके होश

Tue, 04 Mar 2025 01:38 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 04 Mar 2025 01:38 PM IST
सार

Citigroup: सिटीग्रुप बैंक में कॉपी-पेस्ट की गलती से एक ग्राहक के खाते में लगभग 6 अरब डॉलर की रकम भेज दी गई। लेनदेन को हैंडल करने वाले कर्मचारी ने गलती से अकाउंट नंबर को अमाउंट फील्ड में पेस्ट कर दिया, जिससे ट्रांसफर की रकम एक हजार गुना से भी अधिक हो गई। आइए इस दिलचस्प मामले के बारे में विस्तार से जानें।

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Citigroup's copy-paste error nearly led to $6 billion transfer
सिटीग्रुप बैंक - फोटो : freepik

विस्तार

सिटीग्रुप के बैंक में कॉपी-पेस्ट की गलती से एक ग्राहक के खाते में लगभग छह अरब डॉलर की रकम भेज दी गई। लेनदेन को हैंडल करने वाले कर्मचारी ने अकाउंट नंबर को अमाउंट फील्ड में पेस्ट कर दिया, जिससे एक गलत खाते में एक हजार गुना से भी अधिक राशि ट्रांसफर हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह गलती बैंक के आंतरिक खातों के बीच धन हस्तांतरण के प्रयास के दौरान हुई। यह गलती बैंक की किस शाखा में हुई इसकी जानकारी फिलहाल साझा नहीं की गई है।

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अप्रैल में हुई गलती का अगले कारोबारी दिन चला पता

अप्रैल महीने में हुई इस गलती का पता अगले कारोबारी दिन ही चल गया, जिससे एक बड़ी वित्तीय दुर्घटना टल गई। यह घटना जिस महीने में हुई उसी महीने एक अन्य मामले में बैंक ने गलती से एक ग्राहक को 81 ट्रिलियन डॉलर क्रेडिट कर दिए थे। इस गलती को 90 मिनट के भीतर पकड़ लिया गया। 

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बैंक ने नियामकों को दी मामले की जानकारी

मामले से परिचित लोगों के अनुसार, बैंक ने नियामकों को इस मुद्दे के बारे में सूचित कर दिया है और असामान्य लेनदेन राशि का पता लगाने के लिए कंपनी की ओर से एक टूल की भी शुरुआत की गई है। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सिटीग्रुप ने कहा कि उसने इस समस्या का तुरंत पता लगाया और उसका समाधान किया, जिससे बैंक या उसके ग्राहकों पर कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ा। इसके अलावा, बैंक ने मैन्युअल काम को कम करके और ऑटोमेशन को बढ़ाकर अपने सुरक्षा उपायों को भी मजबूत किया है।

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उपरोक्त घटना सिटीग्रुप के जोखिम प्रबंधन और आंतरिक नियंत्रण संबंधी लगातार समस्याओं को उजागर करती है। इससे पहले भी, बैंक विनियामक जांच के दायरे में आ चुका है, जिसमें 2020 में रेवलॉन के लेनदारों को 900 करोड़ डॉलर का आकस्मिक हस्तांतरण कर दिया गया था। उस दौरान बैंक को कानूनी कार्रवाई कर इसे वसूलने में दो साल से अधिक का समय लगा था।

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