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Zara Hatke: इस जगह पर लगता है भूतों का मेला, खतरनाक डायन से जुड़ा है पूरा मामला, रूह कंपा देगी कहानी
Tue, 16 Sep 2025 10:59 AM IST
दीक्षा पाठक
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Tue, 16 Sep 2025 10:59 AM IST
सार
Zara Hatke: इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां दूर-दूर से वे लोग आते हैं, जो भूत-प्रेत, प्रेत बाधा या किसी पारलौकिक समस्या से परेशान होते हैं। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को उनकी समस्या का समाधान मिलता है।
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इस जगह पर लगता है भूतों का मेला
- फोटो : एक्स
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का नाम वैसे तो कई कारणों से मशहूर है, लेकिन यहां का एक मंदिर लोगों की खास आस्था और अलग कहानियों के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का नाम है नवका बाबा का मंदिर, जो मनियर कस्बे में स्थित है। यह मंदिर कितना पुराना है, इसका कोई सटीक रिकॉर्ड नहीं मिलता। फिर भी लोग इसे बेहद प्राचीन मानते हैं और इसकी कहानियां आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी गांव के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
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क्या है इस गांव की कहानी?
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां दूर-दूर से वे लोग आते हैं, जो भूत-प्रेत, प्रेत बाधा या किसी पारलौकिक समस्या से परेशान होते हैं। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को उनकी समस्या का समाधान मिलता है। नवरात्रि के समय तो यहां मेला लगता है और हजारों लोग जुटते हैं। भीड़ भले ही बहुत ज्यादा होती है, लेकिन उस समय का वातावरण काफी डरावना माना जाता है।
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भूत-प्रेत बाधा से जुड़ी समस्या लेकर आते हैं लोग
मंदिर के पुजारी श्रीराम उपाध्याय इस जगह से जुड़ी एक प्राचीन कहानी बताते हैं। उनके अनुसार बहुत पुराने समय में जब यह इलाका घने जंगल से भरा था, तब मगध प्रांत से दो भाई यहां आए थे। दोनों ने जंगल की सफाई करके इस जगह को पवित्र बनाया और मंदिर की स्थापना की। लेकिन उसी जंगल में एक डायन रहती थी। उसने चालाकी से दोनों भाइयों की हत्या कर दी और उनकी आत्माओं को एक छोटी सी डिब्बी में बंद कर दिया।
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यह है असल कहानी
कहा जाता है कि डिब्बी में बंद होने के बाद भी उन भाइयों का तेज कायम रहा। उसी तेज की आग में पूरा जंगल जलकर साफ हो गया और वह डायन भी भस्म हो गई। इसके बाद दोनों भाई स्थानीय लोगों को सपनों में दिखाई देने लगे और उनसे यहां एक स्थान बनाने की प्रेरणा दी। तभी से यह जगह भूत-प्रेत और बाकी के अलौकिक शक्तियों से मुक्ति दिलाने वाला केंद्र बन गई। शुरुआत में तो इस मंदिर की प्रसिद्धि आसपास के गांवों तक ही सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे यह नाम दूर-दूर तक फैल गया। अब यहां सिर्फ यूपी और बिहार से ही नहीं, बल्कि दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और यहां तक कि दक्षिण भारत से भी लोग आते हैं।
लोगों को यहां के इलाज से मिला है लाभ
पुजारी श्रीराम उपाध्याय का कहना है कि इस मंदिर में केवल भूत-प्रेत बाधा से ही छुटकारा नहीं मिलता, बल्कि कई लोग यहां कुष्ठ रोग, सफेद दाग और बाकी के त्वचा रोगों से मुक्ति की आशा में भी आते हैं। कुछ समय से तो मानसिक बीमारियों से परेशान लोग भी यहां आने लगे हैं। लोगों का विश्वास है कि मंदिर का प्रसाद और यहां किया गया इलाज उन्हें लाभ देता है। एक और खास बात यह है कि लोग यहां आकर मनौती मांगते हैं। जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तो वे दोबारा लौटकर प्रसाद चढ़ाते हैं। इस मंदिर में नवरात्रि के दौरान लगने वाला मेला तो खास तौर पर प्रसिद्ध है, जिसे लोग भूतों का मेला कहते हैं।