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इस्त्रायल का सबसे बड़ा दुश्मन था यह शख्स, मौत की गुत्थी आज भी है अनसुलझी

Mon, 01 Jun 2020 11:05 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Mon, 01 Jun 2020 11:05 AM IST
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Death mystery of Yasser Arafat Israel biggest enemy
कभी इस्त्रायल का सबसे बड़ा दुश्मन था यह शख्स - फोटो : Social media

इस्त्रायल और फिलिस्तीन का झगड़ा तो जगजाहिर है। पूरी दुनिया जानती है कि दोनों एक दूसरे से इस कदर नफरत करते हैं, जैसे सांप नेवले से करता है। इसी झगड़े से करीब 55 साल पहले एक ऐसा फिलिस्तीनी नेता उभरकर सामने आया था, जिसे बाद में इस्त्रायल का सबसे बड़ा दुश्मन कहा जाने लगा। इस फिलिस्तीनी नेता को गुजरे करीब 15 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी इसके मौत की गुत्थी उलझी हुई है। तो चलिए जान लेते हैं कौन था वो नेता, जिससे इस्त्रायल इतनी नफरत करता था और क्यों उसकी मौत एक रहस्य बनी हुई है? 

Death mystery of Yasser Arafat Israel biggest enemy
यासिर अराफात - फोटो : Social media

इस शख्स का नाम है यासिर अराफात। दरअसल, कई संगठनों को मिलाकर 1964 में एक बड़ा संगठन फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) बनाया गया था, जिसका मकसद था फिलिस्तीनीयों के अधिकार हासिल करना। यासिर अराफात 1968 में इसी संगठन के मुखिया बने थे।    

Death mystery of Yasser Arafat Israel biggest enemy
यासिर अराफात - फोटो : Social media

अराफात के नेतृत्व में उनके संगठन पीएलओ ने शांति के बजाय सशस्त्र संघर्ष पर ज्यादा जोर दिया, जिसके निशाने पर हमेशा से इस्त्रायल ही रहा। विमानों का अपहरण, लोगों को बंधक बनाना और दुनियाभर में इस्त्रायली ठिकानों को निशाना संगठन का मकसद बन गया था। 

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Death mystery of Yasser Arafat Israel biggest enemy
यासिर अराफात - फोटो : Social media

असल में अराफात इस्त्रायल के अस्तित्व के सख्त खिलाफ थे, लेकिन 1988 में उनकी छवि अचानक ही बदल गई और सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा देने वाला यह शख्स संयुक्त राष्ट्र में शांति के दूत के रूप में नजर आया। पहली बार किसी राष्ट्र का नेतृत्व न करने वाले शख्स को ये सम्मान हासिल हुआ था। बाद में उन्हें शांति के नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 

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इंदिरा गांधी के साथ यासिर अराफात - फोटो : Social media

माना जाता है कि नेहरू-गांधी परिवार के साथ अराफात के बहुत करीबी रिश्ते थे। कहते हैं कि इंदिरा गांधी को वो अपनी बड़ी बहन मानते थे। यह भी कहा जाता है कि 1991 के चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने राजीव गांधी पर होने वाले जानलेवा हमले को लेकर आगाह भी किया था। 

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