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तेजस्वी व चिराग के सामने पिता की विरासत बचाने की चुनौती
Wed, 21 Oct 2020 01:47 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 21 Oct 2020 01:47 AM IST
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नीतीश कुमार, चिराग पासवान, तेजस्वी यादव
- फोटो : Amar Ujala
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इस बार के बिहार चुनाव में दो दिग्गज राजनीतिक घरानों यादव और पासवान की क्षमता की भी जांच होगी। इन दोनों परिवारों के वंशज अपने-अपने पिता की अजेय विरासत को बचाए रखने के लिए भीषण चुनावी जंग लड़ रहे हैं।
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राज्य में पांच दलों के महागठबंधन का संचालन करने वाले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव दो साल उपमुख्यमंत्री रहे, लेकिन पहली बार अपने करिश्माई पिता के बिना चुनाव का सामना कर रहे हैं।
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दूसरी ओर हैं चिराग पासवान, जिनके पिता रामविलास पासवान ने अपने जीवित रहते ही लोजपा की कमान उन्हें सौंप दी थी। अपने पिता और बिहार में दलितों के बड़े नेता रामविलास पासवान के सलाहकार रहे चिराग उनकी गैरमौजूदगी में अकेले ही नाव खींच रहे हैं। गौरतलब है कि रामविलास का हाल ही में निधन हो गया था।
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जमुई से मौजूदा सांसद चिराग के सामने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिनका हर दल में कोई न कोई दोस्त था। ऐसे में लोजपा अब बिहार में एनडीए का हिस्सा भी नहीं है। हालांकि चिराग नीतीश कुमार के कट्ट आलोचक हैं, लेकिन वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्के समर्थक हैं और खुद को उनका हनुमान बताते हैं।