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कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते कच्चा तेल वायदा कीमतों में आई गिरावट
Mon, 04 May 2020 04:58 PM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Mon, 04 May 2020 04:58 PM IST
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कमजोर वैश्विक रुख के अनुरूप कारोबारियों ने अपने सौदों के आकार को कम किया जिससे सोमवार को वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमत 6.39 फीसदी की गिरावट के साथ 1,421 रुपये प्रति बैरल रह गई। तीन दिन के बाद आज कच्चे तेल की कीमत गिरी है।
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मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में मई डिलीवरी वाले कच्चे तेल की कीमत 97 रुपये यानी 6.39 फीसदी की गिरावट के साथ 1,421 रुपये प्रति बैरल रह गई। इसमें 7,770 लॉट के लिए कारोबार हुआ।
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कच्चा तेल के जून माह में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 78 रुपये यानी 4.48 फीसदी की गिरावट के साथ 1,664 रुपये प्रति बैरल रह गई। इसमें 1,323 लॉट के लिए कारोबार हुआ।
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इस संदर्भ में बाजार विश्लेषकों ने कहा कि कच्चा तेल वायदा कीमतों में गिरावट आने का मुख्य कारण कमजोर वैश्विक मांग के बीच कारोबारियों द्वारा अपने सौदों की कटान करना था। वैश्विक स्तर पर, न्यूयार्क में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल के जून अनुबंध का भाव 7.03 फीसदी की गिरावट के साथ 18.39 डालर प्रति बैरल रह गया और ब्रेंट क्रूड के जुलाई अनुबंध की कीमत 2.50 फीसदी घटकर 25.78 डॉलर प्रति बैरल रह गई।
ब्लूमबर्ग के सर्वे के अनुसार, अप्रैल में ओपेक ने पिछले 30 सालों में सबसे ज्यादा कच्चे तेल का उत्पादन किया। कीमतों में लगातार गिरावट के बावजूद देशों ने उत्पादन में कटौती नहीं की थी।
दरअसल कुछ हफ्ते पहले ही रूस और सऊदी अरब के बीच तेल की कीमतों पर प्राइस वॉर चल रहा था जिसकी वजह से भी तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी। ओपेक प्लस देशों के समूह और मेक्सिको के बीच हुए समझौते के बाद ये तय हुआ था कि मई तक तेल के उत्पादन में दस फीसदी की कटौती की जाएगी। तेल उत्पान में कटौती के लिए ये समझौता अपने आप में एतिहासिक था। मार्च के आखिर से कई अमेरीकी कंपनियों ने ये घोषणा की थी कि वे अप्रैल में तेल प्रसंस्करण की मात्रा में कटौती करेंगे। कच्चे तेल के उत्पादन पर इस घोषणा का भी नकारात्मक असर हुआ था।
हाल ही में तेल का वायदा शून्य से भी नीचे पहुंच गया था। मई डिलीवरी के लिए यूएस बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमिडिएट (WTI) की कीमत अप्रैल में पहली बार शून्य से नीचे गिर गई थी क्योंकि कोई व्यापारी कच्चा तेल खरीदकर उसे अपने पास रखने की स्थिति में नहीं था।