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दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु बम, जिसके लिए बनाया गया था खास लड़ाकू विमान

Tue, 25 Feb 2020 11:00 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Tue, 25 Feb 2020 11:00 AM IST
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worlds largest nuclear bomb for which a special fighter aircraft was built
दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु बम - फोटो : Social media

बहुत बड़ा करने के चक्कर में हम कई बार ऐसी चीजें बना डालते हैं, जिनका कोई इस्तेमाल नहीं हो पाता। अब बिखर चुके सोवियत संघ ने भी शीत युद्ध के जमाने में एक ऐसा एटम बम बना डाला था, जिसका कोई इस्तेमाल होना मुमकिन नहीं था। हालांकि इंसानियत के लिहाज से ये ठीक ही हुआ। वरना धरती पर भयंकर तबाही मच सकती थी। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

बात बीसवीं सदी के साठ के दशक की है। दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो गया था। अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर एटम बम गिराकर इसकी ताकत दुनिया को दिखा दी थी। दूसरा विश्व युद्ध खत्म होते ही अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध छिड़ गया था। दोनों देश एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए एक से एक हथियार बना रहे थे। एटम बम के मामले में अमेरिका से पिछड़ा सोवियत संघ, एक ऐसा बम बनाने के लिए बेकरार था, जो दुनिया में सबसे बड़ा हो। 

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दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु बम - फोटो : Social media

सोवियत संघ के एटमी वैज्ञानिक आंद्रेई सखारोव ने आखिरकार साठ का दशक आते-आते ऐसा बम तैयार कर ही लिया। इसे नाम दिया गया जार का बम। जार रूस के राजाओं की उपाधि थी। उन्हीं के नाम पर कम्युनिस्ट सरकार ने इसे जार का बम नाम दिया। ये इतना विशाल एटम बम था कि इसके लिए खास लड़ाकू जहाज बनाया गया।  

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टीयू-95 विमान - फोटो : Social media

आम तौर पर हथियार और मिसाइलें लड़ाकू जहाजों के भीतर रखी जाती हैं, लेकिन जिस जार के बम यानी सबसे बड़े एटम बम को सोवियत वैज्ञानिकों ने बनाया था, वो इतना बड़ा था कि उसे विमान से पैराशूट के जरिए लटका कर रखा गया था। इसके लिए सोवियत लड़ाकू विमान तुपोलोव-95 के डिजाइन में बदलाव किए गए थे। 30 अक्तूबर 1961 को Tu-95 विमान ने पूर्वी रूस से उड़ान भरी थी। इसमें उस वक्त का सबसे बड़ा एटम बम यानी जार का बम रखा गया था, जिसका परीक्षण किया जाना था। ये एटम बम आठ मीटर लंबा और 2.6 मीटर चौड़ा था। इसका वजन 27 टन से भी ज्यादा था। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

ये बम, अमेरिका के लिटिल बॉय और फैट मैन एटम बमों जैसा ही था, मगर उनसे बहुत बड़ा था। ये पल भर में एक बड़े शहर को खाक में तब्दील कर सकता था। सोवियत लड़ाकू जहाज टुपोलोव-95 इसे लेकर रूस के पूर्वी इलाके में स्थित द्वीप नोवाया जेमलिया पर पहुंचा. इसके साथ ही एक और विमान उड़ रहा था, जिसको कैमरे के जरिए बम के विस्फोट की तस्वीरें उतारनी थीं। टुपोलोव विमान ने करीब दस किलोमीटर की ऊंचाई से पैराशूट के जरिए गिराया गया। इसकी वजह ये थी कि जब तक विस्फोट हो, तब तक गिराने वाला लड़ाकू जहाज और तस्वीरें उतारने के लिए गया विमान, दोनों सुरक्षित दूरी तक पहुंच जाएं। हालांकि इसकी उम्मीद पचास फीसदी ही थी।

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