बिहार: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बोले- जहांगीरपुरी हिंसा से सनातनी सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने की साजिश का खुलासा, एनआरसी जरूरी
गिरिराज सिंह ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर साझा किए गए एक संक्षिप्त वीडियो संदेश में जहांगीरपुरी हिंसा पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि ‘वोट के सौदागर ने जहांगीपुरी घटना को लेकर माहौल खराब करने की कोशिश की है। क्या वे वही नहीं हैं जिन्होंने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और उससे पहले राम जन्मभूमि आंदोलन के खिलाफ विद्रोह का झंडा बुलंद किया था। ये ऐसे तत्व हैं जो देश में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं और हिजाब के समर्थन में आंदोलन करना चाहते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि जहांगीरपुरी में हालिया सांप्रदायिक हिंसा ने देश के सनातनी सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने की साजिश को उजागर किया है और इसने देश में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
बेगूसराय लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे सिंह ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर साझा किए गए एक संक्षिप्त वीडियो संदेश में इस आशय पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया, ‘‘वोट के सौदागर ने जहांगीपुरी घटना को लेकर माहौल खराब करने की कोशिश की है। क्या वे वही नहीं हैं जिन्होंने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और उससे पहले राम जन्मभूमि आंदोलन के खिलाफ विद्रोह का झंडा बुलंद किया था। ये ऐसे तत्व हैं जो देश में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं और हिजाब के समर्थन में आंदोलन करना चाहते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे तत्व रामनवमी के जुलूसों पर पथराव करने के पीछे थे। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर गोलियां चला रहे थे। वे टुकड़े-टुकड़े गैंग के समर्थन में खड़े हैं।’’ केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘देश अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां अहमद मुर्तजा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले गोरखधाम मंदिर पर हमला कर सकता है और एक शरजील इमाम खुले तौर पर भारत के विघटन का आह्वान कर सकता है। इसलिए अब यह आवश्यक है कि एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाए। इस मुद्दे पर बहस हो।’’
भाजपा नेता ने एक ऐसा मुद्दा उठाते हुए जिसे नरेंद्र मोदी सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है, कहा कि दुनिया के सभी देशों में कुछ न कुछ दस्तावेज हैं जिन्हें नागरिकों को अपने पहचान के प्रमाण के रूप में ले जाने की जरूरत पड़ती है।
उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सर्वसम्मति से जिसमें भाजपा के सदस्य भी शामिल थे, एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें कहा गया था कि राज्य में एनआरसी की आवश्यकता नहीं है। बाद में सार्वजनिक रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया था कि एनआरसी लाने पर विचार नहीं किया गया।
सिंह ने अपने तीखे बयान को यह दावा करते हुए समाप्त किया कि वोट के सौदागर' देश की सनातन सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने पर तुले हुए हैं और वे चुनावों के दौरान ही मस्जिदों और मंदिरों में जाते हैं क्योंकि उनके लिए वोट के अलावा कुछ भी मायने नहीं रखता है।