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यहां आज भी मौजूद है भगवान परशुराम का विशालकाय फरसा, रहस्यमय है वो जगह

Thu, 07 May 2020 06:11 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Thu, 07 May 2020 06:11 PM IST
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Lord Parshuram Farsa In Tanginath Dham mystery
भगवान परशुराम का फरसा - फोटो : Social media

किस्से-कहानियों में अक्सर आपने भगवान परशुराम और उनके फरसे के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि वो फरसा आज भी धरती पर मौजूद है। जी हां, दावा किया जाता है कि एक पहाड़ी पर स्थित एक मंदिर में भगवान परशुराम का फरसा गड़ा है, जिसे खुद उन्होंने ही गाड़ा था। इस फरसे से जुड़ी एक बेहद ही रहस्यमय कहानी है, जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते होंगे। आज हम आपको इसी कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपको हैरान कर देगी। 

Lord Parshuram Farsa In Tanginath Dham mystery
टांगीनाथ थाम मंदिर - फोटो : Social media

दरअसल, झारखंड की राजधानी रांची से करीब 150 किलोमीटर दूर गुमला जिले में एक पहाड़ी है, जहां स्थित है टांगीनाथ धाम। इसी धाम के एक मंदिर में मौजूद है भगवान परशुराम का फरसा। वैसे तो यह फरसा खुले आसमान के नीचे है, लेकिन आज तक इसमें कभी जंग नहीं लगा। यह किसी रहस्य से कम नहीं है कि हजारों साल बाद भी यह सुरक्षित कैसे है? 

Lord Parshuram Farsa In Tanginath Dham mystery
भगवान परशुराम का फरसा - फोटो : Social media

मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस फरसे से छेड़छाड़ की कोशिश करता है, उसे इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ता है। कहते हैं कि एक बार लोहार जनजाति के कुछ लोगों ने फरसे को जमीन से उखाड़ कर ले जाने की कोशिश की थी, लेकिन जब फरसा नहीं उखड़ा तो उन्होंने उसके ऊपरी भाग को काट दिया। हालांकि उसे भी वो ले जाने में नाकाम रहे। कहा जाता है कि इस घटना के बाद आसपास रहने वाले लोहार जनजाति के लोगों की एक-एक मौत होने लगी, जिसके बाद वो इलाका ही छोड़कर चले गए। आज भी इस जनजाति के लोग आसपास के गांवों में रहने से घबराते हैं। 

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भगवान परशुराम का फरसा - फोटो : Social media

भगवान परशुराम के टांगीनाथ धाम आने और वहां अपना फरसा जमीन में गाड़ने के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। ऐसी मान्यता है कि त्रेतायुग में जनकपुर में माता सीता के स्वयंवर के दौरान जब भगवान राम ने शिवजी का धनुष तोड़ा तो उसकी भयंकर ध्वनि सुनकर परशुराम जी गुस्से में जनकपुर पहुंच गए और उन्होंने भगवान राम और लक्ष्मण को पहचाने बिना ही उन्हें खूब बुरा-भला कहा, लेकिन बाद में जब उन्हें ये अहसास हुआ कि राम जी भगवान विष्णु के अवतार हैं तो वो बहुत लज्जित हुए और अपने किए का प्रायश्चित करने के लिए घने जंगलों के बीच एक पहाड़ पर चले गए। वहीं पर उन्होंने अपना फरसा गाड़ दिया और तपस्या करने लगे। उसी जगह को आज टांगीनाथ धाम के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि फरसे के अलावा भगवान परशुराम के पदचिह्न भी वहां मौजूद हैं।   

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Lord Parshuram Farsa In Tanginath Dham mystery
टांगीनाथ धाम में मौजूद शिवलिंग - फोटो : Social media

टांगीनाथ धाम में सैकड़ों शिवलिंग और प्राचीन प्रतिमाएं भी हैं और वो भी खुले आसमान के नीचे। बताया जाता है कि साल 1989 में पुरातत्व विभाग ने यहां खुदाई करवाई थी, जिसमें हीरा जड़ित मुकुट और सोने-चांदी के आभूषण समेत कई कीमती वस्तुएं मिली थीं। हालांकि बाद में अचानक ही खुदाई बंद कर दी गई। अब इसके पीछे क्या वजह थी, यह आज भी एक रहस्य ही है। वहीं खुदाई में मिली चीजें आज भी डुमरी थाना के मालखाने में रखी हुई हैं। 

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