हमारी धरती के 71 फीसदी हिस्से पर समंदर फैले हुए हैं। इनमें दुनिया में मौजूद कुल पानी का 97 प्रतिशत हिस्सा है। समंदर के जानकार कहते हैं कि इन में 1.35 अरब क्यूबिक किलोमीटर पानी मौजूद है। अब तक इंसान ने समुद्र के केवल पांच फीसदी हिस्से को ही खंगाला है। समंदर, हमारी पृथ्वी पर जीवन का सबसे बड़ा स्रोत हैं। यहीं से धरती पर जिंदगी के विकास की बुनियाद पड़ी थी। अब तक समुद्रों में मौजूद जीवों की दो लाख 30 हजार प्रजातियों का ही पता लगाया जा सका है, लेकिन जानकार कहते हैं कि चूंकि हम ने अब तक समुद्र का केवल पांच फीसदी हिस्सा ही खंगाला है, तो इस में मौजूद जीवों की प्रजातियों की संख्या 20 लाख से भी ज्यादा हो सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
समुद्रों से ही दुनिया का मौसम तय होता है। बारिश होती है। गर्मी पड़ती है। अंतरिक्ष में चारों तरफ सिर्फ काला रंग ही दिखता है। इस में सबसे अलग दिखती है हमारी धरती। नीली-हरी धरती का ये रंग समंदर की वजह से ही है। लेकिन, क्या हो अगर अचानक एक दिन दुनिया से समुद्रों का अस्तित्व ही खत्म हो जाए?
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एक मोटे अंदाजे के मुताबिक, करीब चार करोड़ लोगों की रोजी समंदर से चलती है। इनमें से साढ़े तीन करोड़ के करीब लोग समुद्र में मछली मार कर अपनी जीविका कमाते हैं। तो बाकी के पचास लाख लोग जहाजों और क्रूज शिप के माध्यम से रोजगार पाते हैं। समुद्र का पानी अचानक से उड़ जाने से उस वक्त समंदर में मौजूद जहाज करीब पौने चार किलोमीटर की गहराई में चले जाएंगे, क्योंकि समुद्रों की औसत गहराई इतनी ही है। ये भी हो सकता है कि कुछ खास जगहों पर मौजूद जहाज इससे भी ज्यादा गहराई में चले जाएं। ऐसा होने की सूरत में जो जहाज किनारों के पास होंगे, उन्हें तो शायद मामूली नुकसान उठाना पड़े, लेकिन गहरे समंदर में तैर रहे जहाज अचानक से बहुत गहराई में गिरेंगे, तो उन्हें बहुत क्षति उठानी पड़ेगी।
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समुद्र अचानक सूखे, तो उन में रहने वाले अरबों की तादाद में जीवों की दम घुटने से मौत हो जाएगी। इनमें व्हेल-डॉल्फिन और शार्क मछली से लेकर हजारों नस्लों के छोटे जीव शामिल होंगे। अंदाजा है कि इन जीवों की लाशों का वजन पांच से 10 अरब टन हो सकता है। जब ये सड़ने लगेंगे, तो इनकी बदबू का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
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समुद्रों का पानी खत्म होने पर करीब 1.3 अरब वर्ग किलोमीटर जगह खाली होगी, जिसे भरने के लिए वायुमंडल की हवा उस तरफ भागेगी। इससे वायुमंडल का घनत्व अचानक से बहुत कम हो जाएगा। इस वजह से ऊंचे ठिकानों में रहने वाले लोगों के लिए तो सांस लेना भी दूभर हो जाएगा। इन जगहों से हवा का दबाव कम होगा, तो तापमान भी बहुत तेजी से गिरेगा।