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भारत में खिलने वाला वो अनोखा फूल, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग

Tue, 21 Jan 2020 10:35 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Tue, 21 Jan 2020 10:35 AM IST
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Worlds rarest flower Neelakurinji Blooming only once in 12 years
नीलकुरिंजी फूल - फोटो : Social media

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत के हर कोने को कुदरत ने नेमतों से नवाजा है। शहरों, गांवों, पहाड़ों और गुफाओं में कुदरत के ऐसे राज छिपे हैं, जिनसे पर्दा उठता है तो इंसान हैरत में पड़ जाता है। आज आपको एक ऐसे फूल की कहानी बताते हैं जो बारह साल में एक बार खिलता है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग खिंचे चले आते हैं। 

Worlds rarest flower Neelakurinji Blooming only once in 12 years
नीलकुरिंजी फूल - फोटो : Social media

ईश्वर के देश के नाम से मशहूर केरल, हरे-भरे पहाड़ों, समुद्री किनारों और कुदरती नजारों के लिए मशहूर है। इस राज्य की सबसे खूबसूरत जगह है, मुन्नार जो समुद्र की सतह से 1600 मीटर ऊपर है। ये जगह कॉफी और मसालों की खेती के लिए मशहूर है। यहां की हरियाली और सुकून सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यही वो जगह है जहां हिंदुस्तान का सबसे बड़ा राज छिपा है जिसका नाम है नीलकुरिंजी। नीलकुरिंजी दुनिया के दुर्लभ फूलों में शुमार होता है। ये 12 साल में एक बार खिलता है। 

Worlds rarest flower Neelakurinji Blooming only once in 12 years
नीलकुरिंजी फूल - फोटो : social media

साल 2018 में यह फूल खिला था। केरल के लोग इसे कुरिंजी कहते हैं। ये स्ट्रोबिलेंथस की एक किस्म है। इसकी करीब 350 फूलों वाली प्रजातियां भारत में ही हैं। स्ट्रोबिलेंथस की अलग-अलग प्रजातियों के फूलों के खिलने का समय भी मुख्तलिफ है। कुछ चार साल में खिलते हैं, तो कुछ आठ, दस, बारह या सोलह साल में खिलते हैं। लेकिन ये फूल कब खिलकर खत्म हो जाते हैं किसी को पता ही नहीं चलता। वजह है कि ये फूल ज्यादातर सड़क किनारे ही खिलते हैं और सड़कें चौड़ी करने के मकसद से इन फूलों के उगने की जरखेज जमीन खत्म हो गई है। इसके अलावा चाय और मसालों की खेती के लिए बड़े पैमाने पर जमीन ले ली गई है। इस वजह से भी इन फूलों के लिए जमीन नहीं बची। अब इस अजूबे फूल के लिए केरल में जगह संरक्षित की जाती है, क्योंकि इसके खिलने का इंतजार सभी को रहता है।

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Worlds rarest flower Neelakurinji Blooming only once in 12 years
नीलकुरिंजी फूल - फोटो : Kerala Tourism

यूं तो केरल के पहाड़ गहरे हरे और नीले हैं लेकिन इस फूल के खिलने के बाद तमाम वादियां बैंगनी नजर आने लगती है। ये फूल अगस्त के महीने में खिलना शुरू होता है और अक्तूबर तक इसका मौसम रहता है। इस फूल के लिए कुरिंजीमाला नाम का संरक्षित क्षेत्र यानी सैंक्चुअरी भी है जोकि मुन्नार से 45 किलोमीटर दूर है। पर्यावरण कार्यकर्ता और सेव कुरिंजी कैंपेन काउंसिल के सदस्य आर. मोहन के मुताबिक हर किसी की ख्वाहिश रहती है कि वो इस फूल को खिलता हुआ देख ले। तोडस, मथुवंस और मनडियास जाति के आदिवासी इस फूल की पूजा करते हैं।

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नीलकुरिंजी फूल - फोटो : Social media

2006 में केरल के जंगलों का 32 वर्ग किलोमीटर इलाका इस फूल के संरक्षण के लिए सुरक्षित रखा गया था। इसे कुरिंजीमाला सैंक्चुअरी का नाम दिया गया। ये सैंक्चुअरी कुरिंजी कैंपेन काउंसिल की कोशिशों का नतीजा है। वैली ऑफ फ्लॉवर के बाद ये भारत की दूसरी फ्लॉवर सैंक्चुअरी है। यहां नीलकुरिंजी की तमाम प्रजातियां संरक्षित की जाती हैं। 

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