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जानिए फांसी के दिन क्या-क्या होता है और कैसे? जल्लाद दो दिन पहले ही आ जाता है जेल

Thu, 16 Jan 2020 02:11 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Thu, 16 Jan 2020 02:11 PM IST
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hanging procedure in jail in India and death sentence rules
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

16 दिसंबर 2012, देश के लगभग हर जहन में दर्ज ये वही तारीख है, जब निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। सात साल बाद मुजरिमों को 22 जनवरी को फांसी हो सकती है। दिल्ली में तिहाड़ जेल नंबर-3 में फांसी दी जाती है। देश के दूसरे हिस्सों में और भी कई ऐसी जेल हैं, जहां दोषियों को फांसी दी जाती है। 

hanging procedure in jail in India and death sentence rules
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दिल्ली की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर और दिल्ली सेंटर ऑन द डेथ पेनल्टी के डायरेक्टर अनुप सुरेंद्रनाथ के मुताबिक भारत की 30 से ज्यादा जेलों में फांसी का तख्ता है। यानी यहां फांसी देने के इंतजाम हैं। हर राज्य का अपना अलग जेल मैनुअल होता है। दिल्ली के जेल मैनुअल के मुताबिक ब्लैक वॉरंट सीआरपीसी (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) के प्रावधान के तहत जारी किया जाता है। इसमें फांसी की तारीख और जगह लिखी होती है। इसे ब्लैक वॉरंट इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके चारों ओर (बॉर्डर पर) काले रंग का बॉर्डर बना होता है। 

hanging procedure in jail in India and death sentence rules
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File photo

फांसी से पहले मुजरिम को 14 दिन का वक्त दिया जाता है ताकि वो चाहे तो अपने परिवार वालों से मिल ले और मानसिक रूप से अपने आप को तैयार कर ले। जेल में उनकी काउंसलिंग भी की जाती है। अगर कैदी अपनी विल तैयार करना चाहता है तो इसके लिए उसे इजाजत दी जाती है। इसमें वो अपनी अंतिम इच्छा लिख सकता है। अगर मुजरिम चाहता है कि उसकी फांसी के वक्त वहां पंडित, मौलवी या पादरी मौजूद हो तो जेल सुप्रिटेंडेंट इसका इंतजाम कर सकते हैं। 

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hanging procedure in jail in India and death sentence rules
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कैदी को एक स्पेशल वॉर्ड की सेल में अलग रखा जाता है। फांसी की तैयारी की पूरी जिम्मेदारी सुपरिटेंडेंट की होती है। वो सुनिश्चित करते हैं कि फांसी का तख्ता, रस्सी, नकाब समेत सभी चीजें तैयार हों। उन्हें देखना होता है कि फांसी का तख्ता ठीक से लगा हुआ है, लीवर में तेल डला हुआ है, सफाई करवानी होती है, रस्सी ठीक हालत में है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

फांसी के एक दिन पहले शाम को, फांसी के तख्ते और रस्सियों की फिर से जांच की जाती है। रस्सी पर रेत के बोरे को लटकाकर देखा जाता है, जिसका वजन कैदी के वजन से डेढ़ गुना ज्यादा होता है। जल्लाद फांसी वाले दिन से दो दिन पहले ही जेल आ जाता है और वहीं रहता है। 

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