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Zara Hatke: 20 बार बदला गया है भारत के इस शहर का नाम, अश्वथामा ही नहीं लव कुश तक का भी जुड़ा है इतिहास
Tue, 03 Jun 2025 10:32 AM IST
दीक्षा पाठक
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Tue, 03 Jun 2025 10:32 AM IST
सार
Zara Hatke: कानपुर उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है। इसका इतिहास बहुत समृद्ध और प्रेरणादायक है। 1857 की क्रांति, जिसे भारत की पहली स्वतंत्रता संग्राम कहा जाता है में कानपुर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी।
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कानपुर सेंट्रल स्टेशन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
क्या आपको पता है कि भारत देश में एक ऐसा भी शहर है, जिसका नाम एक दो बार नहीं, बल्कि 20 बार बदला गया है? इस शहर का नाम कानपुर है। कानपुर का पुराना नाम कान्हपुर था। यह उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शहर है, जो राज्य की राजधानी लखनऊ से लगभग 80 किलोमीटर पश्चिम दिशा में स्थित है। यह शहर आज औद्योगिक राजधानी के रूप में जाना जाता है क्योंकि यहां कपड़ा, चमड़ा, रसायन, मशीनें और कई बाकी की इंडस्ट्री बहुत बड़े पैमाने पर चलते हैं। लेकिन कानपुर सिर्फ इंडस्ट्री के लिए ही नहीं, बल्कि अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है। तो आइए जानते हैं कि इस शहर के पीछे का इतिहास क्या है।
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कानपुर शहर का प्रसिद्ध है इतिहास
कानपुर उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है। इसका इतिहास बहुत समृद्ध और प्रेरणादायक है। 1857 की क्रांति, जिसे भारत की पहली स्वतंत्रता संग्राम कहा जाता है में कानपुर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। आज भी शहर के कई हिस्सों में अंग्रेजी शासन की छाप देखी जा सकती है।जैसे कुछ मोहल्लों और सड़कों के नाम ब्रिटिश अफसरों से जुड़े हुए हैं।
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इस राजा ने रखी थी कानपुर की नींव
कानपुर की स्थापना 24 मार्च 1803 को ईस्ट इंडिया कंपनी ने की थी, लेकिन इसका इतिहास इससे भी पुराना है। माना जाता है कि इस क्षेत्र को बसाने की योजना सचेंडी के राजा हिंदू सिंह ने बनाई थी। इसके अलावा एक मान्यता यह भी है कि यहां की नींव राजा कान्हा देव ने रखी थी। कानपुर का नाम समय-समय पर बदला गया। 1770 में इसे ‘कॉनपूर’ कहा जाता था। बाकी के नामों में ‘करनपुर’, ‘कन्हापुर’, और ‘कन्हैयापुर’ शामिल हैं। 1948 के बाद इसे आधिकारिक रूप से "कानपुर" कहा जाने लगा, हालांकि आज भी कई लोग इसे प्यार से "कंपू" कहते हैं।
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ब्रह्मा जी ने यहीं से की थी ब्रह्मांड की रचना
कानपुर से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित बिठूर भी एक काफी महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है। यह गंगा नदी के किनारे बसा है और कई पवित्र कथाओं से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा जी ने यहीं से ब्रह्मांड की रचना की थी। त्रेतायुग में माता सीता ने यहीं लव और कुश को जन्म दिया था और यहीं उनकी मुलाकात महर्षि वाल्मीकि से हुई थी। यह स्थान वाल्मीकि आश्रम के लिए भी प्रसिद्ध है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि बालक ध्रुव ने यहीं तपस्या कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया था। कानपुर और बिठूर दोनों ही उत्तर भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान हैं। जहां कानपुर देश के विकास में औद्योगिक योगदान दे रहा है, वहीं बिठूर भारतीय संस्कृति और पौराणिक आस्था को जीवित रखे हुए है।