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धर्म से ऐसी नफरत, सिर के पीछे गोली मारकर की गई थी 18 हजार लोगों की हत्या

Wed, 03 Apr 2019 01:03 PM IST
पंखुड़ी सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Wed, 03 Apr 2019 01:03 PM IST
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Nazi massacre of 50 thousand jews in Belarus building site

युवा सिपाही बहुत एहतियात और धीमी गति से मानव कंकालों पर जमी सदियों की गर्द साफ करते हैं। हड्डियों के साथ कपड़ों के चिथड़े और जूते चप्पल हैं। ये सिपाही पश्चिमी बेलारूस में एक निर्माण स्थल पर अतीत में हुए नरसंहार के इतिहास की वो परतें कुरेदने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके बारे में बहुत कम जानकारी है।पॉश इलाके के एक अपार्टमेंट ब्लॉक में इमारत बनाने के लिए हुई खुदाई में सामूहिक कब्र मिली थी। तबसे खास प्रशिक्षित सिपाही अब तक 1,000 यहूदियों के अस्थि पंजर निकाल चुके हैं, जिन्हें नाजी जर्मनी के कब्जे के दौरान ब्रेस्ट शहर में मार डाला गया था।

Nazi massacre of 50 thousand jews in Belarus building site

इस काम में लगे बेलारूस के सिपाही दमित्री कैमिंस्की कहते हैं, "सिर में गोली के छेद बिल्कुल साफ दिखाई देते हैं।" उनकी टीम आम तौर पर सोवियत सिपाहियों के कंकाल ढूंढने का काम करती है। यहां उन्हें छोटे बच्चों के सिर भी मिले और महिलाओं के ऐसे कंकाल भी मिले जिनकी गोद में बच्चे थे। दमित्रि के अनुसार, "लोगों के सिर में पीछे से गोली मारी गई थी और सभी शवों का चेहरा कब्र में नीचे की ओर था। नाजियों ने खाईयां खोदीं और लोगों को गोली मारी गई, वे इसमें गिर गए, फिर गोली मारी गई, वे फिर इसमें गिरे।"

Nazi massacre of 50 thousand jews in Belarus building site
दूसरे विश्वयुद्ध के पहले ब्रेस्ट शहर की कुल आबादी 50,000 थी, जिसमें आधे यहूदी थे। जून 1941 में जब जर्मनी ने यहां कब्जा किया उसके कुछ ही दिन बाद 5,000 लोगों को मार दिया गया। जो बच गए उन्हें बंद बस्तियों (घेट्टो) में सीमित कर दिया गया। अक्तूबर 1942 में आदेश आया कि इन्हें भी खत्म कर दिया जाए। उन्हें मालगाड़ी से 100 किलोमीटर दूर जंगल की ओर ले जाया गया। ब्रोनाया गोरा में हजारों लोगों को एक बड़े गढ्ढे के मुहाने पर ले जाकर गोली मार दी गई।
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Nazi massacre of 50 thousand jews in Belarus building site
ब्रेस्ट में जो म्यूजियम है वो भी एक तहखाने के एक कमरे में है। जिसे यहूदी समुदाय ने बनाया और वे ही उसकी देखभाल करते हैं। इसमें उन जीवित बच गए यहूदियों की कहानियां हैं जो महीनों तक अपने घर की छत में बनी छोटी जगहों और दीवारों के पीछे छिपे रहकर जान बचाई। वहां एक सिटी रजिस्टर भी है जिसे जर्मन रखते थे। इसमें 15 अक्तूबर 1942 का एक रिकॉर्ड दर्ज है जिसमें 17,893 यहूदियों के शहर में होने बात लिखी गई है। दूसरे दिन के रिकॉर्ड में इस संख्या को काट दिया गया है। इस समुदाय के नेता एफिम बैसिन कहते हैं, "इस तरह से हमने जाना कि घेट्टो के लोगों को भी मार डाला गया।"
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Nazi massacre of 50 thousand jews in Belarus building site
उन्हें शक था कि निर्माण स्थल पर कुछ लाशें मिलेंगी, लेकिन इतनी मिलेंगी, ये कभी नहीं सोचा था। वो कहते हैं कि "इससे पता चलता है कि अपने इतिहास के बारे में हम कितना कम जानते हैं।" बेलारूस के यहूदियों का भविष्य हमेशा के लिए उस महाविनाश से जुड़ गया जो कब्जे के दौरान वहां हुआ था। एफिम के अनुसार, "ये बहुत दुखद है। यहूदी इसलिए नहीं मारे गए क्योंकि वे नाजियों का विरोध कर रहे थे। वे इसलिए मारे गए क्योंकि वे यहूदी थे।"
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