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चाहकर भी कुनबे को नहीं बचा पा रहे लालू, तेज प्रताप को हत्या की धमकी

Wed, 03 Apr 2019 09:16 AM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 03 Apr 2019 09:16 AM IST
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tej pratap yadav tejashwi yadav lalu prasad yadav RJD murder threats to Tejpratap
tej pratap yadav- tejashwi yadav - फोटो : self
बिहार में लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप खुद को वंचित महसूस कर रहे हैं। छोटे भाई तेजस्वी के बढ़ते कद से ज्यादा राजद में अपने कद को लेकर दुखी हैं। तेजस्वी, तेज प्रताप और मीसा भारती के बीच विरासत की लड़ाई उस मुकाम पर पहुंच गई है, जहां लालू चाहकर भी कुनबे को नहीं बचा पा रहे हैं। बिखरता कुनबा बीमार लालू को और बीमार कर रहा है। सारण को लेकर तेजप्रताप ने जैसे तेवर दिखाए और लालू-राबड़ी मोर्चा बनाया, उससे पार्टी के लिए संकेत बेहतर नहीं हैं। इस बीच तेज प्रताप ने हत्या की धमकी देने के आरोप में एक राजद नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। 
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तेज प्रताप को मिली हत्या की धमकी 

तेज प्रताप यादव ने कहा है कि उनके निजी सचिव सृजन स्वराज के मोबाइल पर कॉल कर हत्या की धमकी दी गई। धमकी देने वाले ने खुद को गोह का छात्र राजद अध्यक्ष बताया। इस संबंध में उन्होंने पटना के सचिवालय थाना में एफआइआर दर्ज कराई गई है।
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आर-पार के मूड में तेज

दिल्ली में तेजस्वी की दखलअंदाजी से मीसा नाराज हैं, तो पार्टी में अपनी हैसियत को लेकर तेज प्रताप आर-पार के मूड में हैं। पत्नी से तलाक मामले को लेकर भी तेज प्रताप को मीसा का साथ मिला था। माना जा रहा है कि मीसा और तेज प्रताप, अपनी उपेक्षा को लेकर खफा हैं। राबड़ी इसमें असहाय हैं, तो लालू रांची से मामले को सुलझाने में नाकाम। 
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लालू की शैली में दिख रहे तेज

तेजस्वी को जब लालू ने राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया, तभी सवाल उठा था कि मीसा और तेज प्रताप के लिए उन्होंने कितनी जगह छोड़ी है। तेज प्रताप ने जिस प्रकार खुद को पांडव और तेजस्वी को कौरव बताया है, उसके पीछे भी बड़े होने का दावा और संख्या बल में कमजोर होने का अहसास है। तेज प्रताप ने उन दो सीटों की तुलना पांडवों के मांगे उन पांच गांवों से की है, जिन्हें कौरवों ने देने से इनकार कर दिया था। तेज प्रताप अपनी लड़ाई को धर्म रक्षा बता रहे हैं। यही अंदाज उन्हें लालू की शैली से जोड़ता है। 

राजद के लिए चुनौती बन सकते हैं तेज

आज तेज के पीछे राजन तिवारी को छोड़कर कोई बड़ा नाम नहीं है, लेकिन राजद के अंदर बड़ा वर्ग है, जो तेज को अपना नेता मान सकता है। फातमी, कांति सिंह, साधु यादव जैसे नेताओं को वह अपने पाले में ला सकते हैं। तेज के राजद से अलग होने पर तत्काल प्रभाव न दिखे, लेकिन भविष्य में राजद के लिए वे एक चुनौती बनेंगे। कुनबा बिखरेगा या लालू सहेजने में सफल रहेंगे, यह वक्त ही बताएगा। 
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