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ये हैं इतिहास की पांच खतरनाक महिला जासूस: ग्लैमर, चालाकी और जासूसी के किस्से कर देंगे हैरान
Wed, 23 Sep 2026 06:03 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह
Updated Wed, 23 Sep 2026 06:03 PM IST
सार
दुनिया में कई प्रसिद्ध महिला जासूस हुई हैं, जिनकी कहानियां जानकर लोगों को हैरानी होती हैं। आज हम आपको अपनी खबर में हिटलर के लिए जासूसी करने वाली माती हारी से लेकर ब्रिटेन की जासूस नूर इनायत खान तक कहानी बताएंगे।
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ये हैं इतिहास की 5 खतरनाक महिला जासूस
- फोटो : AI
विस्तार
दुनिया में कई प्रसिद्ध महिला जासूस हुई हैं। इन जासूसों ने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया था। इन महिला जासूसों की कहानी हर किसी को हैरान करती हैं। अपनी ग्लैमर, चालाकी और जासूसी से इन्होंने बड़े-बड़े कारनामे किए। इतिहास में अपनी निडरता, बुद्धिमानी और खतरनाक मिशनों को अंजाम देने के लिए अपनी पहचान बनाई है। आज हम आपको इतिहास की 5 खतरनाक महिला जासूसों के बारे में बताएंगे।
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माता हारी
दुनिया की प्रसिद्ध जासूस माता हारी हिटलर के लिए काम करती थी। उसकी जासूसी का पूरी दुनिया ने लोहा माना था। माता हारी ने अपने इशारे पर पूरे यूरोप को नचाया था। वह जासूस के साथ ही एक खूबसूरत डांसर भी थी। माना जाता है कि माता हारी ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मुख्य रूप से जर्मनी और फ्रांस दोनों के लिए जासूसी की थी। हालांकि, उसके वास्तविक और पुख्ता संबंधों को लेकर इतिहासकारों के बीच आज भी विवाद है।
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नीदरलैंड में साल 1876 में जन्मी माता हारी का नाम गेरत्रुद मार्गरेट था। वह माता हारी के नाम से मशहूर थी। उसका असली काम जासूसी करना था। माता हारी के कई देशों के सैन्य अधिकारियों, मंत्रियों और राजशाही लोगों से नजदीकी रिश्ते थे। अपनी अदाओं के लिए मशहूर माता हारी साल 1905 में फ्रांस की राजधानी पेरिस गई थी। उसने अपने खास अंदाज की वजह से बहुत जल्दी ही लोकप्रिय हो गई थी। माता हारी के डांस ने लोगों को दीवाना बना दिया था और वह यूरोप में नृत्य करने के लिए जाने लगी।
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फ्रांसीसी सेना ने जासूसी करने के आरोप में साल 1917 में माता हारी को गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन उसने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कभी स्वीकार नहीं किया कि वह एक जासूस है। कोर्ट को उसने बताया था कि वह सिर्फ डांसर है। लेकिन उस पर जासूसी के आरोप सिद्ध हो गए। इसके बाद उसको आंखों पर पट्टी बांध कर गोली मारने की सजा दी गई।
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नैंसी वेक
नैंसी वेक का नाम दुनिया की मशहूर लड़ाकों में गिना जाता है। नैंसी वेक का जन्म न्यूजीलैंड में 30 अगस्त 1912 में हुआ। 98 साल की उम्र में 7 अगस्त 1912 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था। नाजियों से उनकी दुश्मनी मशहूर थी। 16 साल से उम्र में वह स्कूल से भाग गईं और आस्ट्रेलिया से फ्रांस चली गईं। वहां पर पत्रकार के तौर पर काम करने लगीं। वहीं पर फ्रेंच कारोबारी हेनरी फिओक्का से शादी कर ली।
