एक और मुस्लिम चेहरा बीजेपी में शामिल
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बिहार में मुस्लिम जमात में अपनी पैठ बढ़ाने में लगी भाजपा को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। साबिर अली के रूप में भाजपा को पहला पसमांदा नेता बिहार में मिल सकता है।
बिहार में देखा जाए तो मुस्लिम वोटरों का मत प्रतिशत करीब 16 फीसदी के आसपास है। इनमें 85 प्रतिशत मुस्लिम वोटर अजलफ अर्थात पसमांदा हैं और पांच प्रतिशत के करीब अरजल हैं।
इन्हें दलित श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे में महज 10 प्रतिशत के करीब ही अशरफ हैं, जिन्हें उच्च श्रेणी का मुसलमान कहा जाता है। भाजपा के पास बिहार में केवल शाहनवाज ही अल्पसंख्यक चेहरा थे।
एम जे अकबर भी अशरफ
हाल में किशनगंज के पूर्व सांसद एमजे अकबर जरूर पार्टी में शामिल हुए, लेकिन वे भी हुसैन की तरह अशरफ ही हैं। ऐसे में पसमांदा जमात से भाजपा में कोई प्रतिनिधित्व करने वाला नेता नहीं था।
साबिर अली उसकी भरपाई कर देंगे। राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि जदयू सांसद और शिवहर से पार्टी उम्मीदवार साबिर अली का जाना नीतीश के लिए एक बड़ी क्षति हो सकती है।
पिछले कुछ दिनों में नीतीश का साथ छोड़ने वाले अधिकतर नेता अल्पसंख्यक जमात से ही हैं और विपक्ष इसे एक मसले के रूप में उठा रहा है।
भाजपा सांसद और पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन कहते हैं कि अब मुस्लिमों का भ्रम टूट रहा है। हुसैन कहते हैं कि मुस्लिम समाज किसी की जागीर नहीं है।
नीतीश ने अल्पसंख्यकों को किया बाहर
नीतीश कुमार एक ओर अल्पसंख्यकों के हितों की बात करते हैं और दूसरी ओर चुन चुन कर अल्पसंख्यक नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं।
मुस्लिम समुदाय को लालू भाजपा का डर दिखा कर अब और खुद से जोड़कर नहीं रख सकते।
भाजपा के लिए साबिर फायदे का सौदा हों ना हों, लेकिन साबिर का राजनीतिक इतिहास को अगर देखें तो उनके लिए यह दल बदल फायदा का सौदा है।
नीतीश बोले लोकसभा लड़िए
अमूमन साबिर जैसे नेता पैसा खर्च कर राज्यसभा लेते हैं। लोग कहते हैं कि साबिर को एक बार मिला था, लेकिन इस बार नीतीश ने दरवाजा दिखा दिया। बोले कि लोकसभा लड़िये।
अब ऐसे में साबिर जैसे लोग पैसा लगाकर चुनाव लड़ने से रहे। साबिर के लिए लोकसभा घाटे का सौदा था। साबिर शिवहर में तीसरे नंबर पर थे।
साबिर शुरू से इस चक्कर में रहे कि अनवारुल मैदान से बाहर रहें। लेकिन अनवारुल को लालू का टिकट मिल गया। इसके बाद साबिर के लिए शिवहर में कुछ बचा ही नहीं था।
ऐसे में अपना पैसा खर्च कर हारना उनको बुद्धिमानी नहीं लगी। ऐसे में जदयू के अल्पसंख्यकों पर भाजपा की नजर तो थी ही, सो साबिर से भाजपा की डील हो गयी।
साबिर ने इसके बाद ही एक झटके में नरेंद्र मोदी पर बयान देकर जदयू को भाजपा जाने का साफ संदेश दे दिया। साबिर के लिए भाजपा के पास अब कोई लोकसभा सीट तो हैं नहीं, ऐसे में उम्मीद यही की जा रही है कि भाजपा आनेवाले दिनों में साबिर को राज्यसभा भेजेगी। पहले भी वे राज्यसभा में रहे हैं।
कुछ हो ना हो साबिर के आने से जहां नीतीश और लालू खेमे में हलचल है, वहीं बीजेपी थोड़ा और %सेकुलर% हो गयी और साबिर थोड़े और 'लिबरल' हो गये।