{"_id":"65b39d8bff044b2b0f0ac164","slug":"republic-day-2024-president-draupadi-murmu-arrived-on-kartavya-path-in-buggy-after-40-years-know-its-history-2024-01-26","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Republic Day 2024: ऐतिहासिक बग्घी में कर्तव्य पथ पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मू, जानिए क्या है इसका इतिहास","category":{"title":"Bizarre News","title_hn":"हटके खबर","slug":"bizarre-news"}}
Republic Day 2024: ऐतिहासिक बग्घी में कर्तव्य पथ पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मू, जानिए क्या है इसका इतिहास
Fri, 26 Jan 2024 05:25 PM IST
धर्मेंद्र सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Fri, 26 Jan 2024 05:25 PM IST
सार
75 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू मुख्य अतिथि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ पारंपरिक बग्घी से कर्तव्य पथ पर पहुंचीं। 40 साल के बाद फिर से इस परंपरा की शुरुआत हुई है।
विज्ञापन
गणतंत्र दिवस 2024
- फोटो : Twitter@rashtrapatibhvn
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Republic Day 2024: 26 जनवरी को भारत अपना 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। गणतंत्र दिवस के मौके पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुख्य अतिथि हैं। इस अवसर पर कर्तव्य पथ पर परेड में भाग लेने के लिए इमैनुएल मैक्रों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ पारंपरिक बग्घी में सवार होकर पहुंचे। देश में इस पारंपरिक बग्घी का भी एक अनोखा इतिहास है। आज हम आपको इसके बारे में रोचक तथ्य बताते हैं।
विज्ञापन
75 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू मुख्य अतिथि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ पारंपरिक बग्घी से कर्तव्य पथ पर पहुंचीं। 40 साल के बाद फिर से इस परंपरा की शुरुआत हुई है। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद गणतंत्र दिवस पर साल 1950 में इस बग्घी में बैठे थे। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वायसराय भी इस बग्घी का इस्तेमाल करते थे। साल 1984 तक यह परंपरा चलती रही, लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद बग्घी की परंपरा पर रोक लगा दी गई और इसकी जगह कार का इस्तामाल होने लगा।
विज्ञापन
जब राष्ट्रपति मुर्मू और इमैनुएल मैक्रों ने बग्घी से सफर किया, तो राष्ट्रपति के अंगरक्षकों ने सुरक्षा दी। गौरतलब है कि राष्ट्रपति के अंगरक्षक भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट है। यह गणतंत्र दिवस इस विशिष्ट रेजीमेंट के लिए विशेष है, क्योंकि अंगरक्षक की 1773 में स्थापना की गई थी, जिसने अब 250 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है।
विज्ञापन
Cruelest Women: पति की मौत के बाद 'खूनी महिला' बन गई थी ये बेगम, कहानी जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे
भारत ने जीती बग्घी
15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के समय दोनों देशों के बीच जमीन और सेना से लेकर हर चीज के बंटवारे को आसान बनाने के लिए प्रतिनिधि नियुक्ति किए गए। भारत के एच. एम. पटेल भारत के प्रतिनिधि थे, तो वहीं पाकिस्तान की तरफ से चौधरी मोहम्मद अली को प्रतिनिधि बनाया गया। हर चीज का बंटवारा जनसंख्या के आधार किया गया। राष्ट्रपति के अंगरक्षकों को 2:1 के अनुपात में बांटा गया। राष्ट्रपति की बग्घी की जब बारी आई, दोनों देशों के बीच बीच बहस छिड़ गई।
Aliens: इन ग्रहों पर हो सकते हैं एलियन, आकार में धरती से बड़े हैं सभी एक्सोप्लैनेट, नासा ने की बड़ी खोज
समस्या को सुलझाने के लिए अंगरक्षकों के चीफ कमांडेंट ने एक सुझाव दिया। इस पर दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने सहमति जाहिर की। कमांडेंट ने बग्घी के सही हकदार के फैसले के लिए सिक्का उछालने को कहा। राष्ट्रपति बॉडीगार्ड रेजिमेंट के कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल ठाकुर गोविन्द सिंह और पाकिस्तान के याकूब खान के बीच टॉस हुआ। भारत ने टॉस जीत लिया और अब यह बग्घी राष्ट्रपति भवन की शान बनकर रही है।