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Bihar Caste Census : सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- हमें यह देखना है कि सर्वे के नाम पर यह जनगणना तो नहीं
Mon, 03 Jul 2023 05:50 AM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Mon, 03 Jul 2023 05:50 AM IST
सार
Supreme Court of India : पटना हाईकोर्ट ने 04 मई को बिहार में जाति आधारित जनगणना पर अंतरिम रोक लगाई थी। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई तो उसका वहां भी 'जनगणना’ शब्द से ही पाला पड़ा।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राज्य सरकार के दस्तावेजों में इसे जाति आधारित गणना कहा गया, लेकिन राज्य के हर व्यक्ति की जाति पूछकर उनका रिकॉर्ड तैयार किए जाने के आधार पर पटना हाईकोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया जाति आधारित जन-गणना माना। चूंकि जनगणना का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, इसलिए हाईकोर्ट ने सरकार की दलील नहीं मानी। कुछ ऐसा ही सुप्रीम कोर्ट में भी हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने न तो हाईकोर्ट के फैसले को सही बताया, न गलत। लेकिन, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय ओक ने स्पष्ट कहा- "हमें यह देखना है कि सर्वे के नाम पर यह जनगणना तो नहीं है।"
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19 मई को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने लंच के पहले ही अपनी बात स्पष्ट कर दी थी कि हाईकोर्ट के आदेश में काफी हद तक स्पष्टता है, लेकिन वहां से अंतिम फैसला आए बगैर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई नहीं करेगा। वह न फैसले को सही कहेगा और न गलत। इसपर, बिहार सरकार की ओर से दलील सुनने की अपील की गई तो लंच के बाद सुनवाई शुरू हुई। सरकार ने यहां भी दलील रखी कि यह सर्वे है, जनगणना नहीं। जनगणना नहीं है, यह साबित करने के लिए तर्क दिया गया कि जनगणना के दौरान जानकारी नहीं देना जुर्म है, सर्वे में ऐसा नहीं। सरकार ने यह भी कहा कि कई राज्य ऐसे सर्वे पहले करा चुके है, यह नया काम नहीं हो रहा है। कोर्ट ने हाईकोर्ट के डाटा सुरक्षा के बिंदु पर सवाल किया तो सरकार ने कहा- “हमारा डाटा सरकारी सर्वर पर है, किसी अन्य क्लाउड पर नहीं। यह काम अंतिम दौर में था और प्रक्रिया रोके जाने के कारण पैसे की बर्बादी हो रही है।" सुप्रीम कोर्ट ने डाटा सुरक्षा को लेकर पकड़ी गई कई गड़बड़ी का जिक्र भी किया और कहा कि हाईकोर्ट ने डाटा की पुनर्जांच में यह परेशानी देखी है। इसकी प्रक्रिया को जांचने की जरूरत है। इसपर सरकारी वकील ने कहा कि ऐसा कुछ होता है तो उसे देखा जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट को पहली नजर में क्या लगा, देखें
बेंच के जस्टिस बिंदल ने कहा कि कोर्ट के समक्ष रखे गए ज्यादातर दस्तावेज इसे जनगणना ही बता रहे हैं। जस्टिस ओक ने भी सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा- "हमें यह देखना है कि सर्वे के नाम पर यह जनगणना तो नहीं है। हाईकोर्ट ने वही आदेश दिया, जो उसे प्रथम दृष्ट्या नजर आया है। हम न तो यह कह रहे हैं कि पटना हाईकोर्ट का ही आदेश सही है और न ही हम उसे गलत मानकर इसमें फिलहाल हस्तक्षेप करेंगे। इसलिए, अभी किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती है।"
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