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बिहारः चारों तरफ बाढ़ के बीच टापू सी बनती जिंदगी

Mon, 29 Aug 2016 01:44 PM IST
रवि प्रकाश/इंग्लिश गांव (भागलपुर) से, बीबीसी हिंदी के लिए
रवि प्रकाश/इंग्लिश गांव (भागलपुर) से, बीबीसी हिंदी के लिए Updated Mon, 29 Aug 2016 01:44 PM IST
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The flood situation in Bihar is very difficult
- फोटो : bbc

हम जहां खड़े हैं, वहां से दूर आकाश तक सिर्फ़ पानी दिखता है, मानो समंदर हो। लेकिन, यह गंगा है, कल तक अपनी तलहटी में बहने वाली गंगा, आज इंग्लिश गांव में घरों के आंगन तक गंगा बह रही है।

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इंग्लिश गांव, फरका पंचायत का हिस्सा है, इस पंचायत की 11 हज़ार की आबादी बाढ़ के पानी से घिर गई है. इंग्लिश, फरका और घोसपुर गांवों में लोग छतों पर ठिकाना बनाकर बैठे हैं।
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इन गांवों में 12 दिनों से बाढ़ का पानी है, हर तरफ़, हर घर में पानी। सड़कें नहीं दिख रहीं, गांव का संपर्क भागलपुर से टूट चुका है। कुछ उम्मीद की नावें चल रही हैं। नाविक 10 रुपये लेकर लोगों को सबौर तक छोड़ते हैं, ऐसी ही एक नाव लेकर हम भी यहां पहुंचे।
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इंग्लिश गांव का सरकारी मिडिल स्कूल डूब चुका है, सैकड़ों बीघे में लगी मकई और दूसरी फसलें बर्बाद हो रही हैं। पशुओं के लिए भूसा, खली और घास का भी अकाल है। 

मवेशियों को छत पर चढ़ाकर रह रहे लोग

The flood situation in Bihar is very difficult

73 साल के चंद्रिका यादव ने बीबीसी को बताया कि ऐसी बाढ़ पहली बार आई है, वो परिवार समेत छत पर टिके हैं। यहां दिन में कड़ी धूप है, तो रात को शीत। घर के तमाम लोग खांस रहे हैं। उनके पोते सूरज को तो बुख़ार भी हो गया था। उनकी बहुएं बग़ैर घूंघट उनके सामने से नहीं गुजरती थीं, अब मजबूरी में एक ही छत पर परदा डाल कर सो रही हैं।

गांव की पीसीसी सड़क के 4 मीटर हिस्से पर पानी नहीं है, यहां नाव लंगर डालती है। बाक़ी के सारे घर डूब चुके हैं। बाढ़ ने इंसान और जानवर के बीच का फ़र्क़ ख़त्म कर दिया है। लोगों ने मवेशियों को भी छतों पर चढ़ा लिया है, संकट उनके लिए चारा लाने का है। बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा।

इंग्लिश में यादवों की ख़ासी आबादी है। कुछ घर दलितों के भी हैं, इसी मुहल्ले के पप्पू कुमार राम आटो चलाते हैं। पिछले 10 दिनों से उनका आटो गांव में ही खड़ा है। पप्पू ने बताया कि उनके सारे पैसे ख़त्म हो गए, अब खाने का संकट है। इस बाढ़ ने सबकुछ छीन लिया है।

पीने के पानी को भी तरसे लोग

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अव्वल तो यह कि चारो तरफ पानी से घिरे गांव मे पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं। श्रवण यादव कहते हैं कि लोग सबौर जाकर मिनरल वाटर के जार खरीद कर ला रहे हैं, जिनके पास पैसे नहीं हैं, वो इसी गंगा का पानी पीने को विवश हैं।

नाव से उतरने के बाद कमर भर, तो कहीं उससे भी ज़्यादा पानी में उतरकर लोग अपने घरों तक पहुंच रहे हैं। मिट्टी के कई घर टूट गए हैं और ऐसे लोग बगल के पक्के घरों की छत पर डेरा जमाए बैठे हैं।

इंग्लिश गांव में लोगों को बाढ़ का पानी घटने का इंतज़ार है, ज़िंदगी थम गई है और लोग इसे फिर से पटरी पर लाने को छटपटा रहे हैं। उधऱ, औरतें गंगा की पूजा कर उनसे वापस लौटने की प्रार्थना कर रही हैं।

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