बृहस्पति ग्रह का नाम तो आपने सुना ही होगा, जिसे हम 'गुरु' के नाम से भी जानते हैं। दरअसल, यह हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। यह ग्रह प्राचीन काल से ही खगोलविदों द्वारा जाना जाता रहा है। यह अनेक संस्कृतियों की पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों के साथ जुड़ा हुआ है। रोमन सभ्यता ने अपने देवता 'जुपिटर' के नाम पर इस ग्रह का नाम रखा था।
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बृहस्पति ग्रह
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बृहस्पति ग्रह पर बादल नारंगी और भूरे रंग के होते हैं, क्योंकि यह अमोनिया क्रिस्टल और अमोनियम हाइड्रो सल्फाइड के बने होते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि सूरज की पराबैंगनी किरणें पड़ने पर इन बादलों का रंग बदलता रहता है।
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सौरमंडल के ग्रह
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अपने शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल के कारण बृहस्पति ग्रह को सौरमंडल का 'वैक्यूम क्लीनर' भी कहा जाता है, क्योंकि यह सौरमंडल के अन्य ग्रहों को बाहरी उल्कापिंडों के हमले से बचाता है और उन्हें अपनी ओर खींच लेता है।
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सौरमंडल के ग्रह
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बृहस्पति पर एक दिन मात्र नौ घंटा और 55 मिनट का ही होता है। यह 333 दिन में सूर्य का एक चक्कर पूरा करता है, यानी पृथ्वी के 11.9 साल में बृहस्पति का एक साल होता है।
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बृहस्पति ग्रह का 'द ग्रेट रेड स्पॉट'
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बृहस्पति ग्रह पर करीब 355 साल से लगातार एक भयंकर तूफान चल रहा है। बाहर से देखने पर यह तूफान एक लाल धब्बे की तरह नजर आता है, जिसे 'द ग्रेट रेड स्पॉट' कहते हैं। साथ ही यह भी कहा जाता है कि यह तूफान इतना बड़ा है कि इसमें तीन पृथ्वी आराम से समा जाए। बृहस्पति पर पहली बार इस तूफान को वर्ष 1665 में देखा गया है और उसके बाद देखा गया कि 1830 में भी यह तूफान जारी था। तब से वैज्ञानिक इसपर लगातार नजर रख रहे हैं। हालांकि वैज्ञानिक अब तक इसके बारे में पता नहीं लगा पाए हैं कि यह तूफान इतने लंबे समय तक कैसे बना हुआ है।