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बिहार: पांच साल जेल, जिंदगी तबाह... फिर अदालत का बड़ा फैसला, दो साल के बेटे की हत्या में मां बेगुनाह

Fri, 28 Aug 2026 10:29 AM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Fri, 28 Aug 2026 10:29 AM IST
सार

छपरा व्यवहार न्यायालय ने दो वर्षीय बेटे की हत्या के आरोप में पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद बबली खातून को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत कुमार सिंह की अदालत ने डोरीगंज थाना कांड संख्या 55/21 और सत्र वाद संख्या 369/21 की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

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The mother, who was in prison for more than five years, was granted freedom for her innocence:
छपरा व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत कुमार सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के छपरा व्यवहार न्यायालय से एक अहम फैसला सामने आया है, जहां अपने ही दो वर्षीय पुत्र की हत्या के आरोप में पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद बबली खातून को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत कुमार सिंह की अदालत ने डोरीगंज थाना कांड संख्या 55/21 और सत्र वाद संख्या 369/21 में सुनवाई के बाद बबली खातून को हत्या के आरोप से निर्दोष मानते हुए रिहाई का आदेश दिया। बबली खातून 3 मार्च 2021 से मंडल कारा, छपरा में न्यायिक हिरासत में थी। अदालत के इस फैसले के साथ उस आरोप से उसे मुक्ति मिल गई, जिसने करीब पांच वर्षों से अधिक समय तक उसकी जिंदगी को सलाखों के पीछे रखा था।

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साक्ष्य के अभाव में अदालत ने किया बाइज्जत बरी

आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण बबली खातून के मामले की पैरवी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तहत लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) को सौंपी गई थी। मामले में मुख्य डिफेंस काउंसिल पूर्णेन्दु रंजन ने बचाव पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी बिंदुओं को मजबूती से रखा।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों की गहन समीक्षा के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियुक्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। इसके बाद अदालत ने बबली खातून को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी करते हुए रिहाई का आदेश दिया।
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पांच साल से अधिक समय तक जेल में रही महिला

बबली खातून 3 मार्च 2021 से मंडल कारा, छपरा में न्यायिक हिरासत में थी। इतने लंबे समय तक वह अपने ऊपर लगे गंभीर आरोप के चलते जेल में रही। अब अदालत के फैसले के बाद उसे उस आरोप से कानूनी तौर पर मुक्ति मिल गई है।
यह मामला इस बात को भी सामने लाता है कि किसी गंभीर आरोप में लंबे समय तक जेल में रहना और अंततः अदालत से निर्दोष साबित होना किसी व्यक्ति के जीवन पर कितना गहरा असर डाल सकता है।

आर्थिक कमजोरी के बावजूद मिला कानूनी सहायता का अधिकार

बबली खातून की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे अपने मामले की पैरवी के लिए LADCS के माध्यम से कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई। मुख्य डिफेंस काउंसिल पूर्णेन्दु रंजन ने बचाव पक्ष की ओर से अदालत में मामले से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं को रखा। अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की समीक्षा करने के बाद पाया कि आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। इसी आधार पर बबली खातून को बाइज्जत बरी कर दिया गया।

सिर्फ आरोप लगने से कोई दोषी नहीं हो जाता

अदालत का यह फैसला केवल एक महिला की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय व्यवस्था में साक्ष्यों की अहमियत को भी रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति पर आरोप लगना अपने आप में उसे दोषी साबित नहीं करता। दोष सिद्ध करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होती है और आरोपों को संदेह से परे साबित करना आवश्यक होता है। इस मामले में जब उपलब्ध साक्ष्य अभियोजन के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए, तो अदालत ने आरोपी को कानून के तहत निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया।


LADCS ने आर्थिक रूप से कमजोर महिला को दिलाया न्याय का अवसर

इस फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को भी न्याय पाने के लिए प्रभावी कानूनी सहायता उपलब्ध कराना न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तहत LADCS के माध्यम से बबली खातून को कानूनी पैरवी मिली और बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। अदालत के फैसले ने यह स्पष्ट किया कि कानून में किसी भी व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। जब तक आरोप पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित नहीं होते, आरोपी को कानून के तहत निर्दोष होने का अधिकार प्राप्त है।

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