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अल-नीनो ने तोड़ा तापमान का रिकॉर्ड, दुनिया में अब आएगी तबाही! क्या होगा भारत पर असर

Tue, 22 Sep 2026 05:07 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Tue, 22 Sep 2026 05:07 PM IST
सार

अल-नीनो ने प्रशांत महासागर में एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना लिया है। समुद्री सतह का औसत तापमान सामान्य से 3.05 डिग्री सेल्सियस ज्यादा तक पहुंच चुका है, जो 1991-2020 की औसत तुलना में अब तक का सबसे ज्यादा दैनिक तापमान है।

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El Nino broke a record three months in advance Is it going to get worse?
अल-नीनो ने तोड़ा तापमान का रिकॉर्ड! - फोटो : AI

विस्तार

अल नीनो को लेकर वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं। अब अल-नीनो ने प्रशांत महासागर में एक नया रिकॉर्ड बना लिया है, जो ऐतिहासिक है। निनो नाम इलाके में समुद्र की सतह का औसत तापमान सामान्य से 3.05 डिग्री सेल्सियस ज्यादा तक पहुंच चुका है, जो 1991-2020 की औसत तुलना में अब तक का सबसे ज्यादा दैनिक तापमान है।  2015 में नवंबर में करीब 3.02 डिग्री सेल्सियस का था, जो इस बार सितंबर में ही पहुंच गया है। सामान्य दो महीने पहले ही तापमान 3.05 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अल-नीनो अभी भी तेज हो रहा है और दिसंबर तक अपने चरम पर पहुंच सकता है। 

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अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इस दौरान प्रशांत महासागर में पूर्वी और मध्य हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, जो हवाओं में बदलाव से शुरू होता है। गर्म पानी से वाष्पीकरण बढ़ जाता है, जो पूरी दुनिया के मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है। इस बार अल नीनो नौ महीने पहले पश्चिमी प्रशांत में हवाओं के बदलाव से शुरू हुआ था, जो अब धीरे-धीरे सुपर अल-नीनो के स्तर तक पहुंच चुका है।
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क्या रिकॉर्ड बढ़ाएगा खतरा?

प्रशांत महासागर के निनो 3.4 इलाके में तापमान मापा जाता है और अल-नीनो की तीव्रता का आकलन किया जाता है। 3.05 डिग्री सेल्सियस तापमान आधुनिक रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा है। यह 1982, 1997 और 2015 जैसी मजबूत घटनाओं से आगे जा चुकी है। कुछ आंकड़ों में इसकी 1877 की ऐतिहासिक घटना से भी तुलना हो रही है। इस दौरान बड़े पैमाने पर सूखा और अकाल पड़ा था। मॉडल के मुताबिक, मासिक औसत और भी ऊपर पहुंच सकता है। कुछ अनुमानों में 4 डिग्री के करीब पहुंचने की संभावना जताई गई है, लेकिन यह अभी निश्चित नहीं है। 
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यह रिकाॅर्ड इसलिए अहम है, क्योंकि अल-नीनो जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर प्रभाव को बढ़ा सकता है। गर्म हो रही दुनिया में समुद्र का तापमान पहले से बढ़ा हुआ है। इसके कारण नई घटनाओं की तीव्रता बढ़ सकती है। वैज्ञानिक हर दिन डेटा पर नजर रख रह हैं,  क्योंकि हर दिन डेटा में उतार-चढ़ाव होता है।


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क्या होगा दुनिया पर प्रभाव?

दुनिया में अल-नीनो का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है। अमेरिका में इस सर्दी में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है। उत्तरी इलाके में सामान्य से ज्यादा गर्मी, पश्चिमी-मध्य हिस्सों में ज्यादा बर्फबारी हो सकती है।दक्षिण अमेरिका में पेरू और चिली में भारी बारिश और बाढ़ की घटनाएं पहले से देखी जा रही है। मध्य अमेरिका और कैरेबियन में सूखा पड़ने की संभावना है। 

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भारत पर क्या होगा असर?

एशिया में भारत समेत कई देशों में मॉनसून कमजोर हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में सूखा पड़ सकता है। अफ्रीका के कुछ इलाकों में भी बारिश के पैटर्न में बदलाव हो सकता है। कुल मिलाकर बाढ़, सूखा, गर्मी की लहरें और तूफान जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। 

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