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पटना में सिलसिलेवार धमाके: 6 मरे, 83 घायल

Mon, 28 Oct 2013 11:47 AM IST
हरीश लखेड़ा/पटना
हरीश लखेड़ा/पटना Updated Mon, 28 Oct 2013 11:47 AM IST
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seven bomb blast in modi's rally, 5 dead, 83 injured

नरेंद्र मोदी के हुंकार भरने से पहले ही पटना रविवार को बम धमाकों की गूंज से दहल उठा। ऐसे में नमो-नमो का जयकारा पल भर में घायलों की चीत्कार में बदल गया।

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मोदी के रैली स्थल पर पहुंचने से पहले ही गांधी मैदान समेत पटना में एक के बाद एक आठ धमाके हुए, जिसमें छह लोगों की जान चली गई और 83 से अधिक लोग घायल हो गए।
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आठ में से दो धमाके रैली खत्म होने के बाद सुरक्षा जांच के दौरान हुए। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से घटना की रिपोर्ट मांगी है और जांच के लिए एनआईए की टीम पटना भेज दी है।
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घमाकों के लिए कम शक्तिशाली बम का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसकी वीभत्सता और भयावह हो सकती थी, क्योंकि बिहार के विभिन्न इलाकों से आए लोगों से खचाखच भरे गांधी मैदान के आसपास हुए धमाकों की खबर से भगदड़ मचने की आशंका थी।

भाजपा नेता बताते रहे आतिशबाजी
धमाकों के दौरान मंच पर विराजमान भाजपा नेता इसे आतिशबाजी बताते रहे। भले ही उन्हें भी धमाकों की सच्चाई का पता नहीं था, लेकिन उनकी इन बातों ने कम से कम रैली में भगदड़ मचने से बचा लिया।

हालांकि धमाकों की गंभीरता का पता इस बात से लग जाता है खुद नरेंद्र मोदी को अपने भाषण के अंत में लोगों से अपील करनी पड़ी कि वे शांति बनाए रखें।

पहला धमाका हुआ 11.45 बजे
लोकसभा चुनाव के लिए यहां गांधी मैदान में हुंकार भरने आए मोदी के रैली में पहुंचने से पहले धमाके हो चुके थे। पहला धमाका गांधी मैदान के पास ठीक 11.45 बजे हुआ। तब शाहनवाज हुसैन मंच से भाषण कर रह दे रहे थे।

धमाके के बाद जब भीड़ में अफरातरफी मचने की नौबत आई तो शाहनवाज ने कहा कि टायर फटा है। चिंता की कोई बात नहीं। दूसरी बार 12.10 पर लगातार दो धमाके हुए। तब सुशील मोदी बोल रहे थे।

नहीं किए गए सुरक्षा के कड़े इंतजाम
एक धमाका पत्रकारों की गैलरी के ठीक पीछे हुआ। तब सुशील मोदी ने लोगों से कहा कि वे पटाखे न फोड़ें। भाजपा नेताओं की इस तरह की बातों से लोग यह मानकर चल रहे थे कि नरेंद्र मोदी के पटना आने की खुशी में कार्यकर्ता आतिशबाजी कर रहे हैं, लेकिन मामला ज्यादा देर तक छुप नहीं पाया।

टीवी चैनलों पर बम धमाकों की खबरें आनी शुरू हो गईं और रैली के अंत तक सबको सच्चाई का पता चल गया। सूत्रों के अनुसार प्रदेश सरकार को केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने पहले ही आगाह कर दिया था। इसके बावजूद रैली के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं किए गए थे।

गांधी मैदान में धमाकों की पहली घटना
गांधी मैदान के आसपास छह धमाके हुए, जबकि एक धमाका रेलवे स्टेशन पर हुआ। देर शाम तक बिना फटे बम मिलने का सिलसिला जारी था। पुलिस के अनुसार धमाके कम तीव्रता वाले देशी बम से किए गए थे, अन्यथा हताहतों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाती।


राजनीतिक रैलियों के लिए मशहूर गांधी मैदान चारदीवारी से घिरा है। इसमें चार गेट हैं। डीएम व एसएसपी के आवास भी मैदान के आसपास ही हैं। जिस समय धमाके हुए उस समय मैदान के अलावा आसपास की सड़कों पर भी भारी भीड़ थी। गांधी मैदान में रैली के दौरान बम धमाकों की यह पहली घटना है।

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