तेजस्वी यादव ने किसान बिल को बताया खेती के निजीकरण का हथियार, तुरंत वापस लेने की मांग
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केंद्र सरकार की ओर से लाए गए किसान बिल को लेकर विपक्ष एकजुट हो गया है और सरकार के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहा है। किसान बिल की गूंज अब बिहार चुनाव तक पहुंच गई है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने बिल को लेकर सरकार को घेरा है।
तेजस्वी यादव ने कई सारे सवाल केंद्र सरकार से किए हैं, उन्होंने कहा कि सरकार ने एसएसपी के मसले को बिल में शामिल क्यों नहीं किया है? तेजस्वी यादव ने मोदी पर सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह के बिल लाकर सरकार खेती के निजीकरण करने की ओर बढ़ रही है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि साल 2006 में नीतीश कुमार एपीएमसी को रद्द कर दिया था, वो बताएं कि इससे किसको नुकसान हुआ? मोदी सरकार को बताना चाहिए कि जब देश एक मंडी की बात होती है तो एक देश एक एमएसपी की बात क्यों नहीं हो सकती। तेजस्वी ने कहा कि इस विधेयक को तुरंत वापस लेना चाहिए नहीं तो 25 सितंबर को बिहार में भी इसके खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा।
विवाद सुलझाने के लिए इस विधेयक के अनुसार किसानों को कई लेवलों पर चक्कर लगाने होंगे। देश के 85 फीसदी किसानों के पास 2-3 एकड़ जमीन है। विवाद होने पर उनकी पूरी पुंजी वकील, कर्जे और ऑफिस के चक्कर काटने में ही लग जाएगी: राजद नेता तेजस्वी यादव https://t.co/8DYj9ZgKqP
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 23, 2020
तेजस्वी यादव बोले कि अब अन्नदाताओं को भी सरकार अपने फंडदाताओं के हवाले करना चाह रही है। मोदी सरकार की ओर से लाए गए बिल को लेकर पंजाब और हरियाणा में आंदोलन जारी है और अब इसका असर बिहार में भी देखने को मिल सकता है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि मोदी सरकार ने लोगों को सपने दिखाए थे कि साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी लेकिन ये विधेयक किसानों की आय और घटाने का काम करेगा। तेजस्वी यादव ने कहा कि इस बिल से देश में कालाबाजारी की संभावनाएं और बढ़ जाएंगी और छोटे किसानों को सबसे ज्यादा मुश्किल होगी।