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अफगानिस्तान में क्या है बच्चा बाजी कुप्रथा, जिसमें छोटे लड़कों से करवाया जाता है घिनौना काम

Mon, 23 Aug 2021 11:18 AM IST
शशि सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: शशि सिंह Updated Mon, 23 Aug 2021 11:18 AM IST
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know about bachcha bazi tradition in afghanistan which promots child sexual abuse know about the full details of this
(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Twitter tripatini

इस समय तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा पूरी दुनिया में चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है। जहां तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा होते ही लोगों में डर और असुरक्षा की भावना जागने लगी है क्योंकि आने वाले समय तालिबान के कट्टर कानूनों के कारण उनके भविष्य पर भी संकट गहराने लगा है। तालिबानियों के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद वहां की पूरी पृष्ठभूमि ही बदल गई है। ख़ासतौर पर महिलाओं की आजादी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाता है। लोगों के मन में डर घर करने लगा है कि आने वाले समय में अफगानिस्तान में बहुत सारी कुप्रथाओं का जन्म हो जाएगा लेकिन अफगानिस्तान में इससे पहले से ही एक कुप्रथा चली आ रही है, जिसे बच्चा बाजी के नाम से जाना जाता है। इसका विरोध सारी दुनिया में होता रहता है लेकिन 21वीं सदी में भी ये बदस्तूर जारी है। चलिए जानते हैं कि क्या है ये कुप्रथा और कैसे इस दलदल में फंसते जाते हैं नाबालिग लड़के...

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जानिए क्या है बच्चा बाजी कुप्रथा?

बच्चा बाजी एक ऐसी कुप्रथा है जिसमें रसूखदार लोगों द्वारा 10 साल की उम्र के आसपास वाले लड़कों को पार्टियों में डांस करवाया जाता है। इतना ही नहीं उन्हें लड़कियों के कपड़े पहनाए जाते हैं और लड़कियों की तरह मेकअप भी करवाया जाता है। इस बारे में कहा जाता है कि इसके बाद छोटे लड़कों के साथ पुरुषों द्वारा यौन शोषण और रेप भी किया जाता है। ये लड़के अत्याचार का शिकार होते रहते हैं और इस घिनौनी दलदल में फंसते चले जाते हैं। इस प्रथा में सिर्फ कम उम्र के लड़कों के साथ ही नहीं बल्कि महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार होता है। यही कारण है कि हमेशा ही इस प्रथा का विरोध किया जाता है।

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क्यों इस दलदल में फंस जाते हैं लड़के

जो बच्चे पार्टियों में जाकर डांस करते हैं, ज्यादातर वे गरीबी की वजह से इस काम को करने के लिए मजबूर होते हैं। बेहतर जिंदगी पाने की चाह में बच्चे इस ओर आकर्षित हो जाते हैं तो कई बार इन बच्चों को किडनैप भी किया जाता है और अभिजात्य वर्ग के लोगों के हाथों बेच दिया जाता है। इन बच्चों को इस काम के बदले सिर्फ सिर्फ कपड़े और खाना मिल जाता है। अमीर लोगों इन बच्चों को खरीदने के बाद अपने मनमुताबिक इस्तेमाल करते हैं।

 

 

 

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इस प्रथा पर बनी है डॉक्यूमेंट्री

जहां अफगानिस्तान में समलैंगिकता को गैर-इस्लामिक और अनैतिक माना जाता है वहीं एक तरफ वहां ये कुप्रथा आम है। इन बच्चों को ‘लौंडे’ या ‘बच्चा बेरीश’ कहकर बुलाया जाता है। इस प्रथा पर 2010 में ‘द डांसिंग बॉयज ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान’ नाम की एक डॉक्यूमेंट्री भी बनी है। जिसे अफगान पत्रकार नजीबुल्लाह कुरैशी द्वारा निर्देशित किया गया है। 

क्यों नहीं लगता है इस कुप्रथा पर प्रतिबंध

हालांकि अफगानिस्तान में इस प्रथा को अवैध माना जाता है लेकिन इस बच्चा बाजी से संबंधित गतिविधियों में रसूखदार और सशस्त्र पुरुषों का हाथ होने के कारण शायद ही ये कानून कभी भी पूरी तरह से लागू किए गए हो। यही कारण है कि इस प्रथा के अवैध होने और अंतर्राष्ट्रीय चिंता के बावजूद भी इस पर रोक नहीं लगाई जा सकी।

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