Ajab-Gajab: दुनिया की सबसे अनोखी मछली, रंग बदलने में गिरगिट को भी छोड़ा पीछे, हैरत में पड़े वैज्ञानिक
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वैज्ञानिकों को सबसे अधिक हैरानी यह हुई कि अनोखी मछली मरने के बाद भी अपना रंग बदल लेती है। नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में एक नया शोध प्रकाशित हुआ है। शोध के मुताबिक, विशेषज्ञों ने मछली के अलग-अलग हिस्सों पर प्रकाश के प्रभाव को माइक्रोस्कोपी के इस्तेमाल से निर्धारित किया।
वैज्ञानिक मानते हैं कि हो सकता है कि इस प्रक्रिया में त्वचा रंग देने वाले क्रोमैटोफोर के नीचे SWS1 नामक प्रकाश रिसेप्टर्स का काम करता हो। शोधकर्ताओं के मुताबिक, मछलियों को रिसेप्टर्स फीडबैक देते हैं कि उनकी त्वचा के अलग-अलग हिस्सों में कहां और किस प्रकार परिवर्तन हो रहा है।
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शोधकर्ताओं के मुताबिक, आंखों की ही तरह इन जीवों की त्वचा प्रकाश के प्रति संवेदनशील होती है। हालांकि वैज्ञानिकों ने साफ तौर पर कहा है कि यह आंख का काम नहीं करती है। विशेषज्ञों ने इस शोध की मदद से हॉगफिश मछली के विकास, आवास और दूसरे व्यवहारों के बारे में पता लगाया है। इसके साथ ही तेजी बदलाव करने की क्षमता के बारे में भी समझा।
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शोधकर्ताओं का कहना है कि कि समुद्र में कई ऐसे जीव पाए जाते हैं जिनमें अपने रंग को बदलने की क्षमता होती है। इससे उन्हें बदले तापमान को मैनेज करने, साथी को आकर्षित करने और छिपने में मदद मिलती है। अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के शोधकर्ताओं का कहना है कि मछली के शरीर की कोशिकाओं, जिन्हें क्रोमैटोफोरस कहते हैं में रंग द्रव्य, क्रिस्टल या छोटी परावर्तक प्लेटें रहती हैं। यह प्लेटें मछलियों को रंग बदलने में सक्षम बनाती हैं।