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एक ऐसा देश, जिसे नहीं लगता कोरोना वायरस से डर, यहां पहले की तरह ही है जनजीवन

Fri, 27 Mar 2020 02:30 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Fri, 27 Mar 2020 02:30 PM IST
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The only country in Europe Belarus which is not afraid of Coronavirus or Covid-19
बेलारूस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pixabay

बीते कुछ दिनों से यूरोप कोरोना वायरस महामारी का केंद्र बना हुआ है। कई देशों में सरकारें लोगों से घरों में बंद रहने के लिए कह रही हैं और वायरस को फैलने से रोकने के लिए पाबंदियां लगा रही हैं। लेकिन यूरोप में एक देश ऐसा भी है जहां अधिकारी इस वायरस के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए आम जनजीवन पर पाबंदियां नहीं लगा रहे। 

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कोरोना महामारी से निपटने के लिए बेलारूस अपने निकट पड़ोसी यूरोपीय देश, यूक्रेन और रूस की तरह कड़े कदम नहीं उठा रहा। यूक्रेन जल्द ही कोरोना को रोकने के लिए आपातकाल का एलान कर सकता है। रूस ने सभी स्कूलों को बंद कर दिया है, सार्वजनिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाई है और देश से आने जाने वाली सभी उड़ानों को भी रद्द किया है, लेकिन बेलारूस में कामकाज आम दिनों की तरह ही चल रहा है। देश की सीमाएं पहले की तरह खुली है, लोग काम पर जा रहे हैं और लोग जरूरी सामान खरीदने के लिए दुकानों की तरफ नहीं भाग रहे।  
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'दहशत की जरूरत नहीं'

बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लूकाशेन्को कहते हैं कि फिलहाल देश में कोरोना को पैर पसारने से रोकने के लिए एहतियातन कदम उठाने की जरूरत नहीं है। मंगलवार को मिंस्क में चीन के राजदूत से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, 'घटनाएं तो होती रहती हैं। जरूरी है कि उन्हें लेकर लोगों में दहशत न फैले।' 
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बेलारूस में न तो सिनेमाघर और थिएटर बंद किए गए हैं और न ही यहां सार्वजनिक कार्यक्रम करने पर किसी तरह को पाबंदी लगाई गई है। बेलारूस दुनिया के उन चंद देशों में से है जिसने यहां होने वाली फुटबॉल चैंपियनशिप कैंसिल नहीं की है। यहां हो रहे फुटबॉल मैच सामान्य दिन की तरह कराए जा रहे हैं और पड़ोसी रूस के फुटबॉल प्रेमियों के लिए टेलीविजन पर भी मैचों का सीधा प्रसारण भी किया जा रहा है। 

'कोरोना वायरस को रोकेगा ट्रैक्टर'

राष्ट्रपति लूकाशेन्को ने हाल में कहा था कि 'कोरोना वायरस को एक ट्रैक्टर रोकेगा।' उनका ये बयान बेलारूस के सोशल मीडिया पर सुर्खियों में रहा और लोगों ने इस पर चर्चा की, कइयों ने इस बयान का मजाक भी बनाया। हालांकि राष्ट्रपति का बयान खेतों में मेहनत करने को लेकर था। उन्होंने ये भी कहा था कि वो खुद शराब नहीं पीते हैं लेकिन कोरोना को रोकने के लिए पीना पड़ा तो वो एक घूंट वोदका तो पी ही सकते हैं। 

हालांकि बेलारूस के आम नागरिक पूरी दुनिया में फैले कोरोना के कहर की खबरों से वाकिफ हैं और वो इस वायरस के बढ़ते कदमों को लेकर चिंता में हैं। मिंस्क में कई युवा और स्कूली छात्र बीमारी का बहाना बना तक छात्रों से भरी क्लास में जाने से बच रहे हैं।

छात्रों की परेशानी कम करने के लिए कॉलेज और युनिवर्सिटीज ने अपने क्लासेस का वक्त कुछ घंटे पहले कर दिया है, ताकि छात्र सार्वजनिक परिवहन में होने वाली भीड़ से बच सकें। मिंस्क की सड़कों पर लोग कम ही दिख रहे हैं और लोगों का कहना है कि उन्हें पता है कि बूढ़े लोगों को इस वायरस से अधिक खतरा है, लेकिन कोरोना को लेकर इस तरह का कोई जागरूकता अभियान अधिकारियों की तरफ से नहीं कराया जा रहा।

राष्ट्रपति लूकाशेन्को ने कहा है कि इस कारण चिंता करने की कोई बात नहीं है, क्योंकि विदेशों से बेलारूस आने वाले सभी लोगों के कोरोना वायरस टेस्ट कराए जा रहे हैं। वो दावा करते हैं कि, 'एक दिन में दो या तीन लोगों के टेस्ट के नतीजे पॉजिटिव आ रहे हैं। ऐसे मामलों में उन्हें क्वारंटीन में भेजा जा रहा है और फिर उन्हें डेढ़ सप्ताह या दो सप्ताह बाद छोड़ा जा रहा है।' 

'अफवाह फैलाने वालों को नहीं बख्शेंगे' 

लूकाशेन्को कहते हैं कि चिंता करना और मानसिक तनाव लेना बेहद खतरनाक है, शायद ये वायरस से भी अधिक घातक है। उन्होंने देश की खुफिया एजेंसी बेलारूसी केजीबी को, 'आम लोगों के बीच अफवाह फैलाने और दहशत फैलाने वालों को पकड़ने' का आदेश दिया है। अब तक देश में कोरोना वायरस के कुल 86 मामले सामने आए हैं और यहां इस कारण मात्र दो मौतें हुई हैं। बेलारूस ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि नहीं की है कि मौतों का कारण कोरोना है, लेकिन माना जा रहा है कि इन मौतों का कारण वायरस ही है।

बेलारूस कई अर्थों में यूरोप के दूसरे देशों से अलग है। ये यूरोप का आखिरी ऐसा देश है जहां अब भी मौत की सजा का प्रावधान है। देश की विपक्षी एक्टिविस्ट एंड्रे किम सरकार के कड़े आलोचक रहे हैं, लेकिन इस मामले में वो राष्ट्रपति की बात से इत्तेफाक रखते हैं। 

किम ने अपने फेसबुक पन्ने पर लिखा कि लूकाशेन्को बिल्कुल सही हैं, क्योंकि 'अगर वो पूरे देश के लोगों पर बाहर निकलने से जुड़े प्रतिबंध लगाते हैं तो बेलारूस की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। यहां चीजें अलग हैं और बेलारूस फिलहाल दुनिया का ऐसा एक मात्र देश है जहां सरकार लोगों का भला सोच कर काम करती है न कि जनकल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर करती है। मैं मानता हूं कि ये कहने पर मुझे कड़ी आलोचना झेलनी पड़ेगी, लेकिन जब हर तरफ पागलपन हो तो आप चुप नहीं रह सकते।' 

वो कहते हैं 'पागलपन' से मेरा मतलब कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर में जिस तरीके के कदम उठाए जा रहे हैं उनसे है। वो कहते हैं कि कुछ न कर के वो बेलारूस को दहशत से दूर रख रहे हैं। 

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