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Bihar : 2 करोड़ की ज्वेलरी और 2.50 लाख कैश! विजिलेंस ने IAS को मैनेज करने वाले ठेकेदार के घर से यह ढूंढ़ा
Wed, 27 May 2026 10:51 PM IST
Krishan Ballabh Narayan
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Krishan Ballabh Narayan
Updated Wed, 27 May 2026 10:51 PM IST
सार
Bihar : अचानक कई गाड़ियां घर के सामने रुकी। गेट खुलवाया गया। गार्ड ने पूछा क्या बात है? कौन हैं आपलोग? लेकिन कोई कुछ नहीं बोला और दनादन सभी घर के अंदर घुस गए। करीब 11 घंटे तक चली जांच में जो निकला, वह कई कहानियां बता रहा।
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SVU के अधिकरी ले रहे तलाशी। (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पटना में विशेष निगरानी इकाई की टीम ने सरकारी निविदाओं में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। यह कार्रवाई कारोबारी रिशुश्री के घर पर की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई विशेष न्यायाधीश, निगरानी, पटना द्वारा जारी तलाशी वारंट के आधार पर हुई है। सुबह से ही अधिकारियों की टीम पटना के खगौल रोड स्थित मिथापुर इलाके में मौजूद फ्लैट में दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच में जुटी हुई थी। 11 घंटे की छापेमारी में 2 करोड़ की ज्वेलरी और 2.50 लाख कैश बरामद हुआ है। आरोप है कि बिहार में टेंडर के लिए ठेकेदार रिशुश्री सीधे IAS अधिकारियों को ही मैनेज करता था।
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टीम का कहना है कि विशेष निगरानी इकाई ने आरोपी रिशुश्री के खिलाफ कांड संख्या 05/2025 दिनांक 30 अप्रैल 2025 को दर्ज किया था। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट समेत भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। इस केस में आरोप है कि सरकारी टेंडरों में बड़े स्तर पर हेरफेर कर अपनी निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ।
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जांच टीम का कहना नही कि आरोपी रिशुश्री रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का संचालक है। उस पर आरोप है कि सरकारी निविदाओं की गोपनीय जानकारी का गलत इस्तेमाल करते हुए टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। बताया जा रहा है कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और तकनीकी जानकारियां पहले ही लीक कर दी जाती थीं, ताकि संबंधित कंपनी को फायदा मिल सके। इस मामले की शुरुआती जांच पहले प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई थी। जांच के दौरान कई वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध दस्तावेज सामने आए थे। ईडी ने अपनी रिपोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विस्तृत जांच की अनुशंसा की थी। इसके बाद विशेष निगरानी इकाई ने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।