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अप्रैल से बड़े बदलाव: छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर घटा सकती है सरकार; बेरोजगारी के मासिक आंकड़े भी जारी होंगे

Sat, 08 Feb 2025 06:19 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 08 Feb 2025 06:19 AM IST
सार

छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में पिछले एक साल से कोई बदलाव नहीं हुआ है। सार्वजनिक भविष्य निधि, सुकन्या समृद्धि योजना, मासिक आय खाता योजना, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, किसान विकास पत्र, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र, डाकघर बचत योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना आदि छोटी बचत योजनाओं में शामिल हैं।

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changes from April Govt may reduce interest rate on small savings schemes Monthly unemployment data possible
आरबीआई - फोटो : PTI

विस्तार

आरबीआई की ओर से रेपो दर में कटौती के बाद वित्त मंत्रालय अप्रैल से शुरू होने अगले वित्त वर्ष 2025-26 में छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज दरों को घटा सकता है। छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में पिछले एक साल से कोई बदलाव नहीं हुआ है। सार्वजनिक भविष्य निधि, सुकन्या समृद्धि योजना, मासिक आय खाता योजना, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, किसान विकास पत्र, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र, डाकघर बचत योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना आदि छोटी बचत योजनाओं में शामिल हैं।

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सूत्रों का कहना है कि छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा अगले वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में होने की संभावना है। 31 दिसंबर, 2024 को घोषित पिछली समीक्षा में वित्त मंत्रालय ने जनवरी-मार्च, 2025 तिमाही के लिए इन योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज में कोई बदलाव नहीं किया था। वर्तमान में पब्लिक प्रोविडेंट फंड में निवेश पर 8.1 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है। सुकन्या समृदि्ध योजना के निवेशकों को 8.2 फीसदी रिटर्न मिलता है। किसान विकास पत्र पर 7.5 फीसदी और डाकघर बचत योजना पर चार फीसदी ब्याज मिलता है।
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अप्रैल से बेरोजगारी के मासिक आंकड़े जारी करेगी सरकार
सरकार अप्रैल से बेरोजगारी के मासिक आंकड़े जारी करेगी। अब तक सिर्फ  शहरी क्षेत्रों के लिए तिमाही बेरोजगारी आंकड़े और शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संयुक्त वार्षिक आंकड़े जारी होते थे। हालांकि, एक निजी कंपनी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी हर माह बेरोजगारी के आंकड़े जारी करती है।
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सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने कहा, हम जनवरी से आंकड़े जुटा रहे हैं। उन्हें अप्रैल से जारी करेंगे। इस कदम से स्थानीय स्तर पर भी नीति बनाने में मदद मिलेगी। 

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