ऐसा शख्स, जिसकी दीवानी हैं हजारों चिड़ियां

अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 21 Nov 2013 04:37 PM IST
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sparrowman of bihar creates the difference

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अर्जुन सिंह की उम्र 48 साल थी, जब उन्होंने 2004 और 2005 में अपने पिता और पत्नी को खो दिया। इसे बाद शुरू हुआ डिप्रेशन और अकेलेपन का लंबा सिलसिला, जो 2007 तक जारी रहा।
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एचटी के मुताबिक इसके बाद अर्जुन को ऐसे साथी मिली, जो आम नहीं कहे जा सकते। एक चिड़िया उनके आंगन में पेड़ से गिरी और उनकी पूरी जिंदगी बदल गई।
उन्होंने कुछ दिनों तक चिड़िया की तीमारदारी की। ठीक होकर वह उड़ चली, लेकिन चिड़ियों के साथ अर्जुन का रिश्ता और मजबूत हो गया।
पल रही हैं 8 हजार चिड़ियां
बिहार में रोहतास जिले के नेराईपुर गांव में अर्जुन के पुश्तैनी मकान में और आसपास करीब 8 हजार चिड़िया पल रही हैं।

उनके 'आओ, आओ' के आवाज देते ही आसमान से चिड़ियाएं पल भर में उनके आंगन में उतर आती हैं। अनुमान है कि वह हर साल चिड़ियों को छह क्विंटल धान खिला देते हैं।

उन्होंने कहा, "मैं जब भोजन करने बैठता हूं, तो ये पंछी मेरे पास आ जाते हैं और मेरी प्लेट से खाना चुगने लगते हैं। अपने घर में जब मैं चलता हूं, तो वे उड़ते नहीं, बस अलग हट जाते हैं। उन्होंने मुझे स्वीकार लिया है। मेरा अकेलापन उन्होंने दूर कर दिया है।"

केमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले अर्जुन सिंह ने कहा, "मेरे पिता और पत्नी के निधन ने मुझे पूरी तरह खत्म कर दिया था। मानसिक तनाव सहन नहीं हो रहा था। मेरी बेटी उस वक्त पांच साल की थी और सासाराम में रहने वाले मेरे भाइयों ने उसका ख्याल रखा। लेकिन मैं अकेला पड़ गया और मुझे अवसाद हो गया।"

एक चिड़िया ने बदली जिंदगी
एक बीमार चिड़िया ने सब कुछ बदल दिया। पंछियों से उनकी मोहब्बत ने गांववालों को भी पिघला दिया, जो चिड़ियों को खाना मुहैया कराने लगे और उनके रहने का इंतजाम करने लगे।

उनकी ख्याति कुछ इस कदर बढ़ चुकी है कि पिछले साल चिड़िया को अपना राज्य पक्षी घोषित करने वाली बिहार सरकार ने उनके बचाव से जुड़ी योजना पर काम करते हुए अर्जुन से सलाह-मशविरा किया।

चिड़ियों के साथ कई साल गुजारने की वजह से अर्जुन सिंह को उनके बारे में काफी जानकारी हो गई है। उन्होंने कहा, "भ्रष्टाचार, मोबाइल टावर से निकलने वाली रेडिएशन, कीटनाशकों का इस्तेमाल, शहरीकरण और उन्हें रहने की जगह न मिलने के कारण चिड़ियों की तादाद में लगातार कमी आ रही है।"
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