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जब टिड्डियों की वजह से चीन में मारे गए थे करोड़ों लोग, हैरान करने वाली है घटना

Fri, 29 May 2020 06:31 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Fri, 29 May 2020 06:31 PM IST
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China Great Famine true story When millions of people were killed because of locusts
टिड्डियों की वजह से चीन में मारे गए थे करोड़ों लोग - फोटो : Pixabay/Social media

पाकिस्तान से आए टिड्डी दलों ने भारत में आतंक मचा रखा है। उन्होंने राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों में फसलों को बर्बाद कर दिया है। अकेले राजस्थान में इनके हमले से करीब 90 हजार हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गई हैं। इनके बढ़ते हमलों को देखते हुए दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और कर्नाटक ने अपने यहां अलर्ट भी जारी कर दिए हैं। वैसे तो हर साल टिड्डियों के कारण कुछ न कुछ फसलों को नुकसान पहुंचता ही है, लेकिन अभी के समय में इनका आतंक कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। अब ये तो रही भारत की बात, लेकिन क्या आपको पता है कि पड़ोसी देश चीन में इन टिड्डियों की वजह से ही करोड़ों लोग मारे गए थे? जी हां, यह घटना आज से करीब 60 साल पहले की है। 

China Great Famine true story When millions of people were killed because of locusts
माओ जेडॉन्ग (माओ त्से-तुंग) - फोटो : Social media

दरअसल, साल 1958 में चीन की सत्ता संभाल रहे माओ जेडॉन्ग (माओ त्से-तुंग) ने एक अभियान शुरू किया था, जिसे 'फोर पेस्ट कैंपेन' कहा जाता है। इस अभियान के तहत उन्होंने चार जीवों (मच्छर, मक्खी, चूहा और गौरैया चिड़िया) को मारने का आदेश दिया था। उनका कहना था ये फसलों को बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों की सारी मेहनत बेकार चली जाती है। 

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गौरैया चिड़िया का एक झुंड - फोटो : अमर उजाला

अब ये तो आप जानते ही होंगे कि मच्छर, मक्खी और चूहों को ढूंढ-ढूंढकर मारना मुश्किल काम है, क्योंकि ये आसानी से खुद को कहीं भी छुपा लेते हैं, लेकिन गौरैया तो हमेशा इंसानों के बीच ही रहना पसंद करती है। ऐसे में वो माओ जेडॉन्ग के अभियान के जाल में फंस गई। पूरे चीन में उन्हें ढूंढ-ढूंढकर मारा जाने लगा, उनके घोंसलों को उजाड़ दिया गया। लोगों को जहां कहीं भी गौरैया दिखती, वो तुरंत उसे मार देते। सबसे खास बात कि लोगों को इसके लिए इनाम भी मिलता था। जो इंसान जितनी संख्या में गौरैया मारता, उसे उसी आधार पर पुरस्कार से नवाजा जाता। 

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गौरैया चिड़ियों को मारकर गाड़ी में रखकर ले जाते लोग - फोटो : Social media

अब भारी संख्या में गौरैया को मारने का नतीजा ये हुआ कि चीन में कुछ ही महीनों में इनकी संख्या में तेजी से गिरावट आई और उधर उल्टा फसलों के बर्बाद होने में बढ़ोतरी हो गई। हालांकि इसी बीच 1960 में चीन के एक मशहूर पक्षी विज्ञानी शो-शिन चेंग ने माओ जेडॉन्ग को बताया कि गौरैया तो फसलों को कम ही बर्बाद करती हैं बल्कि वो अनाज को बड़ी मात्रा में नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े (टिड्डियों) को खा जाती हैं। यह बात माओ जेडॉन्ग की समझ में आ गई, क्योंकि देश में चावल की पैदावार बढ़ने के बजाय लगातार घटती जा रही थी। 

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चीन में पड़ा था भयानक अकाल - फोटो : Social media

शो-शिन चेंग की सलाह पर माओ ने गौरैया को मारने का जो आदेश दिया था, उसे तत्काल प्रभाव से रोक दिया और उसकी जगह पर उन्होंने अनाज खाने कीड़े (टिड्डियों) को मारने का आदेश दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गौरैया के न होने से टिड्डियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई थी, जिसका नतीजा ये हुआ कि सारी फसलें बर्बाद हो गईं। इसकी वजह से चीन में एक भयानक अकाल पड़ा और बड़ी संख्या में लोग भूखमरी के शिकार हो गए। माना जाता है कि इस भूखमरी से करीब 1.50 करोड़ लोगों की मौत हो गई थी। कुछ आंकड़े यह भी बताते हैं कि 1.50-4.50 करोड़ लोग भूखमरी की वजह से मारे गए थे। इसे चीन के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक माना जाता है। 

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