मानसिक रूप से बीमार इंसान का घर हमेशा के लिए पागलखाना बन जाता है। सोचिये पूरी दुनिया में कितने पागल होंगे और कितने पागलखाने होंगे। हालांकि, एक सामान्य इंसान मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के विषय में कैसे जानेगा। उन मरीजों के साथ जानवरों जैसा बर्ताव करने वाले सिस्टम में गंभीर बदलाव की आवश्यकता थी। 20वीं शताब्दी में एक महिला पत्रकार की जिंदादिली ने इन संस्थानों के ऐसा राज खोले जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया। जानिए क्या था पूरा मामला और वो महिला कौन थी।
20वीं सदी की वो महिला पत्रकार जो खुद पागलखाने में हो गई थी भर्ती, करना चाहती थी ये काम
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Mon, 04 Feb 2019 05:52 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन