Vaibhav Suryavanshi : आईपीएल में सबसे कम उम्र के करोड़पति यूं ही नहीं वैभव सूर्यवंशी, घर वालों ने बताई मेहनत
Bihar : वैभव सूर्यवंशी की दादी चाहती थी कि उनका पोता आईएएस आईपीएस बने लेकिन बचपन से ही उसमें खेल का जुनून था। खेलने के लिए वैभव ठाकुरबाड़ी में भाग जाते थे। खेल के लिए एक बार तो उसकी पिटाई भी की थी। अब वैभव के घर लोगों का तांता लगा हुआ है।
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वैभव सूर्यवंशी के आईपीएल में एक करोड़ 10 लाख में खरीदे जाने के बाद वैभव सूर्यवंशी के घर लोगों का तांता लगा हुआ है। वैभव की सफलता पर गांव के लोग भी फूले नहीं समा रहे। वैभव के संबंध में उनकी दादी उषा सिंह ने बताया कि वैभव बचपन से ही नटखट था। वह तो चाहती थी कि उनका पोता आईएएस आईपीएस बने लेकिन बचपन से ही उसमें खेल का जुनून था खेल के लिए वह ठाकुरबाड़ी में भाग जाता था। खेल के लिए एक बार तो उसकी पिटाई भी की। पुत्र संजीव को भी डांट लगाई की खुद की तरह इसे भी बर्बाद कर देगा। लेकिन संजीव ने मना किया कहा खेलने दो। जिसके बाद उन्होंने उसे डांटना छोड़ दिया।आज पोते की सफलता पर वह फूले नहीं समा रही है। उन्होंने कहा कि अब मन पूरा गदगद हैं।
वैभव सूर्यवंशी के पिता ने उन्हें क्रिकेटर बनाने के लिए क्या नहीं किया
वैभव सूर्यवंशी के पिता संजीव सूर्यवंशी पुत्र की सफलता पर फुले नहीं समा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैभव को इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्होंने कई परेशानी भी झेली। एक दौर ऐसा भी आया उनकी दुकान बंद हो गई। आर्थिक परेशानी झेलने के कारण उन्होंने कुछ जमीन भी बेच डाली ।लेकिन वह पीछे नहीं हटे और बच्चे को कमी खलने नहीं दी। उसके जरूरत के चीजों को पूरा किया। अब उनकी ख्वाहिश है कि भारत के लिए खेले। हालांकि वह अभी अंदर-19 और एशिया कप भी खेल रहा है। लेकिन वह चाहते हैं की बहुत जल्द वह भारत के मुख्य टीम का हिस्सा बने और देश का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने बताया कि वैभव बचपन में डोरेमोन कार्टून देखा था। लेकिन जब से बैट बल्ले से उसकी दोस्ती हुई उसने कार्टून देखना छोड़ दिया।
पिता ने किया है काफी संघर्ष
वैभव सूर्यवंशी के चाचा राजीव सूर्यवंशी ने बताया कि बचपन से ही वैभव सूर्यवंशी में खेल के प्रति जुनून था। तीन वर्ष की उम्र में ही वह बैट बल्ला लेकर भागता था। वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी भी क्रिकेटर रहे हैं। वह सुखदेव टूर्नामेंट तक खेला है, लेकिन पुत्र को राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनने के लिए बचपन में ही उन्होंने ठान लिया था। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। अपनी स्कूटर से उसे अभ्यास करने के लिए पटना तक ले गये। इस दौरान आर्थिक परेशानी भी कोई कुछ जमीन भी बेचनी पड़ी, बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। आज वैभव सूर्यवंशी की इस सफलता के बाद ताजपुर के इस छोटे से गांव मोतीपुर के साथी जिला बिहार और देश के लोग वैभव पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
पिता ने वैभव के लिए किया है त्याग
ग्रामीण संजय नायक बताते हैं कि वैभव सूर्यवंशी को क्रिकेटर बनने में उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने काफी त्याग किया है। आर्थिक परेशानी झेली है, दोस्तों से कर्ज तक लिया है। कर्ज चुकाने के लिए कुछ उन्होंने जमीन तक बेच डाली। संजीव की तपस्या त्याग ने आज सफलता पाई है। वैभव के प्रैक्टिस में परेशानी ना हो इसलिए कोरोना काल में ही उन्होंने अपने घर के सामने नेट बनाया और गांव के ही कुछ बच्चों को हायर किया जो उसे बोलिंग करता था और सूर्यवंशी बैटिंग किया करता था। वैभव सूर्यवंशी की उम्र मात्र 13 वर्ष 267 दिन है।
वैभव तीन भाइयों में हैं दूसरे स्थान पर
वैभव सूर्यवंशी तीन भाइयों में दूसरे स्थान पर हैं। उनके बड़े भाई ताजपुर बाजार में एक छोटी सी दुकान चलाते हैं, जबकि छोटा भाई अभी घर पर ही वर्ग 3 में पड़ता है। वैभव सूर्यवंशी ने भी प्राइमरी की ही पढ़ाई शुरू की, लेकिन क्रिकेट के जुनून में वह भी छूट गया।
वैभव सूर्यवंशी के पिता भी कभी खेलते थे क्रिकेट
वैभव सूर्यवंशी के पिता संजीव सूर्यवंशी भी अपने समय में क्रिकेट खेलते थे और वह बिहार में आयोजित होने वाले सुखदेव क्रिकेट टूर्नामेंट का हिस्सा बन चुके हैं उन्हें भी इच्छा थी कि वह भारतीय टीम की जर्सी पहने लेकिन सफलता नहीं मिली इसके बाद उसने अपने बच्चों को इस मुकाम पर पहुंचने के लिए सपना देखा जो अब साकार होता दिख रहा है