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आर्थिक समीक्षा ने दिखाया आईना, जेटली को भी दी नसीहत

Sat, 27 Feb 2016 09:26 AM IST
Updated Sat, 27 Feb 2016 09:26 AM IST
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economic survey present by fin min arun jaitley in parliament's budget session,

आम बजट से पहले आए देश के आर्थिक सर्वेक्षण ने वित्त मंत्री अरूण जेटली को राहत के साथ-साथ नसीहत भी दी है। वित्त मंत्री के लिए राहत की बात है कि विश्व आर्थिक मंदी की चुनौतियों और देश में बीते दो वर्षों से पड़ रहे सूखे की मार के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अनुकूल बनी हुई है।

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बावजूद उसके सर्वेक्षण ने सरकार से ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में विशेष ध्यान देने का इशारा किया है। सरकार की जमीनी नीतियों का आईना दिखाते हुए सर्वेक्षण में माना गया है कि कृषि और ग्रामीण क्षेत्र अब भी बेहद उपेक्षित हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2015-16 में किसानों के लिए स्थाई आजीविका और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव की जरूरत पर बल दिया है।
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खेती को लाभ का सौदा बनाने के लिए उत्पादन बढ़ाने और व्यवस्था की कमी को दुरूस्त बनाने की वकालत की गई है। देश की खाद्य सुरक्षा और मूल्य स्थिरता के लिए कृषि में सुधार बेहद जरूरी है। हालांकि यह भी सत्य है कि भारतीय कृषि ने अभाव से लेकर आत्मनिर्भरता का सफर तय किया है।
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किसान की आय अब भी 20 हजार वार्षिक

economic survey present by fin min arun jaitley in parliament's budget session,

देश में असमानता बढ़ी है। देश में मध्यम श्रेणी के किसान की आय अब भी करीब 20 हजार रूपये वार्षिक है। उन्हें अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए अपनी खेती के पैटर्न में बदलाव जरूरी बनता जा रहा है। अनाज उत्पादन के बदले बागवानी और दुग्ध उत्पादन में ज्यादा मुनाफा देखने को मिला है। तो किसानों को गेंहू, धान और गन्ना के बजाय दलहन उत्पादन पर भी जोर देना होगा।

देश में खनपान व्यवस्था में सुधार के वजह से भोजन में प्रोटिन लेने की परंपरा बढ़ी है। भारत दलहन उत्पादन के मामले में अव्वल तो है। मगर अपनी पूर्ति के लिए उसे आयात पर निर्भर रहना पड़ा रहा है। यदि देश के किसान दलहन बुआई की ओर मुखरित हों तो उनकी आय बढ़ सकती है।

ग्रामीण क्षेत्र में आय के साधन बढ़ाने और देश में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में सुधार को अहम बताया गया है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत की खेती अपनी ही पुरानी गलतियों की शिकार है। हरित क्रांति के वजह से कुछ समय के लिए फसल का उत्पादन तो बढ़ा लेकिन उर्वरकों के अति इस्तेमाल से भूमि की उर्वरकता घटी है।

जीएम फसलों को अपनाने पर दिया जोर

economic survey present by fin min arun jaitley in parliament's budget session,

भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के बाबत राष्ट्रीय बाजार और उर्वरक सब्सिडी को डीबीटी के तहत करने पर जोर दिया गया है। अभी उर्वरक सब्सिडी का 65 प्रतिशत रूपया ही किसानों तक पहुंचता है।

संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि कृषि में कायाकल्प के लिए कृषि में उत्पादकता बढ़ाने, सुक्ष्म सिंचाई, प्रौद्योगिकियों में निवेश और सभी उपायों के कुशल प्रयोग की जरूरत है।

खेती को खुशहाल बनाने के लिए उन्होंने सिंचाई व्यवस्था दुरूस्त करने, जल उत्पादकता बढ़ाने (प्रति बुंद से ज्यादा उत्पादन), उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, उर्वरकों को फसल के सापेक्ष बनाने, खेती में मशीनीकरण का उपयोग बढ़ाने, भूमि में सुक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति बहाल करने, जैविक उर्वरक पर जोर, कीटनाशक, बीजों के विकास के लिए अनुसंधान और प्रौद्योगिकी, बीज उपलब्धता और जीएम फसलों को अपनाने पर जोर दिया है।

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