नैंसी वेक फ्रांस की मदद करने लगीं। वायु सैनिकों की स्पेन में सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में मदद दी। जब जर्मनी को उनका राज पता चला, तो 1942 में वो स्पेन होते ब्रिटेन भाग गईं। नैंसी वेक ने तीन दिन में साइकिल से 500 किमी की यात्रा की और दुश्मन के कैंप में घुसकर खुफिया जानकारी हासिल की। उन्होंने जर्मनी के खिलाफ जासूसी की थी।
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वर्जीनिया हॉल
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी और फ्रांस पर कब्जा करने वाली जर्मन ताकतों की जासूसी करती थीं। उन्होंने ब्रिटेन के गुप्त संगठन स्पेशल ऑपरेशंस एग्जीक्यूटिव और बाद में अमेरिकी संगठन सीआईए के लिए जासूस के तौर पर काम किया। वर्जीनिया का मुख्य उद्देश्य नाजी जर्मनी के कब्जे वाले क्षेत्रों (विशेषकर फ्रांस) में खुफिया जानकारी जुटाना, तोड़फोड़ करना और फ्रांसीसी प्रतिरोध आंदोलनों को संगठित करना था। उन्हें लंगड़ी महिला (The Limping Lady) के नाम से भी जाना जाता था, क्योंकि दुर्घटना में उनका एक पैर कट गया था और वह कृत्रिम पैर का इस्तेमाल करती थीं। 8 जुलाई 1982 को उनका निधन हो गया था।
नीरा आर्य
माना जाता है कि नीरा आर्य भारत की पहली महिला जासूस थीं। उनकी वीरता की कहानी सुनकर हर कोई उन्हें सलाम करना चाहेगा। 1902 में जन्मी नीरा उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की रहने वाली थीं। उनके पिता व्यापारी थी और कोलकाता में पली-बढ़ीं थी। नीरा के भीतर कूट-कूट कर देशभक्ति भी भरी थी। उनकी शादी सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास से हुई थी, जो अंग्रेजों के लिए काम करते थे। उनके पति की सोच भी कुछ अग्रेजों की तरफ झुकी हुई थी। इसके कारण नीरा और उनके पति के बीच झगड़े भी होते थे।
वह आजाद हिंद फौज में शामिल हो गईं और झांसी रेजीमेंट से जुड़ी थीं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इस रेजीमेंट को लेकर अंग्रेजों की चिंता थी कि कहीं उनकी जासूसी तो नहीं हो रही है? अंग्रेजों ने इस रजीमेंट पर नजर रखने का काम नीरा के पति को दे दिया। साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की हत्या का मिशन भी दिया था।
नीरा के पति ने एक दिन मौका मिलते ही नेता जी पर गोली चला दी, लेकिन गोली उनके ड्राइवर को लगी। नीरा ने साहस दिखाते हुए पति की चाकू मारकर हत्या कर दी। इसके बाद अंग्रेजों ने नीरा को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें बहुत यातनाएं दी। यहां तक कि अंगेजों ने ब्रेस्ट रिपर से नीरा के दाएं स्तन को काट दिया और उन्हें इसी हालत में बंद कर दिया। जब देश आजाद हुआ, तो वो रिहा हुईं और 1998 में दुनिया को अलविदा कह दिया।
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नूर इनायत खान
भारतीय मूल की नूर इनायत खान ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंडरकवर ब्रिटिश एजेंट के तौर पर फ्रेंच रेजिस्टेंस में अहम भूमिका निभाई थी। नूर इनायत खान का जन्म मॉस्को में हुआ था। उनके पिता भारतीय सूफी संत और मां अमेरिकी थीं। नूर कम उम्र में ही लंदन चली गईं और फिर स्कूल के दौरान पेरिस जाकर बस गईं।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस से उनका परिवार भागकर इंग्लैंड चला गया। यहां पर ब्रिटिश विमेंस ऑक्जिलरी एयर फोर्स में शामिल हो गईं। जासूसी के दौरान नाजी सेनाओं ने उन्हें पकड़ लिया। उन्हें 13 सितंबर, 1944 को सिर्फ 30 साल की उम्र में टॉर्चर के बाद मार दिया गया।